नरेंद्र मोदी के वीज़ा की राह में हैं कैटरीना

वॉशिंगटन में राजनाथ सिंह
इमेज कैप्शन, वॉशिंगटन में आकर राजनाथ का रुख बदला
    • Author, ब्रजेश उपाध्याय
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता, वॉशिंगटन

गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के समर्थकों और उनकी पार्टी भाजपा के भारी दबाव के बावजूद उन्हें फ़िलहाल अमरीकी वीज़ा मिलने के आसार नहीं नज़र आ रहे हैं.

भाजपा अध्यक्ष राजनाथ सिंह ने अमरीका पहुंचते ही न्यूयॉर्क में ये घोषणा कर दी कि वो यहां की सरकार से मोदी के वीज़ा के लिए अपील करेंगे. लेकिन वॉशिंगटन पहुंचकर वो भी अब इसे अमरीकी सरकार का “अंदरूनी मामला” बता रहे हैं.

अमरीकी व्यापार जगत और रिपब्लिकन पार्टी के कुछ सदस्य मोदी को वीज़ा दिए जाने के हक़ में हैं. यहां के कई संगठन भी उनके लिए पूरा ज़ोर लगा रहे हैं.

लेकिन धार्मिक आज़ादी से जुड़े जिस क़ानून के तहत मोदी के अमरीका आने पर रोक लगी, उससे निर्धारित करने वाली संस्था के रूख़ में कोई तब्दीली नहीं है.

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर धार्मिक स्वतंत्रता पर नज़र रखने वाली इस संस्था की अध्यक्ष हैं कैटरीना लैंटोस स्वेट.

'बदलाव के संकेत नहीं'

बीबीसी के साथ एक ख़ास बातचीत में उन्होंने कहा है कि कुछ ही महीनों पहले जब हिलेरी क्लिंटन विदेश मंत्री थी तो उन्हें पत्र लिखकर इस संस्था ने मोदी के वीज़ा पर रोक लगाए रखने की सिफ़ारिश की थी और वर्तमान विदेश मंत्री जॉन केरी का रुख कुछ अलग होगा, इसका उनके पास कोई संकेत नहीं है.

उनका कहना है, “इसके अलावा अब भी हमारे पास कोई ऐसी जानकारी नहीं आई है जिसके आधार पर हम अपना फ़ैसला बदल सकें.”

कैटरीना लैंटोस स्वेट का कहना है कि नरेंद्र मोदी के ऊपर न केवल ‘गुजरात में हुए बर्बर दंगों की ज़िम्मेदारी का दाग है, बल्कि उन्होंने उसके दस साल बाद भी पीड़ितों के राहत और पुनर्वास के लिए कुछ ख़ास नहीं किया है.’

संघीय क़ानून के तहत बनाई गई धार्मिक स्वतंत्रता की रक्षा करने वाली ये संस्था स्वतंत्र मानी जाती है और इसमें रिपब्लिकन और डेमोक्रेट दोनों ही पार्टियों का प्रतिनिधत्व होता है. लेकिन इसके फ़ैसले स्वीकार करने के लिए सरकार बाध्य नहीं है.

वो कहती हैं, “अगर सरकार हमारे विरूद्ध कभी फ़ैसला लेने की सोचती है तो हम उनकी खुलकर आलोचना कर सकते हैं और उन पर नैतिक दबाव डाल सकते हैं.”

उनके कड़े रूख़ का अंदाज़ा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि उन्होंने कहा कि भारतीय जनता भी जब वोट डालने जाए तो वो मोदी को लेकर जो अंतरराष्ट्रीय दुविधाएं हैं उनको ध्यान में रखे.

'अंदरूनी मामला'

इस बीच राजनाथ सिंह ने वॉशिंगटन आकर मोदी के गुणगान तो किया है लेकिन वीज़ा के मामले पर अपना रुख बदला है.

उन्होंने इसे अमरीकी सरकार का अंदरूनी मामला बताते हुए कहा है, “कभी-कभी ये ज़रूर लगता है कि एक तरफ़ तो अमरीकी कांग्रेस की एक रिपोर्ट में मोदी के काम की भरपूर तारीफ़ की जाती है और दूसरी तरफ़ वीज़ा भी नहीं जारी करती है, ये एक विरोधाभास है.”

उन्होंने कहा कि अमरीकी कांग्रेस के कई सदस्यों ने उनसे कहा कि मोदी को वीज़ा नहीं दिए जाने का कोई औचित्य नहीं दिखता. लेकिन राजनाथ सिंह बार-बार ये भी दोहरा रहे थे कि उन्होंने अपनी ओर से अमरीकी अधिकारियों के सामने वीज़ा की मांग नहीं रखी.

नरेंद्र मोदी
इमेज कैप्शन, मोदी की सरकार पर दंगों को रोकने के प्रयास न करने के आरोप लगते हैं

अमरीकी सरकार ने साल 2005 में नरेंद्र मोदी का वीज़ा रद्द किया था और इस साल भी व्हार्टन विश्वविद्दालय में भाषण के न्यौते पर आ रहे मोदी को वीज़ा नहीं दिया गया.

अमरीका के अलावा यूरोपीय संघ ने भी गुजरात के दंगों के लिए मोदी को ज़िम्मेदार ठहराते हुए उन पर प्रतिबंध लगा रखे थे लेकिन उनके रुख में अब लचीलापन आया है.

राजनाथ सिंह ने न्यूयॉर्क में खुलकर इशारा किया था कि भाजपा मोदी को प्रधानमंत्री के उम्मीदवार की तौर पर पेश करेगी. लेकिन वॉशिंगटन में वो काफ़ी संभलकर बयान दे रहे थे और प्रधानमंत्री की उम्मीदवारी के लिए किसी का नाम लेने से इनकार किया.

उन्होंने इतना ज़रूर कहा कि मोदी के हाथ में चुनाव अभियान की बागडोर देने का फ़ैसला पार्टी ने एकमत से किया था.

उनका कहना था, “मैं बस इतना कहना चाहूंगा कि नरेंद्र मोदी मेरे देश के बेहद लोकप्रिय नेता हैं.”

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