भड़काऊ भाषण मामले में वरुण गांधी बरी

भड़काऊ भाषण के एक मामले में पीलीभीत कोर्ट ने भारतीय जनता पार्टी के नेता वरुण गांधी को बरी कर दिया है.
एक अन्य मामले की सुनवाई शुक्रवार को होगी.
वरुण गांधी पर 2009 में चुनाव प्रचार के दौरान एक ख़ास समुदाय के खिलाफ़ भड़काऊ भाषण देने का आरोप था.
उनके खिलाफ़ पहली एफ़आईआर 17 मार्च, 2009 को बारखेड़ा पुलिस स्टेशन में दर्ज की गई. इसमें वरुण गांधी पर आठ मार्च, 2009 को एक जनसभा में भड़काऊ भाषण देने का आरोप लगाया गया था.
दूसरी एफ़आईआर 18 मार्च, 2009 को सदर कोतवाली में दर्ज कराई गई. इसमे दालचंद इलाके में कथित रूप से सांप्रदायिक द्वेष भड़काने वाले भाषण देने का आरोप लगाया गया.
वरुण का स्पष्टीकरण
वरुण गांधी ने इन आरोपों का खंडन किया. उन्होंने कहा कि पहले वाले मामले में वो अपराधी तत्वों की बात कर रहे थे.
वरुण गांधी के अनुसार दूसरे मामले में टेपों से छेड़छाड़ की गई थी. बाद में चुनाव आयोग के निर्देश पर उन पर केस दर्ज किए गए थे.
वरुण गांधी ने बाद में कोर्ट के सामने समर्पण कर दिया था और उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया था.
बहुजन समाज पार्टी की तत्कालीन सरकार ने वरुण गांधी पर एनएसए लगा दिया था और उन्हें एटा जेल में शिफ़्ट कर दिया गया था.
मई 2009 में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद एनएसए हटा लिया गया था और जेल में 19 दिन रहने के बाद उन्हें ज़मानत मिल गई.
वरुण गांधी ने पीलीभीत संसदीय सीट का चुनाव भी जीत लिया था.
अभियोजन पक्ष ने इस मामले में 51 गवाह पेश किए लेकिन वरुण गांधी के ख़िलाफ़ कोई बयान या सबूत पेश नहीं किया जा सका.
इस मामले की जांच उत्तर प्रदेश पुलिस कर रही थी.
विस्तृत जांच की मांग
एक कार्यकर्ता अब्दुल कय्यूम ने कोर्ट में आरोप लगाया था कि वरुण गांधी ने जांच में सहयोग के लिए अपनी आवाज़ का नमूना नहीं दिया.
उन्होंने ये भी आरोप लगाया कि गवाहों से जल्दबाज़ी में पूछताछ की गई और न्यूज़ चैनलों से भाषण की कॉपी भी नहीं मांगी गई.
उन्होंने इसे जांच से समझौता बताते हुए कोर्ट से मामले की विस्तृत जांच के आदेश देने की मांग की थी.
अब्दुल कय्यूम की याचिका पर कोर्ट शुक्रवार को फ़ैसला करेगी.












