तेलंगाना निर्माण के खिलाफ आंध्र प्रदेश में प्रदर्शन

- Author, उमर फ़ारूक़
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता, हैदराबाद से
आंध्र प्रदेश का बंटवारा और तेलंगाना राज्य बनाने के कांग्रेस और यूपीए के फैसले के खिलाफ आंध्र और रायलसीमा में बंद का आयोजन किया गया.
यह बंद बुलाया है संयुक्त <link type="page"><caption> आंध्र प्रदेश</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2013/07/130730_telangana_reax_parties_tb.shtml" platform="highweb"/></link> ज्वांइट एक्शन कमिटी ने. उनके बुलाए गए बंद से रायलसीमा के चार और आंध्र के नौ जिलों में आम जनजीवन अस्त व्यस्त हो गया.
अनंतपुर, ओंगोल और एलुरु जैसे कुछ स्थानों पर हिंसा की छिटपुट घटनाएं भी सामने आई हैं.
अनंतपुर में आंदोलनकारियों ने कांग्रेस के स्थानीय कार्यालय पर हमला किया और तोड़फोड़ मचाई. उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गाँधी की मूर्ति भी तोड़ डाली.
पुलिस के रोके जाने पर आंदोलनकारी पथराव पर उतर आए.
फैसले का विरोध
ओंगोल में एक भीड़ ने भाजपा कार्यालय पर पत्थर फेंके. उन्होंने बसों को भी नुकसान पहुंचाया.
नेल्लोर में चेन्नई-कोलकत्ता राज्य-मार्ग को आंदोलनकारियों ने जाम कर दिया. कई ट्रेने भी रोकी गईं.
एलुरु में बंद के दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं और आंदोलनकारियों के बीच झड़प हो गई. जबकि आंदोलनकारियों ने केन्द्रीय मंत्री के. साम्बासिवारो के निवास स्थान का घेराव किया और उनसे त्यागपत्र की मांग की.
नौबत यहां तक आ पहुंची कि पुलिस को हिंसा रोकने के लिए हस्तक्षेप करना पड़ा.
विजयवाडा, विशाखापट्नम और तिरुपति जैसे बड़े नगरों में भी छात्रों, सरकारी कर्मियों ने जुलूस निकाले और कांग्रेस के फैसले की निंदा की.
त्यागपत्र की मांग

लेकिन अब तक के आंदोलन की विशेष बात यह है की इससे राजनेता दूर हैं. आंदोलनकारी मांग कर रहे हैं की मंत्री, विधायक और सांसद त्यागपत्र देकर उन के साथ आ जाएँ.
बड़े पैमाने पर राजनेताओं के त्यागपत्र की बात तो की जा रही है मगर अब तक इसका कोई असर नहीं दिख रहा है.
कल से अब तक कांग्रेस के चार और तेलुगु देशम के एक विधायक ने त्याग पत्र दिया है. पिछले सप्ताह ही कांग्रेस के चार और वाई एस.आर.कांग्रेस के 16 विधायकों ने इस्तीफा दिया था.
इस तरह कुल मिलकर अब तक आंध्र और रायलसीमा के 24 विधायक त्याग पत्र दे चुके है.
ऐसी अटकलें लगाई जा रही हैं की इन क्षेत्रों के कुछ मंत्री भी इस्तीफा देने वाले हैं लेकिन अब तक इसकी पुष्टि नहीं हुई है.
उल्टे, एक मंत्री डी.माणिक्य वारा प्रसाद राव ने कहा है, “ किसी त्यागपत्र की ज़रुरत नहीं है. इसके बिना ही केंद्र पर दबाव बनाया जा सकता है.”
दस लाख करोड़ की योजना
संयुक्त <link type="page"><caption> आंध्रप्रदेश के समर्थकों</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2013/07/130729_andhra_telangana_congress_analysis_vr.shtml" platform="highweb"/></link> को आज एक बड़ा धक्का उस समय लगा जब विपक्षी दल तेलुगु देशम ने भी तेलंगाना राज्य के समर्थन की घोषणा कर दी.
पार्टी के अध्यक्ष और पूर्व मुख्य मंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने कहा, “पार्टी ने 2008 में ही केंद्र को लिख दिया था की वह तेलंगाना की मांग का समर्थन करती है और अभी भी उस का रुख वही है.”
साथ ही, उन्होंने लोगों से अपील कर ये ख्वाहिश जाहिर की कि राज्य अलग हो जाने के बावजूद हम तेलुगु भाषी भाइयों की तरह मिल कर रहें.
उन्होंने केंद्र से मांग की कि वह आंध्र राज्य के लिए एक अलग राजधानी बनाए और इसके लिए दस लाख करोड़ की योजना बनाए.
अलग राजधानी बनाने का कारण बताते हुए उन्होंने कहा कि हैदराबाद जैसे एक और नगर के निर्माण के बिना दूसरा राज्य तरक्की नहीं कर सकता.
इधर तेलंगाना में लगातार बारिश के कारण तेलंगाना समर्थक पड़े पैमाने पर कोई जश्न नहीं मना सके.
तेलंगाना राष्ट्र समिति के अध्यक्ष के. चंद्रशेखर राव ने तेलंगानावादियों से कहा है की वे तब तक सतर्क रहें जब तक की केंद्र सरकार तेलंगाना राज्य का बिल संसद में पेश कर उसे पारित नहीं कर देती.
तेलंगाना संयुक्त संघर्ष समिति के संयोजक प्रोफेसर कोदंडा राम ने आंध्र के नेताओं से अनुरोध किया कि वे तेलंगाना की जनता की भावनाओं का सम्मान करें और अलग राज्य का विरोध न करें.
उन्होंने कहा की आंध्र और रायलसीमा के जो लोग हैदराबाद और तेलंगाना में रहते हैं उन्हें चिंता करने की कोई ज़रुरत नहीं है, उनके हितों का पूरा ध्यान रखा जाएगा.
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