क्या आप आईपीएल से ऊब चुके हैं?

दो महीनों तक लगातार क्रिकेट, एक के बाद एक <link type="page"><caption> विवाद</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/sport/2013/05/130517_ipl_controversy_cricket_vr.shtml" platform="highweb"/></link> और अब स्पॉट फ़िक्सिंग का दाग. <link type="page"><caption> आईपीएल</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/sport/2013/05/130516_spot_fixing_rd.shtml" platform="highweb"/></link> के बारे में कुछ लोगों का तो ये तक कहना है कि उनका मन अब टूर्नामेंट से ऊबने लगा है, लेकिन क्या ये बात सभी लागों के लिए लागू होती है?
बीबीसी के ट्विटर हैंडल पर प्रवीण जैन कड़े शब्दों में लिखते हैं, “क्रिकेट में <link type="page"><caption> फिक्सिंग</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/sport/2013/05/130516_fixing_timeline_vk.shtml" platform="highweb"/></link> नई बात नहीं है. अपराधी पकड़े नहीं जाते, सजा तो दूर की बात है. आईपीएल आयोजन युवा पीढ़ी को बर्बाद कर रहा है.”
प्रीतम कुमार सिन्हा भी आईपीएल के बदलते अंदाज़ से काफ़ी ख़फ़ा हैं. वो कहते हैं, “आईपीएल अब हमारे बिछड़ चुके पूर्व प्रेमी की तरह हो गया लगता है. कभी हम उनसे भी प्यार करते थे.”
जालौर से नरपटसिंह राठौर पोसाना मानते हैं कि आईपीएल से क्रिकेट बदनाम हुआ है और अब खेल में रुचि नहीं है.
बीबीसी हिंदी के पाठक हरिहर गोस्वामी, प्रणव चंद्रा, वैभव कुमार और अमृत पाल सिंह कहते हैं कि उनका मन आईपीएल से ऊब गया है.
फ़ेरनसिंह कुश्वाहा के अनुसार <link type="page"><caption> आईपीएल</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/sport/2013/05/130516_ipl_spotfixing_pp.shtml" platform="highweb"/></link> पहले अच्छा था लेकिन अब इतना मज़ा नहीं आता.
संगीत कुमार जैन बीबीसी हिंदी के फ़ेसबुक पन्ने पर लिखते हैं कि आईपीएल कई कारणों से सुर्खियों में बना रहा है और उन्होंने अब टूर्नामेंट के मैचों को देखना बंद कर दिया है.
अमन कुमार चौधरी कहते हैं कि आईपीएल मात्र नौटंकी है क्योंकि “उल्टे-सीधे, बैसिर-पैर के शॉट” को आप क्रिकेट नहीं कह सकते और इस कारण “इसमे मेरी कभी दिलचस्पी नही रही है.”
मत्रिका खनाल मानते हैं कि जबसे आईपीएल शुरू हुआ है क्रिकेट का मज़ा ख़त्म हो गया है.
अलग सोच

एक दूसरी सोच ये है कि कुछ खिलाड़ियों की <link type="page"><caption> गलती</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/sport/2013/05/130516_sreesanth_vk.shtml" platform="highweb"/></link> के कारण पूरे टूर्नामेंट को बदनाम करना सही नहीं होगा.
अब्दुल्लाह शेख को लगता है कि “आईपीएल खिलाड़ी नहीं भारतीय <link type="page"><caption> खिलाड़ियों</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/sport/2013/04/130412_sreesanth_slapgate_bhajji_pp.shtml" platform="highweb"/></link> की वजह से क्रिकेट बदनाम हुआ है.”
प्रमोद सिंह को आईपीएल देखना अभी भी पसंद है “क्योंकि सब एक जैसे नहीं होते.”
देवेंद्र श्रीवास्तव बीबीसी हिंदी के फ़ेसबुक पेज पर लिखते हैं कि जहाँ अच्छी चीज़ है तो एक-दो बुरी ही सही, पर “आईपीएल में आज भी उतना ही मज़ा आता है जितना पहले आता था.”
आदित्य कुमार सिंह के मुताबिक अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में हमेशा से फ़िक्सिंग एक मुद्दा रहा है लेकिन इसका मतलब ये नहीं है कि क्रिकेट की विश्वसनीयता खत्म हो गई है.
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