'नकली' पुलिस सुधारेगी यातायात

दक्षिण भारतीय शहर बैंगलोर में ट्रैफिक पुलिस ने यातायात नियमों का उल्लंघन रोकने के लिए एक अनोखा तरीका ईजाद किया है.
शहर के मुख्य इलाके में पुलिस अधिकारियों के आदमकद कट आउट लगाए गए हैं जो दूर से असली लगते हैं. जल्द ही शहर के बाकी इलाकों में भी ऐसे कट आउट लगाने की योजना है.
<link type="page"><caption> बैंगलोर</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2013/01/130108_banglore_dance_bar_pn.shtml" platform="highweb"/></link> में लगभग 42 लाख वाहन हैं और पुलिस ने बेलगाम यातायात पर लगाम कसने के लिए ये कदम उठाया है.
<link type="page"><caption> माइक्रोसॉफ्ट</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/science/2013/03/130306_microsoft_self_sketching_whiteboard_pk.shtml" platform="highweb"/></link>, <link type="page"><caption> कोका कोला</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/international/2013/02/130212_international_others_coca_cola_death_sy.shtml" platform="highweb"/></link>, <link type="page"><caption> आईबीएम</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/science/2012/06/120618_ibm_supercomputer_tb.shtml" platform="highweb"/></link> और ह्यलैट पैकार्ड जैसी कई जानी मानी बहुराष्ट्रीय कंपंनियां बैंगलूर से अपना कामकाज चलाती हैं.
यातायात पुलिस आयुक्त एमए सलीम ने बीबीसी से कहा़, “यह कोई तिकड़म नहीं है. हमने जहां कहीं भी कट आउट लगाए हैं वहां यातायात नियमों के उल्लंघन में कमी आई है.”
कमी
उन्होंने माना कि शहर में 500 से अधिक यातायात पुलिसकर्मियों की कमी है.
यातायात पुलिस आयुक्त ने कहा़, “अभी हमने केवल शहर के मुख्य इलाके में ही कट आउट लगाए हैं लेकिन हमारी योजना हर जगह ऐसे कट आउट लगाने की है.”
इतना ही नहीं यातायात नियमों का उल्लंघन करने वालों को पकड़ने के लिए बैंगलोर पुलिस ने एक नई पहल की है जिसे ‘पब्लिक आई’ नाम दिया गया है.
इसके तहत लोग यातायात नियमों का उल्लंघन करने वालों की तस्वीरें पुलिस विभाग की वेबसाइट पर डाल सकते हैं और पुलिस तुरंत ऐसे लोगों के खिलाफ कार्रवाई करती है.
मददगार
यातायात पुलिस में सब इंस्पेक्टर रामचंद्रा ने कहा, “हम हर समय हर चौराहे पर मौजूद नहीं रह सकते हैं. ऐसे में इस तरह की पहल मददगार साबित होती है.”
कई पुलिसकर्मियों का कहना है कि नए उपायों से यातायात नियम तोड़ने के आदी हो चुके लोगों को हतोत्साहित किया जा सकता है.
लेकिन कई लोग ऐसे भी हैं जो इस राय से इत्तेफाक नहीं रखते हैं. शहर के एक व्यस्ततम चौराहे पर तैनात एक कांस्टेबल ने कहा, “इनसे कुछ नहीं होगा. हमें असली सिपाहियों की जरूरत है. सरकार को नए सिपाहियों की भर्ती करनी चाहिए.”
पुलिस का कहना है कि पिछले साल बैंगलोर में यातायात उल्लंघन के 60000 से अधिक मामले सामने आए थे. शहर में हर दिन औसतन दो लोगों को सड़क दुर्घटनाओं के कारण जान से हाथ धोना पड़ता है.












