चेतन भगत के ट्वीट पर विवाद

- Author, प्रभात पांडेय
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
'रुपया पूछ रहा है कि उसके बलात्कारियों के लिए क्या कोई सज़ा नहीं है ?' मशहूर लेखक चेतन भगत के इस ट्वीट ने उन्हें आलोचनाओं के केंद्र में ला खड़ा किया है.
डॉलर के मुक़ाबले गिरते हुए रुपए की हालत बयां करने के लिए रेप जैसे शब्द के इस्तेमाल पर उन्हें कड़ी प्रतिक्रिया झेलनी पड़ी.
हालांकि बाद में उन्होंने अपने इस ट्वीट को डिलीट कर दिया.
अपनी आलोचनाओं के जवाब में चेतन ने बाद में ट्वीट किया, "क्या सच में मैं चर्चा का केंद्र बना हुआ हूं. लगता है मुझे सुधारना दुनिया का सबसे अहम मुद्दा बन गया है. अर्थव्यवस्थाएं इसी वजह से तबाह हुई जा रही हैं."
चेतन पर आरोप लग रहे हैं कि रेप जैसे संवेदनशील मुद्दे पर उन्होंने ट्विटर पर मज़ाक करने की कोशिश की जो उनके जैसे लेखक को शोभा नहीं देता.
'संवेदनहीन था ट्वीट'
चेतन भगत के ट्वीट पर प्रतिक्रिया देते हुए सामाजिक कार्यकर्ता रंजना कुमारी ने बीबीसी से कहा, "ये एक प्रकार की संवेदनहीनता है कि आप रेप जैसे गंभीर अपराध को हल्केपन और मज़ाक के अंदाज़ में व्यक्त करें.""
रंजना कुमारी कहती हैं, "ये एक पुरुष मानसिकता का प्रतीक है जो दर्शाता है कि हम बलात्कार जैसी गंभीर घटना को उतनी गंभीरता से अब भी नहीं लेते. चेतन भगत एक लेखक हैं उन्हें तो और ज़्यादा सावधान रहना चाहिए. उम्मीद है कि भविष्य में वो ऐसा नहीं करेंगे."
पूर्व पुलिस अधिकारी किरण बेदी ने कहा कि लोगों को फ़ेसबुक और ट्विटर जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करते समय भी ज़िम्मेदारी से काम लेना चाहिए.

उन्होंने कहा, "ज़रूरत है कि हम और ज़्यादा सावधान, सभ्य और संवेदनशील बनें और हल्की बातें कहने से बचें."
उनके मुताबिक़ रेप जैसे शब्द का सामान्यीकरण नहीं होना चाहिए.
विवादित बयानबाज़ी
इसके अलावा हाल ही में अभिनेत्री हेमा मालिनी का एक बयान भी सुर्खियां बना.
पुणे में आयोजित एक समारोह में मुंबई में हुई गैंगरेप की घटना पर हेमा मालिनी ने कथित तौर पर कहा कि लड़कियों और महिलाओं को सावधान रहना चाहिए और कहीं भी निकलने में सावधानी बरतनी चाहिए.
इससे पहले पिछले साल दिसंबर में दिल्ली में सामूहिक बलात्कार की घटना के बाद भी कुछ राजनेताओं और तथाकथित धर्मगुरुओं ने ऐसे बयान दिए थे जो विवादित रहे.
मार्च में जनता दल (यू) के नेता शरद यादव ने तो लोकसभा तक में कह दिया था कि "कौन है हम में से जिसने कभी किसी लड़की का पीछा ना किया हो. और जब महिला से बात करनी हो तो पहल महिला नहीं करती, पहल हमें ही करनी पड़ती है."

उसी तरह से दिल्ली गैंग रेप के बाद धर्मगुरू आसाराम बापू का बयान भी ख़ासा विवादित रहा जिसमें उन्होंने कहा था कि पीड़ित लड़की को घटना के ज़िम्मेदार लोगों से छोड़ देने का आग्रह करना चाहिए था.
इस तरह की बयानबाज़ी पर रंजना कुमारी कहती हैं, "ये बयान दर्शाते हैं कि लोग <link type="page"><caption> स्त्रियों को भोग</caption><url href="http://newsforums.bbc.co.uk/ws/hi/thread.jspa?forumID=17386" platform="highweb"/></link> की वस्तु समझते हैं. ये दर्शाता है कि ऐसी बातें करने वाले लोगों की सोच कितनी छोटी है."
किरण बेदी तो ये तक कहती हैं कि लोगों की ऐसी सोच दरअसल भारतीय समाज की सोच को प्रतिबिंबित करती है.
वो कहती हैं, "ऐसी मानसिकता की वजह से ही हम रेप जैसे गंभीर अपराध के साथ उतनी सख्ती से पेश नहीं आ पा रहे हैं जैसा होना चाहिए. समाज को एक के बाद एक झटके मिल रहे हैं."
लोगों का ये भी मानना है कि पूरे समाज को ही ऐसे अपराधों के प्रति और गंभीर होना होगा और किसी भी तरह की बयानबाज़ी करने से पहले सोचना होगा क्योंकि वो बाक़ी लोगों पर भी असर डाल सकती है.
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