दुर्गाशक्ति नागपाल और बयानों के बाण

उत्तर प्रदेश के गौतमबुद्ध नगर की एसडीएम रहीं दुर्गाशक्ति नागपाल के निलंबन पर जमकर राजनीति हो रही है. उनके समर्थक हों या आलोचक, हर कोई बयान दे रहा है.
दुर्गाशक्ति नागपाल ने भले ही भारतीय सिविल सेवा परीक्षा में 20वीं रैंक हासिल की हो, लेकिन उत्तर प्रदेश सरकार के स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री अहमद हसन उन्हें 'नासमझ एसडीएम' ही समझते हैं.
दूसरी ओर राज्य के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव का कहना है, "बच्चे जब गलती करते हैं तो स्कूल में अध्यापक और घर में अभिभावक पिटाई करते हैं. इसी तरह सरकारें काम करती हैं. अगर कोई अफ़सर ग़लती करता है तो उसे भी सज़ा मिलेगी."
यह अलग बात है कि अखिलेश यादव जिस बच्चे का जिक्र कर रहे थे, उसे गौतम बुद्ध नगर के जिलाधिकारी, खुफ़िया विभाग और उत्तर प्रदेश सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड से क्लीन चिट मिल चुकी है.
पूरे विवाद के केंद्र में रही <link type="page"><caption> दुर्गाशक्ति नागपाल</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2013/07/130729_up_politics_dp.shtml" platform="highweb"/></link> की तरफ से अभी तक कोई भी बयान नहीं आया है.
सपा की सफाई
दुर्गा शक्ति के निलंबन पर सफाई देते हुए <link type="page"><caption> अखिलेश यादव </caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2013/08/130804_durga_shakti_center_writes_to_up_govt_dil.shtml" platform="highweb"/></link>ने कहा, "गरीब मुसलमान चंदा इकट्ठा करके मस्जिद बना रहे थे. दीवार बनी हुई थी. बिना किसी से मशविरा लिए दुर्गा शक्ति ने दीवार गिरा दी. इससे माहौल ख़राब हो सकता था."
यूपी एग्रो के चैयरमेन नरेंद्र भाटी ने भरी सभा में दावा किया, "मैं आप लागों को ये बताने आया हूं जिस औरत ने इतनी बेहूदगी दिखाई वो उस डंडे को चालीस मिनट नहीं झेल पाई. 41 मिनट में सस्पेंशन का ऑर्डर छप कर लखनऊ से यहां क्लेक्टर के यहां तामील हो गया. और उसको पता चल भी गया 11 बजकर 11 मिनट पर कि तुम सस्पेंड हो चुकी हो."

ऐसे में बसपा सुप्रीमो मायावती ने समाजवादी पार्टी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा, "उत्तर प्रदेश में आपराधिक तत्वों का राज चल रहा है जिसका शिकार उत्तर प्रदेश की जनता के साथ-साथ अपने कार्यों के प्रति निष्ठावान और ईमानदार अफ़सर भी बन रहे हैं."
भाजपा नेता यशवंत सिन्हा ने भी कहा कि “एक ईमानदार अफ़सर पर ग़लत कार्रवाई की गई है और पूरा देश दुर्गाशक्ति नागपाल के साथ है”.
क्यों भड़की सरकार
लेकिन राज्य सरकार को सबसे अधिक तकलीफ उत्तर प्रदेश आईएएस एसोसिएशन और कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी के हस्तक्षेप से हुई.
दुर्गा शक्ति के बचाव में आईएएस एसोसिएशन तेजी से आगे आया. उनके एक प्रतिनिधिमंडल ने उत्तर प्रदेश के कार्यवाहक मुख्य सचिव आलोक रंजन से मुलाकात कर नागपाल का निलंबन समाप्त करने की मांग की.
एसोसिएशन के सचिव पार्थसारथी सेन शर्मा ने पत्रकारों को बताया, "परिस्थितियों को देखते हुए निलंबन समाप्त करने की मांग की गई है."
इसके बाद माना गया कि अखिलेश यादव के बंगलौर से वापस आने के साथ ही दुर्गाशक्ति के निलंबन को वापस लिया जा सकता है. लेकिन सरकार ने अधिकारियों के इस रुख को सही नहीं माना.
अखिलेश सरकार की दलील थी कि मायावती सरकार में इस एसोसिएशन का नामोनिशान नहीं था और जिस सरकार की बदौलत एसोसिएशन दोबारा वजूद में आई, उसे ही वो आँखे दिखा रही है.
उत्तर प्रदेश सरकार ने निलंबन पर <link type="page"><caption> अपना रुख सख्त</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2013/08/130804_durga_shakti_center_writes_to_up_govt_dil.shtml" platform="highweb"/></link> कर लिया.
मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने बंगलौर के दौरे के दौरान ही कहा, "सांप्रदायिक तनाव रोकने और इस तरह के विवाद बचाने के लिए कभी-कभी इस तरह के निर्णय लेने पड़ते हैं.”
सोनिया की चिट्ठी
लेकिन इस बीच प्रधानमंत्री को लिखी गई एक चिट्टी ने बयानबाजी के एक नए दौर की शुरुआत कर दी.
समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक़ <link type="page"><caption> अपने पत्र में सोनिया गांधी ने लिखा</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2013/08/130805_durga_shakti_nagpal_today_aj.shtml" platform="highweb"/></link>, "हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि अधिकारी के साथ अन्याय न हो."
उन्होंने पत्र में लिखा, "इस घटना से कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए अपने कर्तव्य का पालन करने वाले अधिकारियों को पर्याप्त सुरक्षा उपाय उपलब्ध हैं या नहीं, इसे आंकने की जरूरत भी रेखांकित हुई है."
इस पत्र के बाद समाजवादी पार्टी भड़क गई.
उसका मानना था कि केंद्र में उसके समर्थन से कांग्रेस की अगुवाई वाली सरकार चल रही है, इसलिए कांग्रेस को भी चाहिए की उत्तर प्रदेश सरकार के फैसलों का समर्थन करे.
वापस ले लो आईएएस

समाजवादी पार्टी के महासचिव रामगोपाल यादव ने केंद्र से कहा, "अगर केंद्र का यही रुख है तो उत्तर प्रदेश यह कहेगा कि हमें कोई आईएएस अफ़सर नहीं चाहिए. केंद्र अपने सारे अफ़सरों को बुला ले, हम अपने अफ़सरों से राज्य को चला लेंगे.''
अखिलेश यादव ने अपनी पार्टी कार्यकर्ताओं की बैठक में कहा कि, "जब भी सरकार कोई फ़ैसला लेती है, तो हर कोई विरोध करता है. पिछले दिनों कई आईएएस अफ़सरों के साथ घटनाएं हुई हैं. हमारे समय में वो हमेशा आराम से काम करते रहे हैं, जबकि बीएसपी के कार्यकाल के दौरान उन्हें दफ़्तरों में घुसने से पहले जूते उतारने पड़ते थे.''
समाजवादी पार्टी के मुखिया मुलायम सिंह यादव ने अपने बेटे के फैसलों का समर्थन किया. सपा के सख्त रुख के बाद केन्द्र सरकार कुछ नरम होती हुई दिखी.
मॉनसून सत्र की शुरुआत के पहले दिन सोमवार को प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा कि दुर्गा शक्ति नागपाल के मामले में ‘नियमों का पालन किया जाएगा’.
आईएएस अधिकारियों के प्रशासनिक मामलों की देखरेख करने वाले, कार्मिक मामलों के मंत्रालय का प्रभार प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के पास ही है.
दूसरी ओर कार्मिक मामलों के मंत्रालय में राज्यमंत्री वी नारायणस्वामी ने यह कहते हुए हाथ खड़े कर दिए कि, "आमतौर पर एक अफ़सर राज्य सरकार को संपर्क करता है...हम अपनी तरफ़ से कोई कार्रवाई नहीं कर सकते.''
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