जादूगर जो सिखाता है खेती की जादूगरी

- Author, अमरनाथ तिवारी
- पदनाम, बीबीसी हिंदी डॉट कॉम के लिए
बिहार के मुज़फ्फपुर ज़िले में एक किसान ने जैविक खेती का प्रचार करने के लिए एक अनोखा तरीका अपनाया है.
दरअसल गोविंदपुर गांव के रहने वाले श्रीकांत कुशवाहा किसान होने के साथ साथ जादूगर भी हैं. वे अपने इस कौशल का इस्तेमाल किसानों को <link type="page"><caption> जैविक खेती</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/science/2012/09/120818_organic_health_debate_ar.shtml" platform="highweb"/></link> के फायदे बताने के लिए कर रहे हैं.
श्रीकांत कुशवाहा का मकसद राज्य के किसानों को जैविक खेती के लिए प्रोत्साहित कर उनकी सोच में तब्दीली लाना है.
पिछले कुछ सालों में उन्होंने जैविक खेती के तरीकों को समझाने के लिए 1000 से ज्यादा मैजिक शो किए हैं और अपनी इस कोशिश में वे सफल भी रहे हैं.
अब करीब एक हज़ार किसान जैविक खेती का इस्तेमाल कर रहे हैं ताकि वे अपनी फसल के साथ साथ अपनी आमदनी भी बढ़ा सकें.
दोनों ही विज्ञान
श्रीकांत का कहना था, ''जादू और कृषि ये दोनों ही विज्ञान है और इन दोनों में सफल होने के लिए हाथों का काम महत्वपूर्ण है. अगर<link type="page"><caption> नए तरीकों </caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/science/2012/09/120818_organic_health_debate_ar.shtml" platform="highweb"/></link>का इस्तेमाल नहीं किया जाता है तो ये दोनों ही बेकार हो जाएंगे.''
आमतौर पर उनका हर मैजिक शो कुछ लोकप्रिय तरकीबों से शुरु होता है- जैसे एक छोटी गेंद का हवा में गुम हो जाना या हैट से एक कबूतर का निकलना.
श्रीकांत बताते हैं, ''जैसे ही में जमा हुई भीड़ का ध्यान अपनी ओर आकर्षित करने में कामयाब हो जाता हूं, मैं अपना असली काम करना शुरू कर देता हूं.''
उनके अनुसार, ''मैं उन्हें दो डब्बे दिखाता हूं. इसमें से एक में जैव उर्वरक से बने बीज होते हैं तो वहीं दूसरे में सिंथेटिक उर्वरक होता है. इसके बाद में दोनों डब्बों पर ढक्कन लगा देता हूं और बोलता हूं कि चलिए देखा जाए किस डब्बे का पौधा तेज़ी से बढ़ता है. इसके बाद मैं इन लोगों को बताता हूं कि ये क्यों और कैसे हुआ.''
श्रीकांत को विश्वास है कि उनका मैजिक देखने के बाद जो लोग अपने घर लौटते हैं , उनमें से ज्यादातर लोग इस इस बात से सहमत होते हैं कि जैविक खेती एक सही तरीका है.
जैविक खेती के फायदे
श्रीकांत ने स्वंय जैविक खेती के फायदों के बारे में साल 2001 में जाना था. एक स्वयं सेवी संस्था ने गांव में कैंप लगाकर लोगों को जैविक खेती का प्रशिक्षण दिया था.
उनका कहना है कि जैविक खेती ने तो उनकी किस्मत बदल दी है. <link type="page"><caption> वे धान और गेंहू की खेती कर रहे हैं </caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2011/01/110131_rajasthan_organic_ac.shtml" platform="highweb"/></link>और हाल ही में उन्होंने चिकित्सा में काम आने वाले पौधों की खेती भी की है और उनकी पैदावर काफी अच्छी रही है.

एक ज़माने में ग़रीब किसान रहे श्रीकांत अपने परिवार को दो वक्त का भोजन भी नहीं दे पाते थे. लेकिन अब परिस्थियां बदल गई हैं. अब उनके पास दो मंज़िला मकान है, एक गाय है, रंगीन टीवी, एक कंप्यूटर, प्रिंटर और मोटरबाइक है.
श्रीकांत बताते हैं, ''मैं स्कूल नहीं जा सका, लेकिन मैं अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा देने के लिए उन्हें स्कूल भेजता हूं.''
जिंदगी बदल गई
वे कहते हैं, ''ये सब केवल जैविक खेती की वजह से संभव हो पाया. मैंने दो एकड़ की ज़मीन पर केवल जैविक खेती की और अब मेरी जिंदगी का केवल एक ही मकसद है, जैविक खेती का प्रचार करना.''
लेकिन अब उनके सामने सवाल ये था कि वे लोगों को जैविक खेती के बारे में जागरुक कैसे करें?
साल 2003 में जब श्रीकांत गांव के एक मेले में गए तो पाया कि एक जादूगर लोगों को जादू से काफी लुभा रहा है. बस उसी वक्त उन्होंने सोच लिया कि वे अपने मकसद को सफल बनाने के लिए जादू का सहारा लेंगे.
लेकिन जब वे जादूगर से तरकीबें सीखने गए तो उन्होंने मना कर दिया. इसके बावजूद श्रीकांत ने हार नहीं मानी.
वे अपने इलाके में प्रसिद्ध जादूगर राम रतन शर्मा के पास गए और उनके जादू की सारी तरकीबें सीखीं.
मेहनत सफल
वे दिन में करते और रात में जादूगरी. उन्होंने दो साल में करीब 200 तरकीबें सीख लीं. साल 2005 में श्रीकांत ने दो दर्जन मैजिक शो किए और गांव वालों को जैविक खेती के फ़ायदे बताए.
एक साल बाद 1200 की आबादी वाले गोविंदपुर को बिहार सरकार ने राज्य का पहला जैविक गांव घोषित किया.
इसके बाद जल्द ही स्टेट बैंक भी किसानों की मदद के लिए आगे आया. गांव के किसान खुद को श्रीकांत का आभारी समझते हैं.
शंकर राम और राजदेओ सिंह के अनुसार, ''श्रीकांत की मेहनत से ही सभी किसानों ने जैविक खेती करना सीखा.''
कृषि विशेषज्ञ यूके शर्मा कहते है, ''कुशवाहा ने इलाके के किसानों पर जादू कर दिया है.''
गांव के किसानों को जैविक खेती के बारे में जागरुक करने के बाद अब श्रीकांत को दूसरी चिंता सताने लगी है. वे कहते हैं कि गांव में गाय और भैंसो की संख्या घट रही है, इससे जैविक खेती की राह में बाधा पैदा हो सकती है क्योंकि गोबर और मूत्र जैविक खेती के लिए उर्वरक का काम करते हैं.
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