लालू ने किया नीतीश सरकार को उखाड़ फेंकने का आह्वान

लालू की रैली
इमेज कैप्शन, लालू की लोकप्रियता अब भी बरकरार है
    • Author, मणिकांत ठाकुर
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता, पटना

<italic/>राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के अध्यक्ष <link type="page"><caption> लालू प्रसाद यादव</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2013/05/130514_lalu_parivartan_maharally_rd.shtml" platform="highweb"/></link> ने कहा है कि सांप्रदायिक ताक़तों ने अगले साल होने वाले आम चुनावों में हस्तिनापुर की गद्दी हथियाने का जो सपना पाल रखा है, वो उसे कभी पूरा नहीं होने देंगे.

बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू यादव ने पटना के ऐतिहासिक गांधी मैदान में परिवर्तन रैली को संबोधित करते हुए कहा, “हम सांप्रदायिक ताकतों को कभी सफल नहीं होने देंगे और उन्हें सत्ता में आने से रोकने के लिए तमाम धर्मनिरपेक्ष दलों की एकजुटता के लिए पहल करेंगे.”

उन्होंने बिहार के मुख्यमंत्री <link type="page"><caption> नीतीश कुमार</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2012/11/121109_nitish_pakistan_akd.shtml" platform="highweb"/></link> के सुशासन को आड़े हाथों लेते हुए राज्य में कथित बढ़ते अपराध, भ्रष्टाचार और शैक्षणिक दुर्दशा के कई उदाहरण गिनाए.

राजद अध्यक्ष ने कहा, “अब बिहार की जनता इस ठग मुख्यमंत्री के भुलावे में नहीं आएगी और राज्य में बदलाव निश्चित है.”

आह्वान

उन्होंने युवाओं से नीतीश की सत्ता को उखाड़ फेंकने का आह्वान करते हुए कहा कि अगले चुनावों में उनकी पार्टी 50 प्रतिशत टिकट युवाओं को देगी.

माना जा रहा था कि लालू यादव इस रैली के ज़रिए अपने दोनों बेटों तेज प्रताप यादव और तेजस्वी यादव को राजनीतिक मंच पर लाने का प्रयास करेंगे.

लेकिन लालू ने परिवारवाद के आरोपों को नकारते हुए कहा कि वो अभी पूरी तौर से सक्रिय और समर्थ हैं.

उन्होंने उल्टे नीतीश पर व्यंग्य करते हुए कहा कि उनका बेटा कहां है और क्या कर रहा है, ये किसी को पता नहीं है.

भीड़

रैली
इमेज कैप्शन, राजद का चुनाव चिन्ह 'लालटेन' लिए एक समर्थक

चिलचिलाती धूप और भीषण गर्मी के बावजूद गाँधी मैदान में भारी भीड़ जुटी थी और मैदान के आस पास की तमाम सड़कों और गलियों में लोगों का हुजूम नज़र आ रहा था.

हाथ में राजद का चुनाव चिन्ह 'लालटेन' छपे हरे झंडों और हरी टोपियों-गमछों से सिर ढंके लोगों का गांधी मैदान के रास्तों पर ताँता सा लगा था.

नीतीश सरकारके ख़िलाफ़ और लालू यादव के समर्थन में नारे लगाए जा रहे थे.

रैली में जुटी भीड़ देखकर चर्चा होने लगी है कि लालू का असर अभी पूरी तरह मिटा नहीं है और वो अपने पुराने रंग में लौटने की कोशिश कर रहे हैं.

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