भूली भंवरी, विधायक की दौड़ में मदेरणा-विश्नोई

लीला मदेरणा
इमेज कैप्शन, महिपाल सिंह मदेरना की पत्नी लीला मदेरना राजस्थान के ओसियां विधानसभा क्षेत्र से प्रत्याशी हैं.
    • Author, दिव्या आर्य
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता, ओसियां (राजस्थान) से

वर्ष 2011 में भंवरी देवी की हत्या के आरोप में जेल में बंद महिपाल सिंह मदेरणा की बेटी अपनी मां लीला मदेरणा के लिए ओसियां विधानसभा क्षेत्र की चुनावी सभाओं में जब भावुक होकर बोलती हैं तो तालियां गूंज उठती हैं.

वो कहती हैं, “मेरे पिता पर संकट के बादल छाए हैं, तो घर की दो औरतें आपके पास आई हैं...”

मानो इस बात से कोई फर्क ही ना पड़ता हो कि ओसियां के मौजूदा विधायक महिपाल सिंह जेल में हैं और उनकी पत्नी लीला को उसी कांग्रेस पार्टी ने ओसियां से टिकट दिया है जिसने महिपाल सिंह को मंत्रीपद से इस्तीफा देने को कहा था.

जाट समुदाय में पैठ रखने वाले मदेरणा परिवार को टिकट देना कांग्रेस की राजनीतिक ज़रूरत हो सकती है, पर जनता का ये रुख क्यों?

ओसियां में अपनी दुकान चलाने वाले संजय कहते हैं, “लोग जानते हैं कि ये सब राजनीतिक साज़िश है, मदेरणा तो निर्दोष हैं, और उनकी पत्नी, उनका परिवार ही तो उनकी विरासत को आगे लेकर जाएगा, देश भर में यही होता आया है.”

लोकतंत्र से विश्वास उठा

भंवरी देवी
इमेज कैप्शन, भंवरी देवी के कथित दैहिक शोषण और हत्या के मामले ने राजस्थान की सियासत में भूचाल ला दिया था.

परिवार और जाति में भरोसा इतना कि ओसियां के एक निवासी मानाराम गोंदा कहते हैं, “महिपाल जेल में हैं तो क्या, उनके पिता परसराम मदेरणा से बड़ा नेता राजस्थान में हुआ ही नहीं, हमें उन पर विश्वास है, इस परिवार को संकट से बचाना है.”

जेल में बंद भंवरी की हत्या के आरोपियों के परिवारवाले जहां चुनाव लड़ रहे हैं, वहीं भंवरी के बच्चों का लोकतंत्र पर से ही विश्वास उठ रहा है.

भंवरी की बड़ी बेटी अश्विनी 17 साल की है. उसके मुताबिक जाति के आधार पर ही टिकट देना है और वोट पड़ने हैं तो चुनाव का ढोंग ही क्यों किया जा रहा है.

अश्विनी ने कहा, “जाति की राजनीति से तो एक ही जाति का विकास होता रहेगा. हम तो वैसे भी पिछड़ी जाति के हैं, हमारा कोई उम्मीदवार खड़ा नहीं होता, होगा तो हार जाएगा. ऐसी राजनीति से अच्छा लोकतंत्र नहीं बनता.”

मां की हत्या और फिर पिता की गिरफ़्तारी के वक्त अश्विनी जयपुर के एक स्कूल में पढ़ाई करती थीं, पर ये सब होने के बाद उन्हें उस स्कूल को छोड़ वापस गांव के स्कूल में दाखिला लेना पड़ा.

माँ की जगह नौकरी

अमरी देवी
इमेज कैप्शन, मलखान सिंह विश्नोई की माँ राजस्थान विधान सभा चुनाव की सबसे बुजुर्ग प्रत्याशी हैं.

अश्विनी के भाई ने स्कूल की पढ़ाई ख़त्म कर भंवरी देवी की जगह नौकरी करनी शुरू कर दी है, और घर का खर्च दादी की पेंशन से चलता है.

पूरे परिवार को मलाल है कि अब कोई उनकी सुध नहीं लेता, अश्विनी बताती है कि इलाके के भाजपा प्रत्याशी तक उनसे वोट मांगने नहीं आए.

भंवरी के गांव की सरपंच जयमाला बताती हैं कि गांव में भंवरी का व्यवहार बहुत अच्छा था और ये भी मानती हैं कि हत्या किया जाना ग़लत है.

इस सबके बावजूद वो कहती हैं, “राजनीति में सब चलता है, चुनाव में किसी को कुछ नहीं कह सकते, और बड़ी जातियों को टिकट देना ही पड़ता है.”

भंवरी की हत्या में दूसरे आरोपी मलखान सिंह विश्नोई के परिवार को भी उनके विधानसभा क्षेत्र लूनी से कांग्रेस ने टिकट दिया है.

मलखान की 80 वर्ष की मां, अमरी देवी वहां से लड़ रही हैं. पर लोगों में गुस्सा तो दूर, वहां भी वो सफ़ाई देने दौड़े चले आते हैं.

लूनी के एक निवासी ने कहा, “गलती तो एक आदमी करता है तो उसकी सज़ा उसे मिलनी चाहिए, ना कि पूरे परिवार को.”

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