तेलंगाना को लेकर कांग्रेस पर संकट के बादल

- Author, उमर फ़ारूक़
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता, हैदराबाद से
तेलंगाना मुद्दे को लेकर कांग्रेस की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं. अलग तेलंगाना राज्य का विरोध कर रहे चार केंद्रीय मंत्री और आंध्र प्रदेश सरकार के 15 मंत्री इस्तीफा देने को तैयार हैं.
वाईएसआर कांग्रेस पार्टी के 16 और कांग्रेस के तीन विधायक पहले ही इस मुद्दे पर इस्तीफे दे चुके हैं. अन्य विधायकों और सांसदों पर भी ऐसा ही करने का दबाव है.
अनंतपुर, तिरुपति, विजयवाडा और कडपा सहित कई शहरों में तेलंगाना विरोधियों ने मंत्रियों और कांग्रेसी सांसदों के घरों का घेराव किया और छात्रों ने जुलूस निकाले.
कहा जा रहा है कि ख़ुद मुख्यमंत्री किरण कुमार रेड्डी भी इस्तीफा देना चाहते हैं क्योंकि वो राज्य के बंटवारे का ‘कलंक’ अपने ऊपर नहीं लगने देना चाहते.
अनुमान है कि अगर बड़ी संख्या में विधायक इस्तीफा दे देते हैं, तो राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू करना पड़ेगा.
मंगलवार को अहम बैठक
अब सब की नज़रें मंगलवार को दिल्ली में कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक पर टिकी हैं. आंध्र प्रदेश के प्रभारी कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह कह चुके हैं कि तेलंगाना पर सलाह-मशविरा हो चुका है और अब केवल फ़ैसला लेना बाकी है.
कांग्रेस आलाकमान ने सलाह के लिए आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री किरण कुमार रेड्डी और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बी सत्यनारायण को दिल्ली बुलाया है.
बुधवार को यूपीए समन्वय समिति की बैठक भी बुलाई गई है और उसमें कांग्रेस अपने सहयोगी दलों से अलग तेलंगाना पर समर्थन मांगेगी.
समाजवादी पार्टी ने कहा है कि वो संसद में अलग तेलंगाना के लिए आने वाले बिल का समर्थन नहीं करेगी लेकिन बीजेपी ये कई बार कह चुकी है कि वो अलग तेलंगाना के समर्थन में है.
हैदराबाद पर भी विवाद

अभी ये साफ नहीं हो पाया है कि प्रस्तावित तेलंगाना राज्य कैसा होगा.
तेलंगाना के समर्थक चाहते हैं कि तेलंगाना वैसा ही हो, जैसा वो 1956 तक था और जिस की राजधानी हैदराबाद थी.
लेकिन ऐसी अटकलें हैं कि कांग्रेस रायलसीमा का बंटवारा कर उसके दो ज़िलों को तेलंगाना में मिलाकर एक ‘रायला तेलंगाना’ राज्य बनाना चाहती है ताकि मौजूदा आंध्र प्रदेश दो बराबर हिस्सों में बंट जाए.
हालांकि इससे समस्या और भी उलझ सकती है, क्योंकि अलग तेलंगाना के समर्थक इसके लिए राज़ी नहीं हैं और उनका मानना है कि ये फ़ैसला टालने की कोशिश है. वहीं रायलसीमा के लोग भी अपने क्षेत्र के बंटवारे के लिए राज़ी नहीं हैं.
लेकिन बड़ा सवाल हैदराबाद शहर को लेकर है. तेलंगाना इलाके के लोग चाहते हैं कि हैदराबाद सिर्फ तेलंगाना की राजनीति हो. वहीं आंध्र और रायलसीमा के लोगों की मांग है कि हैदराबाद को केंद्र शासित प्रदेश बनाया जाए.
संभव है कि हैदराबाद को पांच साल के लिए दोनों राज्यों की राजधानी बनाया जाए.
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