नक्सली समस्या पर कितनी गंभीर है सरकार?

25 मई की शाम नक्सलियों ने कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा से लौट रहे काफिले पर बस्तर इलाके में हमला किया था.
इमेज कैप्शन, 25 मई की शाम नक्सलियों ने कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा से लौट रहे काफिले पर बस्तर इलाके में हमला किया था.

छत्तीसगढ़ के बस्तर में बीते शनिवार 25 मई को नक्सलियों ने कांग्रेस के काफिले पर हमला कर 27 लोगों की हत्या कर दी थी जिसकी चारों तरफ आलोचना हुई. मारे गए लोगों में कांग्रेस के नेता महेंद्र कर्मा, नंद कुमार पटेल और उनके बेटे के साथ कई पुलिसकर्मी शामिल थे.

महेंद्र कर्मा जहां राज्य के पूर्व गृह मंत्री और नक्सल विरोधी अभियान सलवा जुडूम के जन्मदाता थे वहीं नंद कुमार पटेल प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष थे.

इस शनिवार इंडिया बोल में बहस का मुद्दा है नक्सली समस्या पर कितनी गंभीर है सरकार?

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इस नक्सली हमले में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता विद्या चरण शुक्ल गंभीर रूप से जख्मी हो गए हैं. उनका गुड़गांव के एक अस्पताल में इलाज चल रहा है.

हमले के बाद नक्सलियों ने ये कहा कि महेंद्र कर्मा की हत्या उन्होंने उनकी नक्सल विरोधी गतिविधियों की वजह से की.

इतने बड़े नक्सली हमले के बाद अमरीका गए देश के गृह मंत्री ने न तो स्वदेश वापसी में जल्दबाज़ी दिखाई और न ही कोई बयान जारी किया.

इंडिया बोल

नक्सली हमले में मारे गए कांग्रेस नेता महेंद्र कर्मा 'सलवा जुडूम' के जन्मदाता माने जाते थे.
इमेज कैप्शन, नक्सली हमले में मारे गए कांग्रेस नेता महेंद्र कर्मा 'सलवा जुडूम' के जन्मदाता माने जाते थे.

सरकार ने इन हत्याओं की जांच नेशनल जांच एजेंसी - एनआईए को ज़रूर सौंप दी है और राज्य सरकार ने भी इसकी जांच के लिए एक न्यायिक आयोग बिठा दी है.

अपनी विदेश यात्रा से लौटकर शुक्रवार को रायपुर पहुंचे गृह मंत्री सुशील शिंदे ने ये ज़रूर कहा कि अभी तक सरकार ये मानती रही थी कि कुछ लोग जो विकास की धारा में पिछड़ गए हैं, वे लोग ही गुमराह होकर नक्सली गतिविधियों में शामिल हो गए हैं. लेकिन अब इस बड़े हमले के बाद सरकार ये समझ गई है कि एक विचारधारा के आधार पर काम कर रहे नक्सलियों के मंसूबे कुछ और ही हैं.

लेकिन सवाल उठता है कि छत्तीसगढ़, ओडिशा, आंध्र प्रदेश, झारखंड जैसे नक्सलवाद प्रभावित राज्यों में सुरक्षा के लिहाज से तमाम सरकारी इंतज़ामों के बावजूद नक्सली छापामार अपने मंसूबों में अक्सर क़ामयाब कैसे हो जाते हैं. क्या ये सरकार की अगंभीरता का परिचायक है या फिर सरकार चाहती नहीं कि इस समस्या के सामाजिक आर्थिक पहलुओं को सतह पर समझकर उसका निदान ढूंढा जाए.

इस शनिवार बीबीसी इंडिया बोल में बहस इसी विषय पर कि नक्सली हिंसा को लेकर कितनी गंभीर है केंद्र और राज्य की सरकार? कार्यक्रम में शामिल होने के लिए शनिवार शाम 7.30 बजे हमें मुफ्त फोन कीजिए 1800-11-7000 या 1800-102-7001 पर. कार्यक्रम में शामिल होने के लिए आप हमें [email protected] पर अपना फ़ोन नंबर ईमेल भी कर सकते हैं या हमारे फेसबुक पेज पर कमेंट भी कर सकते हैं.