....जिन्होंने कृत्रिम पैर से एवरेस्ट फ़तह किया

भारत की अरुणिमा सिन्हा दुनिया की <link type="page"><caption> सबसे ऊंची चोटी</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/international/2013/04/130429_nepal_mount_everest_climbers_fight_guides_vd2.shtml" platform="highweb"/></link> एवरेस्ट पर विजय प्राप्त करने वाली <link type="page"><caption> दुनिया की पहली</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/international/2013/05/130518_saudi_woman_on_everest_rd.shtml" platform="highweb"/></link> विकलांग <link type="page"><caption> महिला</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/news/2012/05/120519_everest_women_japan_sm.shtml" platform="highweb"/></link> बन गई हैं.
दो साल पहले अरुणिमा से पर्स छीनने की कोशिश कर रहे बदमाशों ने विरोध करने पर अरुणिमा को चलती ट्रेन से नीचे फेंक दिया था.
इस हादसे के बाद अरुणिमा की जान बचाने के लिए डॉक्टरों को उनका एक पैर घुटने के नीचे से काट देना पड़ा था.
<link type="page"><caption> (क्यों है एवरेस्ट का आकर्षण?)</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/news/2012/05/120526_everest_allure_fma.shtml" platform="highweb"/></link>
प्रशिक्षण
मूल रूप से उत्तर प्रदेश के अंबेडकर नगर की निवासी अरुणिमा वॉलीबॉल की राष्ट्रीय खिलाड़ी रह चुकी हैं. उनके एवरेस्ट अभियान को टाटा स्टील एडवेंचर फाउंडेशन ने प्रायोजित किया था.
फाउंडेशन ने अभियान के आयोजन और मार्गदर्शन के लिए 2012 में एशियन ट्रेकिंग कंपनी से संपर्क किया था.
आंग शेरिंग कहते हैं, “हम उनकी कहानी जानते थे. हमें पता था कि वे उस हादसे से इसलिए उबर पाई क्योंकि वे एक सक्रिय खिलाड़ी रही है.”
एशियन ट्रेकिंग कंपनी ने 2012 के वसंत के पर्वतारोहण मौसम में उन्हें नेपाल के आइलैंड चोटी पर प्रशिक्षण दिया. कंपनी के संस्थापक आंग शेरिंग शेरपा ने समाचार एजेंसी एएफ़पी को कहा कि पहले उनके गाइड उनकी धीमी रफ़्तार को लेकर चिंतित थे.
आखिरकार यह दल 8,750 मीटर की ऊंचाई पर पहुंचा, जहां से पर्वतारोही चोटी के लिए निकलते हैं. आंग शेरिंग के अनुसार, “वहां तक पहुंचने के बाद उनमें ऊर्जा और आत्मविश्वास भर गया और उन्होंने तेजी से बढ़ना शुरू कर दिया.”
52 दिन के अभियान के बाद आखिरकार 21 मई की सुबह 10.55 मिनट पर 26 वर्षीय अरुणिमा के कृत्रिम पैर एवरेस्ट की चोटी पर पड़े.
एवरेस्ट विजय करने वाली पहली भारतीय महिला बछेंद्री पाल ने उन्हें बधाई देते हुए कहा, “अरुणिमा का जोश, इच्छा शक्ति और मानसिक ताकत उनके प्रशिक्षण के दौरान भी दिखी जिसके सहारे उन्होंने सारी दिक्कतों को धता बता दिया. वह दुनिया भर के करोड़ों लोगों के लिए एक प्रेरणास्रोत बन गई हैं.”
दया नहीं
हिमालय में पर्वतारोहण के लिए मई का महीना सबसे बेहतर माना जाता है क्योंकि इस समय मौसम अच्छा रहता है. इस साल अब करीब 300 लोग 8,848 मीटर ऊंची इस चोटी पर चढ़ाई कर चुके हैं.
ब्रिटेन के पर्वतारोही टॉम व्हिटेकर 1998 में एवरेस्ट पर विजय प्राप्त करने वाले पहले विकलांग व्यक्ति बने थे.
इससे दो दशक पहले एक कार दुर्घटना के बाद उनका एक पैर काटना पड़ा था.
इस ऐतिहासक पल के बाद अरुणिमा ने एक भारतीय टीवी चैनल को बताया, “दुर्घटना के बाद सभी मेरे बारे में चिंतित थे. तब मैंने महसूस किया कि मुझे अपनी ज़िंदगी में कुछ ऐसा करना होगा कि लोग मुझ पर दया दिखाना बंद कर दें.”
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए <link type="page"><caption> यहां क्लिक करें</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/multimedia/2013/03/130311_bbc_hindi_android_app_pn.shtml " platform="highweb"/></link>. आप हमें <link type="page"><caption> फ़ेसबुक</caption><url href="https://www.facebook.com/bbchindi " platform="highweb"/></link> और <link type="page"><caption> ट्विटर</caption><url href="https://twitter.com/BBCHindi " platform="highweb"/></link> पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)












