बलात्कार विरोधी बिल को लोकसभा की मंज़ूरी

अब बुधवार को इस बिल को राज्यसभा में पेश किए जाने की उम्मीद है.
इमेज कैप्शन, अब बुधवार को इस बिल को राज्यसभा में पेश किए जाने की उम्मीद है.

लोकसभा में बलात्कार विरोधी बिल पास हो गया है. महिलाओं के खिलाफ अपराध के मामलों में कड़ी सजा के प्रावधान वाले इस विधेयक को संसद की निचली सदन ने मंगलवार को मंजूरी दे दी.

विधेयक के एक अहम प्रावधान के तहत बलात्कार और सामूहिक बलात्कार के मामलों में अपराधी को कठोर कारावास की सजा दी जा सकती है जिसकी अवधि 20 साल से कम नहीं होगी और इसे आजीवन कारावास तक बढ़ाया जा सकता है.

साथ ही विधेयक में इस तरह के अपराधों को एक से अधिक बार अंजाम देने वाले अपराधियों को मौत की सजा का प्रावधान है.

महिलाओं के घूरने और पीछा करने जैसे मामलों में दूसरी बार के अपराध को गैर जमानती जुर्म बनाया गया है.

साथ ही महिलाओं पर तेज़ाब हमला करने पर दस साल तक कारावास का प्रावधान पास हुआ है. लोकसभा में पास बिल के मुताबिक सहमति से यौन संबंध बनाने की उम्र 18 साल ही रहेगी.

बहस

लोकसभा में इस बिल को गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे ने पेश किया औऱ इस पर लगभग छह घंटे तक बहस हुई. मुख्य विपक्षी दल बीजेपी ने इस बिल पर संसद में सरकार का समर्थन किया.

शिंदे ने विधेयक पर हुई चर्चा का उत्तर देते हुए कहा, "हम इस कानून को कड़ा बना रहे हैं ताकि लोगों में इस तरह के अपराधों के प्रति डर बैठे. इस बात का स्पष्ट और जोरदार संदेश देने का समय आ गया है कि समाज इस तरह के व्यवहार को स्वीकार नहीं करेगा."

अब बुधवार को इस बिल को राज्यसभा में पेश किए जाने की उम्मीद है. राज्यसभा से पास होने के बाद ये बिल कानून बन जाएगा.

पिछले साल दिल्ली गैंगरेप मामले के बाद सरकार तीन फ़रवरी को अध्यादेश लेकर आई थी जिसमें बलात्कार के दोषियों के ख़िलाफ़ क़ानून को और कड़ा करने का प्रावधान है.

इस अध्यादेश को 22 मार्च से पहले संसद में पारित कराना होगा वरना चार अप्रैल को इसकी अवधि समाप्त हो जाएगी.