केदारनाथ में आस्था ने डर को परास्त किया

- Author, शालिनी जोशी
- पदनाम, बीबीसी हिन्दी डॉट कॉम के लिए, देहरादून से
जून महीने में प्रलयंकारी बाढ़ और बारिश से केदारनाथ में मौत का जैसा तांडव हुआ था, देखते ही देखते हजारों लोग काल कवलित हो गए थे और मकान और दुकान जिस तरह तबाही की भेंट चढ़ गए थे उससे तो यही लगता था कि अब कभी कोई केदारनाथ नहीं आएगा. लेकिन चार महीने भी नहीं गुजरे कि श्रद्धालु फिर से केदारनाथ के दर्शन के लिए पंहुचने लगे हैं.
नवरात्र के पहले दिन से औपचारिक तौर पर केदारनाथ यात्रा शुरू हुई और 24 किमी की खड़ी चढ़ाई पैदल तय करके जब 120 श्रद्धालुओं का पहला जत्था केदारनाथ पंहुचा तो ये इस बात सबूत था कि आपदा की विभीषिका आस्था और श्रद्धा को पराजित नहीं कर पाएगी.
जहां सरकार के लिये ये संतोष की बात है कि लोगों में यात्रा को लेकर उत्साह बना हुआ है वहीं सबसे ज्यादा राहत उन छोटे व्यवसायियों के चेहरे पर देखी जा सकती है जो पिछले चार महीने से चिंता और आशंका के भँवर में झूल रहे थे.
सरकार ने इस बार फुलप्रूफ इंतजाम करने की कोशिश की है और कोई कसर नहीं छोड़ी है. गुप्तकाशी में यात्रियों का बाकायदा रजिस्ट्रेशन किया जा रहा है. उनके स्वास्थ्य की जांच की जा रही है और ब्लड-प्रेशर, हृदय रोग और डायबिटीज की जांच के बाद ही यात्रियों को अनुमति दी जाएगी.
कड़ी सुरक्षा
केदारनाथ के रास्ते को भी वन-वे कर दिया गया है ताकि एक बार में 150 से ज्यादा लोग केदारनाथ में नहीं हों. गुप्तकाशी के बेसकैंप में हेलीकॉप्टर तैनात हैं और बिना अनुमति के किसी व्यावसायिक हेलीकॉप्टर को उड़ान भरने की इजाजत नहीं है.
मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा ने कहा, “बिना पंजीकरण के कोई भी यात्री केदारनाथ नहीं जाएगा ताकि हमें पता रहे कौन और कितने लोग वहां जा रहे हैं. उनकी व्यवस्था प्रशासन करेगा. अगले साल तक यात्रा और सामान्य हो जाएगी.”

केदार घाटी के स्थानीय लोगों के राहत और पुनर्वास के लिये 17 तारीख को बैठक की जा रही है जिसमें उनके लिये पैकेज तय किया जाएगा.
प्रमुख विपक्षी दल बीजेपी ने जहां सरकार को आगाह किया है कि वो यात्रियों का पूरा ख्याल रखे वहीं सीपीएम के वरिष्ठ नेता बच्चीराम कौंसवाल ने कहा, “यात्रा शुरू होने से स्थानीय लोग आश्वस्त हुए हैं और यहां की आर्थिक हालात के लिये ये एक सकारात्मक संकेत है."
मौसम प्रतिकूल
मौसम विभाग के अनुसार मौसम अब अनुकूल हो रहा है लेकिन हल्की बारिश के आसार बने हुए हैं. इस बीच बद्रीनाथ और हेमकुंड साहिब के रास्ते में भूस्खलन की खबर है जिससे रास्ता बाधित हो गया है.
इस बीच केदारनाथ जाने की अनुमति मिलने से उन यात्रियों के परिजन भी यहां पंहुच रहे हैं जो जून की आपदा में लापता हो गए थे. कोई अपने माता-पिता की तलाश में तो कोई अपने मित्र की तलाश में यहां पंहुच रहा है. उन्हें अब भी आस है कि शायद उनके परिजन वहीं कहीं पहाड़ियों या गांव कस्बों में होंगे.
बहरहाल अभी यात्रा सिर्फ एक महीने के लिए ही होगी और दीवाली के बाद हर बार की तरह केदारनाथ के कपाट बंद कर दिए जाएंगे. अगली बार गर्मियों में दोबारा यात्रा शुरू होगी और उसके पहले सरकार के पास एक लंबा समय है कि वो आपदा और राहत से सबक लेते हुए इंतजाम और दुरूस्त करे.
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