राजीव गांधी के 'हत्यारे' को गोल्ड मेडल

राजीव गांधी हत्या मामले में दोषी ठहराए गए पेरारीवलन ने वेल्लौर जेल में रहते हुए डेस्कटॉप पब्लिशिंग ऑपरेटर कोर्स में गोल्ड मेडल हासिल किया है.
उन्होंने इस कोर्स की परीक्षा में अव्वल दर्जा हासिल किया. जेल विभाग द्वारा आयोजित शिक्षा व व्यावसायिक प्रशिक्षण कार्यक्रम के तहत कैदियों को कई कोर्स प्रदान किए जाते हैं.
उनमें से एक डेस्कटॉप पब्लिशिंग ऑपरेटर कोर्स में पेरारीवलन ने ये कीर्तिमान हासिल किया. ये पहली बार नहीं है जब पेरारीवलन ने जेल में रहते हुए उच्च शिक्षा प्राप्त करने की अपनी कोशिश में सफलता हासिल की है.
पिछले ही साल उन्होंने 91 प्रतिशत के साथ 12वीं की परीक्षा पास की थी.
संगीत के शौकीन
मार्च 2012 में हुई इस परीक्षा के लिए जेल के भीतर ही परीक्षा केंद्र बनाया गया था. कुल आठ कैदियों ने 12वीं की परीक्षा दी थी और सभी पास हो गए थे.
40 वर्षीय पेरारिवलन जेल में 20 साल से ज़्यादा की सज़ा काट चुके हैं और इस दौरान उन्होंने कई उपलब्धियां हासिल की हैं. जेल की ही अंदर उन्होंने कंप्यूटर एप्लिकेशन में ग्रेजुएशन व मास्टर डिग्री हासिल की है.
गिरफ्तार किए जाने से पहले उनके पास इलेक्ट्रॉनिक्स और कम्यूनिकेशन में डिप्लोमा भी था. उनके बारे में कहा जाता है कि उन्हें लिखने का और पश्चिमी संगीत का बहुत शौक है.
रिपोर्टों के मुताबिक वे वेल्लौर जेल के एक स्कूल में बतौर अध्यापक पढ़ाते भी हैं और बाकी कैदियों को पढ़ने के लिए उत्साहित करते हैं.
पेरारीवलन के साथ संथन, मुरुगन और नलिनी नाम के तीन और अभियुक्तों को राजीव गांधी हत्या मामले में मौत की सज़ा सुनाई गई थी और इनकी दया याचिका भी खारिज कर दी गई थी.'
'साज़िश'
बाद में नलिनी के मृत्युदंड को आजीवन कारावास में बदल दिया गया था. मौत की सज़ा पाने वाले तीन लोगों पर आत्मघाती हमले की साज़िश रचने और उसे अंजाम तक पहुँचाने का आरोप था.
पेरारीवलन पर आरोप है कि उन्होंने बम बनाने के लिए बैटरी खरीदवाने में मदद की थी.
उनका कहना है कि उन्हें फंसाया गया है. अपनी गिरफ्तारी और सीबीआई की ‘साज़िश’ का बयान उन्होंने अपनी किताब में भी किया है.
पारारीवलन की मां सोनिया गांधी से भी अपील कर चुकी हैं कि उनके बेटे पर लगे ‘झूठे’ आरोपों को वापस लिया जाए.












