'सरकारी क़ैद' से आज़ाद होगी जिन्ना की आवाज़

प्रसार भारती के अभिलेखों में मौज़ूद मोहम्मद अली जिन्ना सहित आज़ादी के बाद पाकिस्तान चले गए दूसरे नेताओं की आवाज को सर्वजनिक किया जाएगा.
इमेज कैप्शन, प्रसार भारती के अभिलेखों में मौज़ूद मोहम्मद अली जिन्ना सहित आज़ादी के बाद पाकिस्तान चले गए दूसरे नेताओं की आवाज को सर्वजनिक किया जाएगा.
    • Author, दिलनवाज़ पाशा
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता, दिल्ली

आरटीआई के एक आवेदन पर सुनवाई करते हुए मुख्य सूचना आयुक्त ने सरकार को मोहम्मद अली जिन्ना सहित सभी पाकिस्तानी नेताओं के आज़ादी से पहले दिए गए भाषणों को सार्वजनिक करने का आदेश दिया है.

इससे पहले सरकार यह कहकर ये रिकॉर्डिंग देने से मना कर रही थी कि इससे दोनों देशों के संबंधों पर असर पड़ सकता है.

आरटीआई कार्यकर्ता सुभाष अग्रवाल ने सूचना के अधिकार क़ानून (आरटीआई) के तहत <link type="page"><caption> मोहम्मद अली जिन्ना</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/international/2013/06/130615_jinnah_house_pak_ia.shtml" platform="highweb"/></link> और 1947 में पाकिस्तान चले गए दूसरे प्रमुख नेताओं के भाषणों की रिकॉर्डिंग मांगी थी.

मुख्य सूचना आयुक्त सत्यानंद मिश्रा ने अपने फ़ैसले में कहा, "किसी भी सरकारी अधिकारी के लिए यह कह देना आसान है कि पाकिस्तान या पाकिस्तान चले गए नेताओं से संबंधित कोई भी जानकारी को गुप्त रखना चाहिए."

उजागर हो जानकारी

उन्होंने कहा कि, "यह एक पीछे लौटने वाला क़दम होगा."

सत्यानंद मिश्रा ने आगे कहा, "आम आदमी और इतिहास के विद्यार्थियों की दिलचस्पी हमेशा भारतीय इतिहास के इस बेहद रोचक पहलू के बारे में जानने की रही है. इसलिए यह सरकार का कर्तव्य है कि वह भाषणों के ऐसे सभी रिकॉर्ड को जनता को मुफ़्त उपलब्ध कराए.''

इससे पहले सरकार ने धारा 8(1)(a) का हवाला देते हुए यह रिकार्ड देने से इनकार कर दिया था.

पाकिस्तान का सच

इस फ़ैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए सुभाष अग्रवाल ने बीबीसी से बातचीत में कहा, "मुख्य सूचना आयुक्त ने अपने आदेश में यह बात साफ़ लिखी है कि इस तरह के मामले में धारा 8(1)(a) लगा देना बिल्कुल ग़लत है. "

उन्होंने कहा, "मोहम्मद अली जिन्ना के भाषणों से यह सच सामने आ जाएगा कि पाकिस्तान के संस्थापक के सपनों का पाकिस्तान नहीं बना, बल्कि एक रूढ़िवादी पाकिस्तान बनकर रह गया है."

मुख्य सूचना आयुक्त के इस फ़ैसले के बाद प्रसार भारती ने कहा है कि इन अभिलेखों को देने के लिए उसे सूचना और प्रसारण मंत्रालय की मंज़ूरी मिल गई है और जल्द ही सुभाष अग्रवाल को रिकॉर्डिंग की प्रति उपलब्ध करा दी जाएगी.

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