वीरप्पन के साथियों की फांसी पर रोक

सुप्रीम कोर्ट ने चंदन तस्कर वीरप्पन के <link type="page"> <caption> चार साथियों की फांसी</caption> <url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2013/02/130217_virappan_aides_execution_sp.shtml" platform="highweb"/> </link> पर बुधवार तक रोक लगा दी है.
इन चारों को 1993 में कर्नाटक के पोलार में बारूंदी सुरंग के विस्फोट में 22 पुलिसकर्मियों और अन्य लोगों की मौत के सिलसिले में फांसी की सजा दी गई थी.
इससे पहले शनिवार को सुप्रीम कोर्ट ने इन लोगों की याचिका पर तुरंत सुनवाई से इनकार कर दिया. ये लोग अपनी मौत की सजा पर अमल को रुकवाना चाहते थे.
सोमवार को सर्वोच्च अदालत ने इनकी मौत की सजा पर रोक लगा दी और अब इस मामले की सुनवाई बुधवार को होगी.
वीरप्पन की पत्नी की मांग
ग्नाना प्रकासम, साइमन, मीकेसकर मदैया और बिलावेंद्रम को 2001 में मैसूर की एक अदालत ने उम्रकैद की सजा सुनाई थी लेकिन 2004 में सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें मौत की सजा सुनाई.
ये सभी लोग अपनी सजा को उम्रकैद में बदलने की मांग कर रहे हैं.
वीरप्पन की पत्नी मुथुलक्ष्मी को भी बारूदी सुरंग विस्फोट मामले में गिरफ्तार किया गया था लेकिन बाद में उन्हें बरी कर दिया गया.
मुथुलक्ष्मी ने तमिलनाडु विधानसभा से मांग की है कि वो उसी तरह इन लोगों की मौत को सजा को उम्रकैद में तब्दील करने संबंधी प्रस्ताव पारित करे जैसा राजीव गांधी हत्याकांड के अभियुक्तों के मामले में किया गया था.
उनका कहना है, “ये चारों लोग तमिल हैं. वो आतंकवादी नहीं, बल्कि निर्दोष लोग हैं जिन्हें गलती से गिरफ्तार किया गया है. इस मामले में सैकड़ों लोग बरी किए जा चुके हैं, तो इन लोगों के लिए प्रस्ताव पारित किया जाना चाहिए.”
इन लोगों को कर्नाटक की बेलगाम जेल में रखा गया है.
इनके गिरोह के प्रमुख वीरप्पन अक्तूबर 2004 में एक तमिलनाडु पुलिस के साथ एक मुठभेड़ में मारे गए थे.












