लंदन में कम्प्यूटिंग, दिल्ली में तड़का !

तुषार औऱ उनकी पत्नी सुमन ने मिलकर एक रेस्त्रां खोलने का फ़ैसला किया.
इमेज कैप्शन, तुषार औऱ उनकी पत्नी सुमन ने मिलकर एक रेस्त्रां खोलने का फ़ैसला किया.

देश की मिट्टी परदेस से खींच लाती है ये तो सुनी सुनाई बात है लेकिन देश के खाने की खुश्वू एक नया करियर शुरू करने का ख़्याल पैदा कर दे ये ज़रा हट के है.

तुषार तोमर के साथ कुछ ऐसा ही हुआ. आईटी क्षेत्र में लंदन में जमा जमाया अपना करियर छोड़कर जब तुषार पिछले साल 2012 में भारत लौटे तो उनके मन में बस एक इरादा था कि कुछ अलग करना है.

शुरूआत

रेस्त्रां के अंदर बार की व्यवस्था लोगों को ज़्यादा विकल्प देती है.
इमेज कैप्शन, रेस्त्रां के अंदर बार की व्यवस्था लोगों को ज़्यादा विकल्प देती है.

राजस्थान में छुट्टियों के दौरान एक दिन खाना खाते हुए तुषार को अचानक लगा कि इस खाने के स्वाद में ही तो उनका नया पेशा छिपा है.

फिर क्या था देशी और विदेशी का फ्यूज़न हुआ और बन गया रेस्त्रां ‘इंग्लिश तड़का.’

तुषार कहते हैं, ''मेरे लिए ये सिर्फ़ एक रेस्त्रां नहीं है. ये मेरी कोशिश है खाने के उस स्वाद को खोजने की जो अलग-अलग मसालों के एक दूसरे में घुल-मिल जाने से पैदा होता है. अच्छा खाना खाने के लिए पांच सितारा होटल पर निर्भरता को मैं ख़त्म करना चाहता था.''

रेस्त्रां तो तमाम हैं फिर तुषार ने ऐसा क्या किया है कि लोग उसकी तरफ़ खिंचे आएंगे.

इस सवाल के जवाब में तुषार बताते हैं, ''दक्षिणी दिल्ली की बात और है मगर पश्चिमी दिल्ली में मुझे ऐसा कोई रेस्त्रां नहीं दिखा जो यूरोपीय खाना परोसता हो. हमने एक पूरी टीम तैयार की जो यूरोपीय खाना बनाने में महारत रखती हो ताकि रेस्त्रां की अपनी पहचान बन सके.''

बेहत टीम का आधार

बिना किसी औपचारिक प्रशिक्षण के किसी भी काम को करना शायद मुश्किल हो सकता है इस बात को मानते हुए तुषार कहते हैं, ''ये सही है कि अगर ट्रेनिंग हो तो आसानी हो सकती है लेकिन मैं ख़ुशक़िस्मत रहा कि मेरे साथ जो टीम जुड़ी वो बहुत अनुभवी थी. हमारे शेफ़ से लेकर पूरा स्टाफ़ काफ़ी अनुभवी है जिससे चीज़ें आसान हुई हालांकि जितना मैने सोचा था उतना आसान ये रहा नहीं लेकिन इरादों से सब होता है.''

एक नए पेशे की चुनौतियों ने तुषार को क़मज़ोर करने के बजाए चुनौतियां लेने के लिए मज़बूत किया है