मुंबई इमारत हादसे में 54 की मौत, 32 घायल

शुक्रवार की सुबह मुंबई के डॉकयार्ड रोड में चार मंज़िला इमारत ढहने से मरने वालों की तादाद अब 61 हो गई है. इमारत के मलबे से शवो का निकलना जारी है.
स्थानीय पत्रकार अश्विन अघोर ने बताया कि जे जे अस्पताल के डीन तात्याराव लाहाणे के अनुसार इस हादसे में मरने वालों की संख्या बढ़ कर 61 हो गई है. मुंबई महानगर पालिका के आपदा व्यवस्थापन विभाग के अनुसार इमारत के मलबे से अब तक 73 लोगों को निकाला गया है.
मृतकों में मुंबई के स्थानिय समाचार पत्र सकाळ के पत्रकार योगेश पवार और उनके परिवार के 6 अन्य सदस्य शामिल हैं.
इनमें से 18 लोग सही-सलामत हैं जबकि 31 जख़्मी लोगों को जे जे अस्पताल में इलाज के लिए भर्ती कराया गया है.
इस बीच शुक्रवार को देर रात महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण ने घटनास्थल का मुआयना किया. वहीं शिवसेना के अध्यक्ष उद्धव ठाकरे ने भी जे जे अस्पताल जाकर घायलों का जायज़ा लिया.
मुंबई महानगर पालिका ने मृतकों के परिजनों को दो लाख रुपये और राज्य सरकार ने एक लाख रुपये देने की घोषणा की है. राज्य सरकार ने घायलों को भी 50 हज़ार रुपये का मुआवज़ा देने की घोषणा की है.
अघोर के मुताबिक़ दमकल विभाग, पुलिस विभाग और राष्ट्रीय आपदा राहत बल ने राहत बचाव कार्य जारी रखा है.
मामला दर्ज़
मुंबई महानगर पालिका के अधिकारियों की शिकायत के बाद शिवड़ी पुलिस ने मामामिया डेकोरेटर्स के मालिका अशोक मेहता को हिरासत में ले लिया है. अदालत ने मेहता को मंगलवार तक के लिए पुलिस रिमांड पर भेजा है.
इस इमारत का ग्राउंड फ़्लोर मेहता ने किराए पर लिया था जहां वह एक डेकोरेशन कंपनी चलाते थे.
मेहता पर आरोप है कि उन्होंने ग़ैरक़ानूनी तरीक़े से उस जगह में कुछ तब्दीली की जिसके चलते इमारत के ढांचे को क्षति पहुंची.
मुंबई के महापौर सुनील प्रभु ने बताया, "इस इमारत के ढहने के कारणों का पता लगाने के लिए एक समिति गठित की गई है और दोषियों के ख़िलाफ़ सख़्त कार्रवाई की जाएगी."
पहले मिला था नोटिस
प्रभु के मुताबिक़, इस इमारत में कुल 22 फ़्लैट थे. इनमें क़रीब 250 लोग रहते थे.
उन्होंने बताया,''यह इमारत ख़स्ताहाल थी. यहां रहने वालों को इमारत ख़ाली करने की नोटिस दी गई थी. इमारत की मरम्मत जल्द ही शुरू होने वाली थी, इमारत के मलबे में 60-70 लोगों के फंसे होने की आशंका है.''
उन्होंने बताया कि 10 साल पहले इस इमारत की मरम्मत की गई थी. इमारत में मुंबई महानगर पलिका के मार्केटिंग विभाग के कर्मचारी रहते थे.
इस इलाक़े की नगर सेविका यामिनी जाधव ने बताया,''इमारत क़रीब 60 साल पुरानी थी. इसकी मरम्मत के लिए महानगर पलिका प्रशासन के साथ लगातार बात हो रही थी. हम पिछले डेढ़ साल से इमारत के मरम्मत की मांग कर रहे थे. लेकिन प्रशासन ने इसे गंभीरता से नही लिया. प्रशासकीय देरी की वजह से यह इमारत ढह गई.''
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