किश्तवाड़ का सियासी फायदा उठाने की 'कोशिश'

मीडिया, खासतौर पर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया ने हिंसा के इन वाकयों को जिस ढंग से पेश किया है उससे माहौल में काफी तनाव बढ़ा है.
इमेज कैप्शन, मीडिया, खासतौर पर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया ने हिंसा के इन वाकयों को जिस ढंग से पेश किया है उससे माहौल में काफी तनाव बढ़ा है.
    • Author, वेद भसीन
    • पदनाम, संपादक, कश्मीर टाइम्स, बीबीसी हिंदी डॉट कॉम के लिए

<link type="page"><caption> सीमा रेखा</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2013/08/130813_kashmir_headline_vt.shtml" platform="highweb"/></link> पर हमले की घटनाएं लगातार हो रही हैं. फिर मीडिया, ख़ासतौर पर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया ने इन वाकयों को जिस ढंग से पेश किया है उससे माहौल में काफी तनाव बढ़ा है.

इसके अलावा राजनीतिक पार्टियां जम्मू कश्मीर के लोगों को सांप्रदायिक रूप से बांटने की कोशिश कर रही हैं.

ये दक्षिणपंथी ताकतें काफी अरसे से यहां सांप्रदायिक ध्रुवीकरण में लगी हैं.

सांप्रदायिक ध्रुवीकरण

किश्तवाड़ और दूसरे इलाकों में जो हिंसा की घटनाएं हुई उसकी पृष्ठभूमि काफी पहले से बन रही थी.

2008 में अमरनाथ यात्रा के दौरान इसी तरह की उत्तेजना का माहौल बना था. वह माहौल यहां के लोगों के ज़ेहन में अभी तक कायम है.

इसके अलावा जब <link type="page"><caption> चुनाव की तारीख</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2013/08/130812_omar_twitt_ra.shtml" platform="highweb"/></link> नजदीक आती है तो सांप्रदायिक ध्रुवीकरण करने के लिए फ़िरकापरस्त ताकतें और ज्यादा सक्रिय हो जाती हैं.

हालांकि, 9 अगस्त को किश्तवाड़ में जो वाकया हुआ वह कमोबेश स्थानीय स्तर का था. ईद के रोज़ नमाज़ के बाद जुलूस निकाला गया और उसके बाद पथराव हुआ.

अगर इस घटना से स्थानीय प्रशासन उसी समय सख़्ती से निपट लेता तो दूसरे इलाकों में हिंसा नहीं फैलती.

प्रशासन द्वारा इस घटना को मुनासिब ढंग से नियंत्रित नहीं किए जाने के कारण दूसरे इलाकों में इसके ख़िलाफ़ प्रतिक्रिया हुई और विरोध प्रदर्शन किए गए.

अप्रत्याशित घटना थी

किश्तवाड़
इमेज कैप्शन, किश्तवाड़ में अभी स्थितियां इसलिए काबू में हैं क्योंकि यहां कर्फ्यू लगा हुआ है. सेना तैनात है.

किश्तवाड़ में ईद की नमाज़ के बाद हिंसा की जो घटना हुई वो अचानक ही हुई.

इसे स्वतः स्फूर्त घटना कहा जा सकता है.

यह घटना किसी सोची समझी साज़िश का हिस्सा नहीं थी लेकिन कुछ लोग इस ताक में थे कि ऐसी कोई घटना हो और वे उसे अपने फ़ायदे के लिए इस्तेमाल कर लें.

दिग्विजय सिंह ने ट्वीट भी किया कि किश्तवाड़ में, या भारत के ग़ैर कांग्रेसी इलाकों में हिंसा की जो घटनाएं हो रही हैं उसके लिए बीजेपी और दक्षिणपंथी ताकतें दोषी हैं.

बीजेपी और नेशनल कांफ़्रेस को फ़ायदा

इन सबका असर यह हो रहा है कि कश्मीर का समाज ध्रुवीकृत हो रहा है. अब तो इसमें ट्रेड एसोसिएशन और बार एसोसिएशन भी शामिल हो गई है.

जिनका इस घटना में निहित स्वार्थ है वे लोग माहौल को बिगाड़ने की कोशिश कर रहे हैं.

अभी स्थितियां इसलिए काबू में हैं क्योंकि कर्फ्यू लगा हुआ है. सेना तैनात है. लोगों के सड़क पर निकलने पर पाबंदी है. इंटरनेट, मोबाइल सर्विस बंद कर दी गई है. आपस में लोग मैसेज नहीं भेज सकते हैं.

इस ख़राब माहौल का सियासी फ़ायदा बीजेपी और नेशनल कांफ्रेंस उठा रही है. इस समय ध्रुवीकरण इस किस्म का है कि नेशनल कांफ्रेंस मुस्लिम इलाकों में इस वारदात का इस्तेमाल कर सकती है और बीजेपी हिंदू इलाकों में.

इनके मुकाबले कांग्रेस को ज़्यादा फायदा नहीं हो सकता. हां, पीडीपी को इस वाकये से नुकसान हो सकता है.

(ये लेखक की निजी राय है)

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