वो चट्टानों से भिड़ता रहा चट्टान की तरह

कभी सोचा है सुनसान बीहड़ में किसी गुफा में फँस जाने पर कैसा लगता है ? ऐसी ही स्थिति में फँसे राम प्रसाद नेताम को नई ज़िन्दगी मिल गई है.
छत्तीसगढ़ के नक्सल-प्रभावित कांकेर ज़िले में राम प्रसाद को बचाने की कवायद आखिरकार रंग ले ही आई. उन्हें बचाने की मुहिम में अर्द्धसैनिक बल के जवानों के अलावा अग्निशमन दल और कई महकमे एक साथ लगे थे.
नेताम, कांकेर की रान्वाही की पहाड़ियों पर गए थे जहां पैर फिसलने की वजह से वो एक संकीर्ण गुफा में जा गिरे. इस गुफा की ऊँचाई 80 फीट से ज्यादा की बताई जाती है.
'चमत्कार'
इसके अलावा भी राम प्रसाद नेताम का सही-सलामत बचकर निकल आना किसी चमत्कार से कम नहीं है क्योंकि उन्हें पहाड़ियों की तरफ जाते किसी ने नहीं देखा. जब देर शाम वो घर नहीं पहुंचे तो उनके गाँव के लोगों नें उन्हें ढूंढने की मुहिम शुरू कर दी. मगर किसी को भी राम प्रसाद का कोई अता-पता नहीं मिल पाया.
इस बीच किसी ने गाँव वालों को बताया कि रामप्रसाद को पहाड़ियों की तरफ जाते देखा गया था. जब गाँव के लोग पहाड़ी के आस पास उनकी तलाश कर रहे थे, तभी एक चट्टान के बीच से 'बचाओ- बचाओ' की आवाज़ आई. गाँव वालों को पता चल गया कि राम प्रसाद वहां फँस गया है.
कांकेर, राज्य के बस्तर संभाग का हिस्सा है जो इन दिनों नक्सली हिंसा का केंद्र बना हुआ है.
गाँव वालों की गुहार पर प्रशासनिक अमला हरकत में आया और फिर शुरू हुई राम प्रसाद नेताम को बचाने की बड़ी मुहिम जिसमे वन विभाग के लेकर अर्द्धसैनिक बल के जवान शामिल थे. मगर चट्टानों को काटना नामुमकिन लग रहा था.
कंकर के पुलिस अधीक्षक आर एन दास का कहना है कि कई घंटों तक स्थानीय स्तर पर उन्हें बचाने का काम चलता रहा. इस बीच पाईप से रामप्रसाद तक भोजन और ग्लूकोस पहुंचाने की कोशिश की गयी.
गाँव वालों ने भी चट्टानों को तोड़ने की कोशिश की. मगर इसमें बड़ा जोखिम था क्योंकि थोड़ी सी चूक रामप्रसाद की जान ले लेती.
राष्ट्रीय आपदा राहत दल की मदद
पुलिस अधीक्षक का कहना है कि जब रामप्रसाद को बचाने के सभी प्रयास विफल होते नज़र आये तो प्रशासन नें राष्ट्रीय आपदा राहत दल की सेवाएं ली.
शनिवार को राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन दल, भिलाई इस्पात संयंत्र और साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड के राहत दलों ने चट्टानों को काटने का काम शुरू किया. कई घंटों की मशक्कत के बात रामप्रसाद को चट्टानों के बीच से सही सलामत निकाल लिया गया.
उन्हें अभी कांकेर के अस्पताल में भरती कराया गया है. डाक्टरों का कहना है कि चार दिनों तक फंसे रहने की वजह से रामप्रसाद को काफी कमज़ोरी है और उन्हें ठीक होने में कुछ दिन लग सकते हैं.
मगर राहत दल और रानवाही गाँव के लोग रामप्रसाद के हौसले की दाद देते हैं क्योंकि "वो चट्टानों से भिड़ता रहा चट्टान के तरह....."












