बिहार में कफ़ सिरप बना धीमा जहर

<link type="page"><caption> कफ सिरप</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/international/2013/02/130207_coughsyrup_pakistan_sa.shtml" platform="highweb"/></link> की बोतल भारत में आसानी से मिल जाती है. यह सस्ती होती है और इसमें कोई गंध भी नहीं होता. अधिकारियों का कहना है कि इन खूबियों की वजह से नशेड़ी बड़ी तादाद में कफ सिरप के जाल में फंस रहे हैं.
बिहार, पश्चिम बंगाल और पूर्वोत्तर के राज्यों के कई लोग फेंसिड्रिल कफ सिरप का नशा करते हैं.
भारत के गरीब राज्यों में शुमार किए जाने वाले बिहार में हाल ही में ड्रग कंट्रोलर ने दवाओं के थोक विक्रेताओं को एक चिठ्ठी जारी कर फेंसिड्रिल कफ सिरप की सीमित खरीद करने की नसीहत दी है.
बिहार के ड्रग कंट्रोलर हेमंत कुमार सिन्हा ने बीबीसी को बताया,“नौजवान इस कफ़ सिरप का बिना रोक-टोक इस्तेमाल कर रहे हैं और यह एक गंभीर खतरा बन गया है. जल्द ही हम राज्य के स्कूलों में जागरूकता अभियान शुरू करने जा रहे हैं.”
सख्ती का सरकारी आदेश
हेमंत सिन्हा ने राज्य के ड्रग निरीक्षकों को फेंसिड्रिल कफ सिरप की बडी़ मात्रा में और <link type="page"><caption> स्वीकृत सीमा</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/science/2010/10/101030_antibiotic_prevent_dps.shtml" platform="highweb"/></link> से ज्यादा की बिक्री पर नजर रखने के लिए भी कहा है.
ड्रग कंट्रोलर के आदेश के मुताबिक अब दवाईयों को कोई थोक विक्रेता या डीलर फेंसिड्रिल की एक हज़ार से ज्यादा बोतलें नहीं खरीद सकेंगे.
सरकारी आदेश की सख्ती का ये आलम है कि थोक दवा विक्रेताओं को अगले स्टॉक की बुकिंग से पहले अपने खरीददारों का ब्यौरा देने के लिए कहा गया है.
हेमंत सिन्हा ने बताया,“इसके अलावा थोक दवा विक्रेताओं और डीलरों को अपने ग्राहकों और उन्हें बेची गई मात्रा मासिक ब्यौरा ड्रग कंट्रोलर के दफ्तर में जमा करने के लिए कहा गया है.”
नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो की बिहार शाखा के अधिकारी विकास कुमार कहते हैं कि साल 2011-12 में राज्य में फेंसिड्रिल सिरप की तकरीबन डेढ़ करोड़ बोतलें आई थीं.
अन्य राज्यों में आपूर्ति

बिहार के रास्ते से होकर फेंसिड्रिल सिरप की बड़ी खेप बांग्लादेश और नेपाल भेजी जाती है. दोनों ही देशों में इस कफ़ सिरप को बेचने पर प्रतिबंध है.
ड्रग कंट्रोलर हेमंत सिन्हा कहते हैं,“भारत नेपाल की सीमा पर हाल ही में फेंसिड्रिल के कई कार्टन जब्त किए गए थे. इनकी कीमत तकरीबन 50 लाख रुपए की होगी.”
नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो के एक अधिकारी ने बताया फेंसिड्रिल कफ सिरप की बड़ी खेप पूर्वोत्तर के राज्यों में भी भेजी जा रही है. खासकर असम, त्रिपुरा और मेघालय में बिहार और बंगाल से इनकी आपूर्ति की जा रही है. इन राज्यों में नशेड़ियों की तादाद ज्यादा है और इन्हें अधिकतम खुदरा मूल्य से तिगुनी कीमत पर बेचा जा रहा है.
ब्यूरो के इस अफसर ने बताया कि बिहार और बंगाल में फेंसिड्रिल की 100 एमएल की बोतल की कीमत 70 रुपए के करीब बैठती है जबकि नेपाल और बांग्लादेश में यह लगभग 250-300 रुपए की कीमत पर बेचा जा रहा है.
कारोबार पर रोकथाम
अधीक्षक विकास कुमार का कहना है,“हमने कानून लागू करने वाली अन्य सरकारी एजेंसियों के साथ मिलकर फेंसिड्रिल के अवैध कारोबार पर नकेल कसने के लिए कड़ी मशक्कत की है लेकिन हम ज्यादा कुछ करने की स्थिति में नहीं है. फेंसिड्रिल सिरप का व्यापार ड्रग एंड कॉस्मेटिक एक्ट के तहत आता है.”
नारकोटिक्स ड्रग्स ऐंड साइकोट्रॉपिक सब्सटांसेज एक्ट, 1985 के प्रावधानों के तहत नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो अपराधियों पर कार्रवाई करने के लिए अधिक सक्षम है.
ब्यूरो ने इस सिलसिले में केंद्र सरकार को कोडाइन फॉस्फेट को विशिष्ट खाद्य श्रेणी में रखने के लिए आग्रह किया है ताकि फेंसिड्रिल के कारोबार को मादक पदार्थों की रोकथाम करने वाले कानून के तहत लाया जा सके.
इससे नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो फेंसिड्रिल के दुरुपयोग पर लगाम लगा सकेगा.
घातक भी हो सकता है

फेंसिड्रिल के नशीले असर के बारे में युवा डॉक्टर अतुल वर्मा कहते हैं,“फेंसिड्रिल कफ सिरप में कोडीन फॉस्फेट रहता है और यह नियत मात्रा से ज्यादा लेने पर खुमारी छाने लगती है.”
डॉक्टर वर्मा यह भी कहते हैं कि अगर इस दवा को कोई नियत मात्रा से ज्यादा खुराक लगातार लेता रहे तो उसे इसकी लत लग सकती है और कुछ एक मामलों में यह घातक भी हो सकता है.
पिछले साल दिसंबर के महीने में पाकिस्तान के गुजरावाला में स्थानीय टाइनो नाम की कफ सिरप का सेवन करने के बाद 36 लोग मर गए थे.
बीबीसी ने संजय कुमार बबलू नाम के एक व्यक्ति से मुलाकात की. बबलू फेंसिड्रिल की लत का सात साल तक शिकार रहा था. लेकिन एक अन्य नशेड़ी साथी की मौत के बाद उसने फेंसिड्रिल का नशा छोड़ दिया.
संजय ने बीबीसी को बताया,“मेरा एक दोस्त मनोज यादव हर रोज फेंसिड्रिल की बड़ी खुराक लेता था और वह इस कारण साल 2007 में मर गया. उसके बाद मैंने भी इसकी लत छोड़ दी.”
शराब की जगह पर कफ सिरप
संजय और उसके दोस्त रोजाना फेंसिड्रिल की पांच-छह बोतलें गटक जाया करते थे.
संजय कहते हैं,“हां, यह बाजार में आसानी से मिल जाता है. शहर के हर कोने में इसे खरीदा जा सकता है. लेकिन कभी कभार हमने कोरेक्स, रेकोडेक्स और रेक्सॉफ जैसे अन्य कफ सिरप भी चखे.”
लेकिन सवाल यह उठता है कि शराब की जगह पर कफ सिरप या किसी दूसरी उत्तेजना वर्धक दवाई का सेवन करने के बाद कैसा महसूस होता है और ऐसा क्यों होता है.
इसके जवाब में संजय ने बताया,“पहली वजह तो यह है कि यह शराब से सस्ती है. इससे मन शांत होता है, सुरूर बढ़ता है और खुमारी चढ़ती है. ज्यादा असर के लिए कई बार नशेड़ी कफ सिरप पीने के बाद चाय या मिठाई भी खाते हैं.”
सेक्स लाइफ पर असर

उन्होंने बताया,“लेकिन असली नशा तब चढ़ता है जब फेंसिड्रिल सिरप पीने के बाद नशेड़ी नाइट्रोजन, नाइट्रावेट और प्रॉक्सीवॉन जैसे चीजों का सेवन करते हैं.”
लेकिन फेंसिड्रिल का असर सेक्स लाइफ पर भी पड़ता है. संजय कुमार की शादी साल 2006 में हुई थी.
लेकिन अब वह देश के नौजवानों और किशोरों से कफ सिरप के चंगुल में न पड़ने की अपील करते हैं और कहते हैं कि यह उन्हें ‘मौत और नपुंसकता’ की ओर ले जाएगा.
बिहार की राजधानी पटना के ही एक थोक दवा विक्रेता प्रदीप जैन इस बात की पुष्टि करते हैं कि फेंसिड्रिल जैसे कफ सिरप के ज्यादातर खरीदार और इसका दुरुपयोग करने वाले स्कूल जाने वाले बच्चे होते हैं.
वह कहते हैं,“अगर मैं उन्हें नहीं बेचूंगा तो वे कहीं और से इसे खरीद लेंगे. यह आसानी से उपलब्ध है.”
क्या कहते हैं नियम
एक थोक दवा विक्रेता ने नाम न जाहिर करने की शर्त पर बीबीसी को बताया,”ड्रग और कॉस्मेटिक एक्ट के नियम 67 और 97 के तहत कोडाइन की मौजूदगी वाले कफ सिरप निर्धारित मात्रा में खुले बाजार में बेचे जा सकते हैं. इन्हें कहीं लाया ले जाया भी सकता है. इन्हें स्टॉक किया जा सकता है. दवा की दुकान पर इनकी बिक्री की जा सकती है.”
वह आगे बताते हैं,“लेकिन असली समस्या फेंसिड्रिल की नकली बोतलों की है जो कि इस्तेमाल में लाई जा रही है. यह जानलेवा और खतरनाक है.”
उद्योग जगत की प्रतिनिधि संस्था ऐसोचैम की एक रिपोर्ट में कहा गया कि भारत में 100 बार दवाईयां खरीदने पर 40 बार नकली दवा खरीदने की संभावना रहती है.
रिपोर्ट के मुताबिक भारत में मिलने वाली प्रत्येक चार दवाओं में से एक अवैध है. इस बात की आशंका जताई गई है कि अवैध और खराब गुणवत्ता वाली दवाईयों का कारोबार तकरीबन 15 हजार करोड़ रुपए का है और यह सालाना 25 फीसदी की दर से बढ़ रहा है.
भारत का दवा उद्योग दुनिया के चौथे सबसे बड़े बाजार के तौर पर जाना जाता है जबकि बाजार के मूल्यांकन के हिसाब से यह दुनिया में 13 वें स्थान पर है.












