क्या काफी है अजीत पवार की माफी?
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चौतरफा आलोचना के बाद महाराष्ट्र के उप मुख्यमंत्री अजीत पवार ने अपने उस बयान के लिए माफी मांग ली है जिसमें उन्होंने कहा था, "...जब पानी ही नहीं है, तो क्या पेशाब कर दें."
विपक्षी पार्टी भाजपा ने इसकी आलोचना करते हुए इसे "निम्न से भी निम्नतर" बताया है. उधर, शिवसेना और राज ठाकरे की पार्टी एमएनएस ने भी इस बयान पर कड़ा ऐतराज जताया है.
दिलचस्प बात ये है कि अजीत पवार की पार्टी एनएसीपी ने भी उनके बयान से पल्ला झाड़ लिया है. सवाल उठ रहे हैं कि क्या पार्टी अजीत के खिलाफ कोई कड़ा कदम उठाएगी?
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी प्रमुख और केंद्रीय कृषि मंत्री शरद पवार के भतीजे अजीत पवार ने महाराष्ट्र में एक सभा के दौरान ये बयान दिया था.
पुणे के इंदापुर में एक सभा को संबोधित करते हुए महाराष्ट्र के उप मुख्य मंत्री अजीत पवार ने कहा, “एक आदमी 55 दिन से बांध से पानी छोडऩे की रट लगाए हुए है. अनशन पर है, क्या उसे पानी मिल गया. जब पानी ही नहीं है तो कहां से छोड़ें, क्या अब पेशाब कर दें.”
अजीत पवार यहां नही रुके उन्होंने इससे भी आगे जाते हुए कहा कि जब पीने को पानी है ही नही तो पेशाब भी नही होती.
अजीत पवार पर इससे पहले 70 हजार करोड़ के सिंचाई घोटाले का आरोप लग चुका है. इसके चलते उन्हें पद से इस्तीफा भी देना पड़ा था.
बिजली की किल्लत
इसके बाद राज्य में बिजली की किल्लत पर भी अजीत पवार ने एक और विवादास्पद बयान दिया.
उन्होंने कहा कि रात में दो बजे बिजली काट देते हैं. आजकल रात में बच्चे बहुत पैदा हो रहे हैं. बिजली नही होगी तो लोग क्या करेंगे.
अजीत पवार के इस बयान की भाजपा और शिवसेना ने निंदा की थी.
राज ठाकरे ने अजीत पवार की आलोचना करते हुए कहा कि अगले चुनाव में जनता उन्हें सबक सिखाएगी.
इससे पहले भी राज ठाकरे और अजीत पवार के बीच तीखी बयानबाजी होती रही है.
अहमदनगर में अपनी गाड़ी पर हुए पथराव के बाद महाराष्ट्र नव निर्माण सेना के मुखिया राज ठाकरे ने राज्य के उप मुख्यमंत्री अजीत पवार को सीधी धमकी दते हुए कहा था कि अजीत विभाग गृह विभाग और पुलिस को हटाकर देख लें तो दोनों पैरों पर चलकर वापस नहीं जा पाएंगे.












