कैसे बचें 'साइबर बुलिंग' से

इंटरनेट पर बुलिंग से बचने के लिए आपको क्या करना चाहिए? अगर कोई आपको परेशान कर रहा हो तो क्या करें. अगर आपके ज़ेहन में भी ऐसे सवाल हैं तो आइए <link type="page"><caption> बीबीसी हिंदी फेसबुक</caption><url href="www.faceboook.com/bbchindi" platform="highweb"/></link> पर शाम चार बजे लाइव चैट में.
<link type="page"><caption> इंटरनेट पर बुलिंग</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2013/05/130426_cyber_abuse_women_da.shtml" platform="highweb"/></link> का अनुभव खतरनाक होता है और इससे मनोविज्ञान को गहरा धक्का पहुंच सकता है.
अगर ऐसा हो तो आप क्या करेंगे? सड़क पर आप नज़रअंदाज़ कर, बहस कर या आमना-सामना कर बदतमीज़ी करनेवाले को पकड़ने की कोशिश, या पुलिस और क़ानून की मदद ले सकते हैं.
लेकिन इटंरनेट पर क्या? जहां अक्सर परेशान करनेवाले व्यक्ति की पहचान करना मुश्किल होता है. और सोशल नेटवर्किंग वेबसाइट्स, जो ऐसे ख़ुले मंच हैं जहां बातचीत पर किसी भी तरह की लगाम लगाना मुश्किल होता है?
‘साइबर बुलिंग’ से जुड़े ऐसे सभी सवालों का जवाब देने के लिए दो विशेषज्ञ आज शाम चार बजे <link type="page"><caption> बीबीसी हिन्दी के फेसबुक</caption><url href="http://www.facebook.com/bbchindi?hc_location=stream" platform="highweb"/></link> पन्ने पर आपसे लाइव चैट करेंगे.
विशेषज्ञों के उपाय
आपके सवालों के जवाब देंगे क्रिमिनॉलॉजी के प्रोफेसर डॉ. के. जयशंकर और वक़ील देबरती हल्दर. ये दोनों जानकार ‘साइबर बुलिंग’ का शिकार हुए लोगों के लिए काउंसलिंग सेल चलाते हैं.
वर्ष 2009 में शुरू हुए इस सेल को वो एक वेबसाइट के ज़रिए चलाते हैं. ईमेल के ज़रिए आने वाली शिकायतों का हल भी ईमेल के ज़रिए दिया जाता है.

अपने अनुभव और साइबर बुलिंग पर वर्ष 2010 में किए एक शोध से मिली जानकारी के आधार पर वो बताते हैं कि इंटरनेट पर कई तरीके से हमला किया जा सकता है – किसी शख़्स को परेशान करनेवाले, बदतमीज़ी भरे या धमकी देते हुए संदेश भेजना, ये सभी संदेश ईमेल के ज़रिए एक शख़्स ही नहीं उनके जाननेवालों को भी भेजना या और किसी भी तरीके से डर पैदा करना.
इसके अलावा उनके पास आनेवाली शिकायतों में कई अश्लील तस्वीरें पोस्ट करने या निजी तस्वीरों के साथ छेड़छाड़ कर उन्हें सार्वजनिक करने से जुड़ी होती हैं.
देबरती बताती हैं कि इस सबसे निपटने के लिए भारत में कोई एक क़ानून नहीं है पर कुछ मौजूदा क़ानूनों का सहारा लेकर पुलिस में शिकायत दर्ज की जा सकती है.
डॉ. के जयशंकर के मुताबिक, “साइबर दुनिया असल दुनिया का ही प्रतिबिम्ब है, फर्क ये है कि लोग ज़्यादा आज़ाद महसूस करते हैं, इसी वजह से कई लोग ज़्यादा खुलकर अपनी बात रखते हैं पर कई उनसे समाज के दायरों में रहने की ही अपेक्षा रखते हैं.”
आप आज शाम चार बजे ‘साइबर बुलिंग’ से जुड़े सभी सवालों के साथ <link type="page"><caption> बीबीसी हिन्दी के फेसबुक</caption><url href="http://www.facebook.com/bbchindi?hc_location=stream" platform="highweb"/></link> पन्ने पर लाइव चैट में शामिल हो सकते हैं.












