मुसलमान मोदी के एक कदम पास, दो कदम दूर

    • Author, अंकुर जैन
    • पदनाम, बीबीसी हिन्दी डॉट कॉम के लिए, अहमदाबाद से

अपने 64वें जन्मदिन के एक तोहफ़े का इंतज़ार नरेंद्र मोदी आज भी कर रहे हैं. भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा ने मोदी को जन्मदिन के उपहार के रूप में अल्पसंख्यक समुदाय के एक लाख सदस्यों को भर्ती करने की मुहिम शुरू की थी.

17 सितंबर 2013 को शुरू हुई यह मुहिम गुजरात के सभी 33 जिलों में शुरू की गई और इसमें 25 सितंबर तक एक लाख मुसलमानों को जोड़ने का लक्ष्य बनाया गया. पार्टी का दावा है कि पांच दिसंबर तक उन्होंने 70, 000 अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों को बीजेपी में शामिल किया गया है. इनमें से 95 प्रतिशत मुसलमान हैं.

गुजरात भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा के महबूब अली बावा ने कहा, "सबसे ज़यादा सूरत, राजकोट और भावनगर में मुसलमानों ने भाजपा कि प्राथमिक सदस्यता ली है. हालाँकि कुछ प्रबंधकीय कारणों और लंबे मानसून कि वजह से हम एक लाख सदस्यों को शामिल नहीं कर पाए."

बावा कहते है कि 70,000 अल्पसंख्यक में करीब 1,000 लोग ईसाई और पारसी हैं और बाक़ी सब मुसलमान हैं.

एक लाख मुसलमानों का साथ

बावा के मुताबिक किसी भी प्रदेश में भाजपा के साथ इतने सारे मुस्लिम नहीं जुड़े हैं. हालांकि वे यह मानते हैं कि इन नए सदस्यों में से काफी सारे लोग पहले भी पार्टी के साथ थे पर उन्हें अब नए तौर से शामिल किया गया है.

बावा ने इस अभियान के बारे में बताया, "हर प्राथमिक सदस्य को 5 रुपए देने होते हैं और एक फॉर्म भरना होता है. फॉर्म में उन्हें अपने और अपने परिवार की सभी जानकारी देनी होती है. मोदीजी के कहने पर यह मुहिम और राज्यों में भी जोर-शोर से शुरू हो चुकी है."

मोदी के बारे में कहा जाता है कि वे अपने कुर्ते का रंग भी, चाहे वह केसरिया हो या हरा, अपनी सभा में जमा होने वाली भीड़ को ध्यान में रखकर पसंद करते हैं. इतना ही नहीं, अपनी हर बात को डंके की चोट पर कहने वाले मोदी ने अल्पसंख्यकों की इतनी बड़ी संख्या में पार्टी से जुड़ने का एलान किसी सभा में नहीं किया है.

वैसे गुजरात भारतीय जनता पार्टी के अल्पसंख्यक मोर्चे के दावे से इंडियन एक्सप्रेस, अहमदाबाद के वरिष्ठ पत्रकार तनवीर सिद्दीकी इत्तेफाक नहीं रखते हैं. उन्होंने कहा, "ये जो आंकड़े पेश किए जा रहे हैं, उसकी सत्यता संदिग्ध है. इसका कोई ठोस प्रमाण नहीं दिखता कि मुसलमानों का झुकाव भारतीय जनता पार्टी के पक्ष में हो रहा है."

वैसे एक तरफ मोदी के कार्यकर्ता जस्टिस राजिंदर सच्चर कमेटी की रिपोर्ट में गुजरात के मुसलमानों के बारे में कही गई कुछ बातों को मुसलमानों के बीच लेकर जा रहे हैं और उन्हें भाजपा से जोड़ रहे हैं. वहीं दूसरी तरफ मोदी सरकार ने सच्चर समिति को असंवैधानिक बताते हुए सुप्रीम कोर्ट में दी गई याचिका में इसे गैर कानूनी पैनल बताया है.

दावे की हकीकत

गुजरात भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चे के महासचिव मोहम्मद अली कादरी ने कहा, " हम लोगों से कहते हैं कि सच्चर समिति के मुताबिक गुजरात के मुसलमान बाकी राज्यों के मुसलमानों से ज्यादा संपन्न हैं. रिपोर्ट में बताया गया है कि मोदी के राज में गुजरात का मुसलमान ज़्यादा पढ़ा-लिखा है और यह भी कहते हैं कि पिछले दस सालों में यहाँ एक भी दंगे नहीं हुए हैं, जबकि बाक़ी राज्यों में हुए हैं.”

मोदी ने भी सच्चर रिपोर्ट की दुहाई देकर अपने ब्लॉग में लिखा है कि गुजरात के मुसलमानों की हालत बाक़ी राज्यों से कहीं ज़्यादा बेहतर है. गुजरात के मुसलमानों ने बाक़ी राज्यों के मुक़ाबले ज़्यादा तरक्की की है.

बावा कहते हैं कि वह फेसबुक पर 'मुस्लिम फॉर नरेंद्र मोदी' जैसे पेज बनाकर और ट्विटर जैसे सोशल नेटवर्किंग साइट्स का उपयोग करके लोगों तक सच्चर समिति की रिपोर्ट ले गए.

हालांकि, गुजरात सरकार ने पिछले ही महीने सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दाखिल की है जिसमें जस्टिस राजिंदर सच्चर समिति को असंवैधानिक बताया है और आरोप लगाया है कि समिति का मूल मकसद सिर्फ मुस्लिमों की मदद करना है.

मुसलमानों की राय

भाजपा भले ही इतने मुसलमानों को पार्टी में शामिल करने का दावा कर रही है पर अहमदाबाद शहर में शायद ही कोई आम मुसलमान नरेंद्र मोदी को समर्थन देने कि बात कहता नजर आता है. ख़ासकर करके मुस्लिम आबादी वाले पुराने शहर के विस्तार या नए अहमदाबाद के जूहापुरा और नरोदा जैसे इलाकों में आज भी मोदी को मुसलमान विरोधी नेता के तौर पर ही देखा जाता है.

अहमदाबाद के सामाजिक शोधकर्ता 31 साल के जुनैद शेख ने कहा, “मुसलमान नरेंद्र मोदी का समर्थन कभी नहीं करेंगे. मुझे लगता है की भाजपा अपने आयोजनों में कुछ मुसलमानों को खड़ा कर यह साबित करना चाहती है कि मुसलमान भी उनके विकास मॉडल की प्रशंसा कर रहा है. लेकिन पिछले 11 साल में, अल्पसंख्यकों के विकास के लिए कुछ भी नहीं किया गया है गुजरात में. कुछ हाई प्रोफाइल मुस्लिम व्यवसायी राज्य सरकार के साथ काम करने के लिए मोदी को समर्थन दे रहे हैं.”

अहमदाबाद के एक मुस्लिम व्यापारी और मोदी के समर्थक जफ़र सरेशवाला कहते हैं, "कोई भी मतदाता यह कभी नहीं दिखाता कि वो किसका समर्थन कर रहा है. आज मुसलमान समझ गया है कि केवल मुसलमानों की टोपी पहनने से या फिर स्वयं को धर्मनिरपेक्ष कहलाने वाली पार्टी से उनका भला नहीं हो सकता.”

कारोबार के लिए साथ

सरेशवाला दावा करते हैं कि मुसलमान सार्वजनिक रूप से मोदी को भले स्वीकार नहीं कर रहा होगा लेकिन उसने गुजरात में 2012 में भाजपा के लिए वोट दिया है.

वरिष्ठ पत्रकार तनवीर सिद्दीकी ये जरूर मानते हैं कि कारोबारी मुसलमान मोदी के साथ दिखना चाहता है ताकि उसके कारोबार पर कोई असर नहीं पड़े. उन्होंने कहा, "यह शुद्ध रूप से कारोबारी साथ है, चुनाव के वक्त यह वोट में तब्दील होगा, इसका दावा नहीं किया जा सकता."

वैसे गुजरात के लोग यह भी मानते हैं कि अगर मोदी मुसलमान विरोधी नहीं हैं तो क्यों 2012 के विधानसभा चुनाव में मुसलमानों को बीजेपी ने टिकट नहीं दिया. 2001 से 2012 तक गुजरात में मोदी के नेतृत्व में तीन चुनाव हुए जिसमें भाजपा ने एक भी टिकट मुसलमान उम्मीदवार को टिकट नहीं दिया.

इसके जवाब में बीजेपी का कहना है कि हाल में गुजरात में 240 मुसलमान पार्षद भाजपा के टिकट पर जीते हुए हैं.

वहीं कांग्रेस इस पूरे अभियान को मोदी का एक और झूठ बता रही है. गुजरात कांग्रेस के प्रवक्ता मनीष दोषी कहते हैं, "मुसलमानों को सदस्य बनाना मोदी का एक और झूठ है और यह 70, 000 आंकड़ा तो सबसे बड़ा झूठ है."

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