बिहार उपचुनाव: नीतीश पर भारी पड़े लालू

    • Author, मणिकांत ठाकुर
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता, पटना

बिहार कीमहाराजगंज लोकसभा सीटके लिए हुए उपचुनाव में राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के प्रत्याशी प्रभुनाथ सिंह ने जनता दल यूनाइटेड (जदयू) के उम्मीदवार पीके शाही को एक लाख सैंतीस हज़ार मतों से हरा दिया है.

जदयू की इस 'भारी पराजय' से मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को गहरा राजनीतिक झटका लगा है. ' भारी पराजय ' इसलिए, क्योंकि इस सीट को जीतने के लिए नीतीश और उनके सत्ताधारी ख़ेमे ने पूरी ताक़त झोंक दी थी.

उधर, इस सीट पर राजद की इतने अधिक मतों से विजय को एक ' बड़ी जीत ' माना जा रहा है.' बड़ी जीत ' इसलिए, क्योंकि इस कारण पार्टी अध्यक्ष लालू यादव के मंद पड़े राजनीतिक सितारे में एक नई चमक आ गई है.

महाराजगंज में तीन दिनों तक कैंप करके और दर्जनों सभाओं में बोलते हुए मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा था, "हमारी सरकार के कामकाज से ख़ुश हों तो शाही जी को भारी मतों से जिताइए और नाखुश हों तो आप की जैसी मर्ज़ी."

संदेश

इतना ही नहीं, उन्होंने ये भी कहा था कि अगर महाराजगंज में जदयू की हार हुई तो विकास के रास्ते पर चल रही मौजूदा राज्य सरकार के प्रति संदेश अच्छा नहीं जाएगा.

दरअसल यहां नीतीश कुमार को अपनी पिछली चमकदार चुनावी सफलताओं वाली छवि मलिन पड़ने और लालू प्रसाद के पस्त पड़े चुनावी मनोबल में नई जान आ जाने की चिंता ज़्यादा थी.

ज़ाहिर है कि महाराजगंज के चुनाव परिणाम से उनकी ये दोनों चिंताएं बढ़ गई होंगी. विकास संबंधी उनके दावे को भी यहां झटका लगा है क्योंकि ऐसे दावे का कोई असर इस चुनाव क्षेत्र में नहीं दिखा.

इसे विरोधाभास ही कहेंगे कि विकास के बजाय जातीय समीकरण ही जदयू के प्रत्याशी चयन का भी मुख्य आधार लग रहा था. ' राजपूत के मुक़ाबले भूमिहार ' वाली जातीय सोच यहां भी मुखर हो रही थी.

जश्न का माहौल

रैली
इमेज कैप्शन, राजद को मिली जीत के बाद कार्यकर्ताओं में उत्साह देखते बना

लंबे अंतराल के बाद मिली इस जीत से उत्साहित राजद नेताओं और कार्यकर्ताओं के जश्न में पार्टी अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव बुधवार दोपहर बाद खुलकर शरीक हुए.

उन्होंने पत्रकारों से कहा,''अहंकारी नीतीश कुमारके फरेबी राज को बिहार की जनता का यह पहला करारा जवाब है. हवाबाज़ी वाले इस कथित सुशासन के पतन की शुरुआत हो चुकी है. महाराजगंज में बाबु प्रभुनाथ सिंह को सभी वर्ग या जाति के मतदाताओं का समर्थन नहीं मिलता तो इतने अधिक मतों से उनकी जीत नहीं होती. खासकर मुस्लिम समाज के भरपूर समर्थन के प्रति राजद आभारी है.''

लालू यादव ने फिर अपना ये जुमला दोहराया,'' ढोंगी सेकुलर नीतीश कुमार दरअसल आरएसएस और भाजपा का तोता है. ''

इस चुनाव परिणाम के बाद यहां के सत्ताधारी भाजपा-जदयू गठबंधन के अंतर्कलह में एक और खटास जुड़ गयी है.

हार

नीतीश-मोदी
इमेज कैप्शन, नीतीश और नरेंद्र मोदी में तनातनी को लेकर भाजपा कार्यकर्ता नाराज़ नजर आए.

पराजित जदयू उम्मीदवार पीके शाही ने कहा है कि भाजपा के बड़े नेताओं ने गठबंधन धर्म के तहत सहयोग वाली भूमिका तो निभाई लेकिन स्थानीय स्तर पर भाजपा कार्यकर्ताओं का अपेक्षित सहयोग नहीं मिला.

इस बयान में काफी हद तक सचाई भी है क्योंकि महाराजगंज दौरे के समय मैंने भी ऐसा ही महसूस किया था. वहां के भाजपा कार्यकर्त्ता ' नीतीश-नरेद्र विवाद ' को लेकर जदयू से ख़ासे रुष्ट लग रहे थे.

लेकिन राज्य के एक वरिष्ठ मंत्री और भाजपा नेता गिरिराज सिंह ने शाही के बयान पर जवाब दिया है कि ऐसी तोहमत लगाना अपनी ग़लती को दूसरे के सर मढने जैसी कमज़ोरी है.

वैसे, महाराजगंज में जदयू की पराजय का सबसे सीधा और साफ़ संदेश यही है कि भाजपा के सहयोग के बिना नीतीश कुमार के जदयू की स्थिति डगमगा सकती है.

दूसरी बात ये कि लालू प्रसाद के प्रति कांग्रेस के कुछ उदासीन से दिख रहे रवैये में अब फ़र्क़ आ सकता है और नीतीश-कांग्रेस प्रेम की संभावना कुंद पड़ सकती है.

यानी कुल मिलाकर नीतीश कुमार के लिए यह चुनावी परिणाम अशुभ नहीं तो निराशाजनक ज़रूर है.

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