चिदंबरमः अभी एक दूसरे पर उंगली उठाने का वक़्त नहीं है

- Author, ब्रजेश उपाध्याय
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता, वॉशिंगटन
भारतीय वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने अमरीकी व्यापार जगत से भारत में निवेश बढ़ाने की अपील करते हुए कहा है कि अभी एक दूसरे पर उंगली उठाने का समय नहीं है.
<link type="page"><caption> भारत</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2013/07/130712_india_economy_manmohan_paranjoy_vr.shtml" platform="highweb"/></link> अमरीकी व्यापार संबंधों में आई ठंडक को दूर करने के उद्देश्य से चिदंबरम के अलावा भारतीय व्यापार जगत का एक बड़ा दल इन दिनों वाशिंगटन पहुंचा हुआ है.
वाशिंगटन में अमरीकी उद्योगपतियों और अमरीकी कांग्रेस के सदस्यों को संबोधित करते हुए चिदंबरम का कहना था कि पिछले कुछ सालों में दुनिया में आई आर्थिक मंदी का असर भारत पर भी दिखा है और ऐसे माहौल में एक दूसरे पर आरोप लगाना अस्वाभाविक नहीं है.
उनका कहना था," ज़रूरत इस बात की है कि हम सकारात्मक पक्षों पर नज़र डालें."
अमरीकी व्यापार जगत की बड़ी शिकायत रही है कि भारत में व्यापार के लिए जिस तरह के आर्थिक सुधारों के वायदे किए गये थे वो लागू नहीं हो रहे हैं और सरकारी नियम वहां उद्योग शुरू करने में कई अड़चने पैदा करते हैं.
पिछले सालों में भारत में अमरीकी विनिवेश में भारी कमी आई है जबकि दूसरे देशों में अमरीकी कंपनियां काफ़ी पैसा लगा रही है.
वित्त मंत्री का कहना था कि पिछले दो दिनों में उन्हें अमरीकी व्यापार जगत से काफ़ी नाराज़गी के स्वर सुनने पड़े हैं लेकिन वो उन्हें आश्वासन देना चाहते हैं कि भारत न तो अमरीकी व्यापार को हड़पना चाहता है और ना ही वो अमरीका का प्रतिद्वंदी है.
<link type="page"><caption> अर्थव्यवस्था: टूट रहा है मनमोहन का ‘मोहक सपना’</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2013/07/130712_india_economy_manmohan_paranjoy_vr.shtml" platform="highweb"/></link>
सुधार से पीछे नहीं हटेगा भारत

चिदंबरम ने अमरीकी आप्रवासन क़ानून में संशोधन के प्रस्ताव से भारतीय कंपनियों को होनेवाले नुकसान की ओर इशारा करते हुए कहा कि ये एक राजनीतिक कदम है.
उनका कहना था, "भारत की कई कंपनियां अब उन बाज़ारों में हैं जहां अमरीकी कंपिनियों की मौजूदगी रही है और इससे प्रतिस्पर्धा बढ़ती है लेकिन इसका ये मतलब नहीं कि इसे राजनीतिक मंच पर ले आया जाए."
इसके पहले योजना आयोग के उपाध्यक्ष मॉंटेक सिंह अहलूवालिया ने भी उसी मंच से अमरीकी उद्दोग जगत को यकीन दिलाने की कोशिश करते हुए कहा कि भारत आर्थिक सुधारों से पीछे नहीं हटा है.
अहलूवालिया का कहना था कि भारत में इस समय चुनाव का माहौल है और मुश्किल दरअसल सुधारों को लागू करने में आ रही है.
भारत और <link type="page"><caption> अमरीका</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2013/06/130621_dollar_rupee_currency_adg.shtml" platform="highweb"/></link> के बीच इस समय 100 अरब डॉलर का व्यापार हो रहा है लेकिन आर्थिक विशेषज्ञों का कहना है कि ये वास्तविक क्षमता से बहुत कम है.
अगले छह महीनों में भारत और अमरीका के बीच कई द्विपक्षीय मुलाक़ातें होनी हैं. इनमें अमरीकी उपराष्ट्रपति जो बाइडन का भारत दौरा, प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह का अमरीका दौरा भी शामिल है.
उम्मीद की जा रही है कि इन मुलाक़ातों में भारत में अमरीकी निवेश और अमरीका में भारतीय कंपनियों को सहूलियतें देने जैसे विषयों पर काफ़ी बातें होंगी.
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