क्यों तेंदुओं से परेशान है मुंबई के लोग?

- Author, मैथ्यू बैनिस्टन
- पदनाम, बीबीसी आउटलुक
पिछली साल मुंबई के आसपास के इलाकों में तेंदुए के हमले में सात लोगों की मौत हो गई थी.
इसके बाद लोगों ने तेंदुओं की समस्या से निजात दिलाने के लिए सरकार से अपील की. वन विभाग के अधिकारी कृष्णा तिवारी लोगों को इस संबंध में शिक्षित करते हैं.
वो बताते हैं, संजय गांधी राष्ट्रीय पार्क दुनिया के कुछ बड़े शहरी संरक्षित वनों में से एक है. यह पार्क मुंबई जैसी घनी आबादी वाले शहर के बीच में है. इसकी परिधि में आने वाली अधिकतर ज़मीन पर लोगों ने कब्ज़ा कर रखा है.
वो बताते हैं कि पार्क के आसपास और इसके अंदर दो लाख से अधिक लोग रहते हैं और अपनी बस्तियां बसा रखी हैं. लोगों ने तेंदुएके प्राकृतिक आवास पर अतिक्रमण रखा है, जबकि तेंदुए मुंबई के इस जंगल में बहुत पहले से रहते आ रहे हैं.
प्रिय शिकार
जंगल के आसापास और अंदर बसी हुई बस्तियों में बहुत से कुत्ते, बकरियां, मुर्गे-मुर्गियां और सूअर रहते हैं. ये <link type="page"><caption> जानवर</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2012/06/120628_sheep_train_accident_jk.shtml" platform="highweb"/></link> तेंदुओं का प्रिय भोजन होते हैं.
भोजन की तलाश में तेंदुए इन बस्तियों में आते रहते हैं. इस दौरान उनका इंसानों से आमना-सामना हो जाता है. इस तरह हम कह सकते हैं कि तेंदुओं के इलाकों में पहले इंसानों ने ही अतिक्रमण किया.
कृष्णा बताते हैं कि जब उन्होंने तेंदुओं के भोजन को लेकर अध्ययन किया तो पता चला कि तेंदुए जंगल में बिल्लियों और हिरणों का शिकार करते हैं. लेकिन अतिक्रमण की वजह से उनकी भी कमी हो गई है. इसलिए वो शिकार की तलाश में पार्क के आसपास की बस्तियों में आते हैं.
उन्होंने बताया कि <link type="page"><caption> तेंदुए</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2012/01/120109_leopard_attack_pp.shtml" platform="highweb"/></link> भोजन के लिए 20 किलो से कम के जानवर को ज्यादा पसंद करते हैं. 60 फ़ीसदी मामलों में वह कुत्तों का शिकार करते हैं.
वो बताते है कि तेंदुए के हमले की अधिकतर घटनाएं ग़लत पहचान की वजह से होती हैं. पार्क के आसपास बनी बस्तियों में नागरिक सुविधाओं का आभाव हैं. इसलिए शौच आदि के लिए लोग जंगल की ओर जाते हैं.
कृष्णा बताते हैं कि शौच के लिए बैठे हुए लोग या पांच-सात साल का कोई बच्चा जब तेंदुए के सामने आता है, तो तेंदुआ उन्हें अपना भोजना समझ बैठता है. यह स्थिति इंसान के लिए बहुत ही ख़तरनाक़ होती है.
वो बताते हैं कि संजय गांधी पार्क में होने वाली अधिकतर घटनाएं उस समय होती हैं, जब लोग शौच आदि के लिए बैठे होते हैं. क़रीब 80 फ़ीसद घटानाएं महिलाओं और बच्चों के साथ होती हैं.
तेंदुओं के हमले से बचने के उपाय के सवाल पर कृष्णा तिवारी बताते हैं,'' मैं लोगों से कहता हूँ कि शौच के लिए पार्क में न जाएं और शाम के समय बच्चों को अकेला न छोड़ें. शाम के समय अगर पार्क में जाना ही पड़ तो अपने साथ एक टार्च और छड़ी ज़रूर लेकर जाएं.''
तेंदुए से दूरी रखें
कृष्णा बताते हैं कि मैं लोगों से कहता हूँ कि जब वे कोई तेंदुआ देखें तो भयभीत न हों और न उसे मारने के लिए डंडा लेकर दौड़ें. तेंदुए को वहां से जाने दें. तेंदुआ एक बहुत ही शर्मिला जानवर होता है, वह लोगों से दूरी बनाकर रखता है. जिस तरह हमें अपने जान की चिंता होती हैं, उसी तरह तेंदुए को भी अपने जान की चिंता रहती है. जब आपको कोई तेंदुआ दिखे तो उससे दूरी बनाकर रखें.

वो बताते हैं कि अगर तेंदुए के हमले में मारे गए लोगों की संख्या को देखें तो यह, मुंबई में रेल और सड़क हादसों में रोज़ मरने वालों की संख्या की तुलना में बहुत कम है.
इसके बाद भी तेंदुए के हमले को दरकिनान नहीं किया जा सकता. वो बताते हैं कि एक महीने पहले ही आरएमएल कॉलोनी में तेंदुए के हमले में चार साल की एक बच्ची की मौत हो गई थी. इसके करीब 20 दिन बाद तेंदुआ 12 साल के एक बच्चे को उठा ले गया था.
कृष्णा बताते हैं कि पिछले एक दशक में तेंदुए के हमले की क़रीब सौ घटनाएं हुई हैं. इनमें क़रीब 50 लोगों की जान गई है.
वो बताते हैं कि तेंदुए का हमला मुंबई के लोगों के लिए एक गंभीर मामला है. आरएमएल कॉलोनी की घटना के बाद लोगों में वन विभाग और पार्क अधिकारियों के प्रति गुस्सा था. वहीं कुछ ज़िम्मेदार नेताओं का कहना था कि तेंदुओं की गोली मार देनी चाहिए. वन विभाग पर तेंदुए को पकड़ने का भी बहुत दबाव था.
तेंदुओं के प्रवक्ता
ऐसे में अब पहली बात यह कि हम इस बात का पता कैसे लगाएंगे कि कौन सा तेंदुआ नरभक्षी है और कौन नहीं. इस तरह के तेंदुओं का पता लगाने का कोई तरीका नहीं हैं.
दूसरी बात यह कि सभी तेंदुए ऐसे नहीं होते हैं, तो आप सबकों गोली कैसे मार सकते हैं.
कृष्णा बताते हैं कि उनका काम लोगों के जीवन को ध्यान में रखते हुए तेंदुओं के संरक्षण के लिए काम करना है. जितना महत्वपूर्ण इंसानों का जीवन है, उतना ही महत्वपूर्ण तेंदुए का जीवन भी है. ऐसे में कोई घटना हो जाने के बाद हमारे ऊपर तेंदुए को पकड़ने का दबाव होता है. पिछले दिनों हमने दो तेंदुओं को पकड़ा था.
वो बताते हैं कि तेंदुओं को पकड़ने और उसके बाद कुछ दिशा-निर्देशों का पालन करना होता है. उन्हीं के मुताबिक़ तेंदुओं को पकड़ा जाता है और बाद में उन्हें जगंल में ही किसी उचित जगह पर उसे छोड़ दिया जाता है.
कृष्णा तिवारी बताते हैं कि उनके काम को देखते हुए उन्हें तेंदुओं का प्रवक्ता कहा जा सकता है, क्योंकि उनका काम तेंदुओं का संरक्षण करना है.
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