लैपटॉप पर करोड़ों रुपए लुटाना कितना जायज़?

- Author, नितिन श्रीवास्तव
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
<link type="page"><caption> समाजवादी</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2013/06/130602_laptop_freebie_uttarpradesh_ns.shtml" platform="highweb"/></link> पार्टी ने उत्तर प्रदेश विधान सभा चुनावों के पहले एक ऐसा वादा किया जो कम से कम इस प्रदेश के लिए नया था.
मुलायम सिंह की पार्टी ने कहा था कि अगर प्रदेश में उनकी <link type="page"><caption> सरकार</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2013/05/130520_mayawati_lokayukta_vr.shtml" platform="highweb"/></link> बनती है तो वे कक्षा 10 और 12 पास करने वाले सभी स्कूली बच्चों को मुफ्त में टैबलेट और लैपटॉप देंगे.
भारी बहुमत से प्रदेश में <link type="page"><caption> अखिलेश</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2013/05/130519_death_police_custody_aa.shtml" platform="highweb"/></link> यादव की सरकार बनी और अपने कार्यकाल के पहले वर्ष में ही उसने दस हज़ार स्कूली बच्चों को मुफ्त लैपटॉप बांटे.
अभी लाखों बंटने बाकी है और इस पूरी <link type="page"><caption> योजना</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2013/05/130517_up_brahmin_rdt_analysis_rd.shtml" platform="highweb"/></link> की लागत आने वाली है लगभग तीन हज़ार करोड़ रूपए.
इस योजना के साथ उत्तर प्रदेश भी भारत के उन तमाम राज्यों में शुमार हो चुका है जहाँ विभिन्न राजनीतिक दलों ने <link type="page"><caption> मतदाताओं</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2013/05/130515_mayawati_ministers_up_government_pk.shtml" platform="highweb"/></link> को रिझाने के लिए बड़े-बड़े चुनावी वादे किए हैं.
खस्ताहाल

लगभग 19 करोड़ की <link type="page"><caption> आबादी</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2013/05/130512_up_brahman_sm.shtml" platform="highweb"/></link> वाले उत्तर प्रदेश को भारत में सबसे ज्यादा जनसंख्या वाले राज्यों में गिना जाता है.
प्रदेश में, बड़े शहरों को छोड़ दें तो, अब भी मूलभूत <link type="page"><caption> सुविधाओं</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2013/04/130427_akhilesh_harvard_boycott_akd.shtml" platform="highweb"/></link> का अभाव है.
राज्य में जितनी <link type="page"><caption> बिजली</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2013/04/130426_azam_khan_us_ml.shtml" platform="highweb"/></link> की ज़रुरत है उससे लगभग 14% कम मिल पाती है.
राज्य से गुजरने वाले <link type="page"><caption> राष्ट्रीय</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2013/03/130314_up_akhilesh_yadav_mulayam_sp_adg.shtml" platform="highweb"/></link> राजमार्गों के अलावा सड़कों को मरम्मत की ज़रुरत है और गांवों में आज भी पक्की सडकें एक सपना है.
प्रदेश के ज़्यादातर <link type="page"><caption> ग्रामीण</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2013/03/130313_up_akhilesh_oneyear_ns.shtml" platform="highweb"/></link> इलाकों से लोग आज भी इलाज वगैरह के लिए बड़े शहरों की ओर रुख करते हैं.
ऐसे में <link type="page"><caption> चुनावी</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2013/03/130307_cbi_rajabhayya_fir_ia.shtml" platform="highweb"/></link> वादे के नाम पर हजारों करोड़ खर्च करना कितना जायज़ है?
राजनीतिक विश्लेषक पुष्पेश पंत को लगता है समस्या सोच की है.
उन्होंने बताया, "आज़ादी के कुछ दशक बाद से ही राजनीतिक दलों को लगने लगा था कि मतदाताओं को लुभाने के लिए कुछ नया करना पड़ेगा. हालांकि अभी भी चुनावों के पहले प्रचार में कई तरह के गलत काम होते हैं, लेकिन इस तरह वादों को करना सबसे आसान है. आपका पैसा भी नहीं लगता और काम भी पूरा हो जाता है".
विकास
उत्तर प्रदेश सरकार को लगता है कि विकास की दूसरी चीज़ों पर ध्यान देने के साथ-साथ लैपटॉप और टैबलेट बांटने में कोई गलत बात नहीं है.
अभिषेक मिश्रा समाजवादी सरकार के सबसे व्यस्त मंत्रियों में गिने जाते हैं.
उनका कहना है, "क्या इसका मतलब ये है हम सफाई व्यवस्था पर ध्यान दें और आईटी शिक्षा पर नहीं? क्या हम सिर्फ सड़कों और बिजली पर ध्यान दें और प्रदेश के लोगों को विज्ञान और तकनीकी मामलों में पिछड़ जाने दें? नहीं...हमें दोनों चीज़ों पर बराबर ध्यान देने की ज़रुरत है. प्रदेश में पहले से व्याप्त डिजिटल डिवाइड को और बढ़ने नहीं दे सकते".
वैसे उत्तर प्रदेश से पहले भारत के कई अन्य राज्यों में भी राजनीतिक दलों ने लैपटॉप और कंप्यूटर बांटने के लिए वादे किए हैं.
कुछ ने बांटे भी और कुछ की सरकारें ही नहीं बन सकीं. हालांकि विश्लेषक फिर भी मानते है कि भारत जैसे देश में लैपटॉप जैसी चीज़ को मुफ्त बांटना कारगर नहीं है.
आईटी क्षेत्र के वरिष्ठ पत्रकरों में से एक प्रशांतो कुमार रॉय को ये पहल व्यर्थ लगती है.
उन्होंने कहा, "अगर आप करोड़ खर्च करने जा रहे हैं तो ज़रूरी है तय करना कि उसका उपयोग सबसे ज्यादा किस क्षेत्र में होगा. लेकिन राजनीतिक दल इस सवाल को छूते तक नहीं क्योंकि उनका निशाना सिर्फ अगले चुनावों तक होता है. इसी तरह आम लोगों का पैसा ज़ाया होता चला जाता है."
<bold>(<link type="page"><caption> बीबीसी हिन्दी</caption><url href="https://www.facebook.com/bbchindi" platform="highweb"/></link> के <link type="page"><caption> एंड्रॉएड ऐप </caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/multimedia/2013/03/130311_bbc_hindi_android_app_pn.shtml " platform="highweb"/></link>के लिए आप <link type="page"><caption> यहाँ क्लिक</caption><url href="https://play.google.com/store/apps/details?id=uk.co.bbc.hindi" platform="highweb"/></link> कर सकते हैं. आप हमें <link type="page"><caption> फ़ेसबुक </caption><url href="http://www.facebook.com/bbchindi" platform="highweb"/></link>और <link type="page"><caption> ट्विटर</caption><url href="https://twitter.com/BBCHindi" platform="highweb"/></link> पर <link type="page"><caption> फ़ॉलो</caption><url href="https://twitter.com/BBCHindi" platform="highweb"/></link> भी कर सकते हैं.)</bold>












