अब तुम्हारे हवाले 'राजू श्रीवास्तव' साथियों

कुछ साल पहले टीवी पर लाफ्टर शो के ज़रिए घर-घर लोकप्रिय होने वाले कलाकार राजू श्रीवास्तव ने राजनीति के मैदान में उतरने का फैसला किया है. वो समाजवादी पार्टी के टिकट पर कानपुर से आगामी लोकसभा चुनाव लड़ेंगे.
क्या एक हास्य कलाकार को जनता गंभीरता से ले पाएगी. क्या वो महज़ अपनी लोकप्रियता भुनाने के लिए ही राजनीति में आ रहे हैं. इन सब मुद्दों पर बीबीसी ने उनसे खास बात की. पेश है बातचीत के चुनिंदा अंश.
<bold>सवाल: राजनीति में क्यों आ रहे हैं?</bold>
जवाब: मेरा हमेशा से इस ओर झुकाव रहा है. आप मेरे प्रोग्राम्स भी अगर देखें तो मैंने हमेशा भ्रष्टाचार को अपने हास्य का विषय बनाया है. घोटालेबाज़ नेताओं पर कटाक्ष किए हैं. तो एक तरह से मैं हास्य के ज़रिए समाजसेवा तो पहले भी कर रहा था, लेकिन अब राजनीति में आकर पूरे समर्पण से ये काम करना चाहता हूं.
<bold>सवाल: आपकी छवि एक हास्य कलाकार की है. क्या आपको लगता है लोग आपको गंभीरता से ले पाएंगे?</bold>
जवाब: हां, लोगों को पता है कि हंसाना मेरा पेशा है. पहले भी कई कलाकार रहे हैं, जिन्होंने व्यवसाय किया. राजनीति में गए. तो एक वक्त के बाद लोग गंभीरता से लेने लगते हैं. एक ज़माना था जब मैं 50 रुपए में शो करता था. अब जबकि कानपुर ने और देश की जनता ने मुझे इतना कुछ दिया है तो अब उन्हें वापस करने का समय आ गया है.
<bold>सवाल: राजू आप अभी से नेता बन गए हैं. बिलकुल पॉलिटिकली करेक्ट बातें कर रहे हैं.</bold>
जवाब: नहीं मैं कोई योजना बनाकर जवाब नहीं दे रहा हूं. ये सब मेरे दिल की बातें हैं. मैंने भी कई मुश्किलों का सामना किया है, तो मैं लोगों का दर्द समझता हूं.
मज़ाक सबका उड़ाऊंगा
<bold>सवाल: क्या <link type="page"> <caption> टीवी या फिल्म कलाकारों<span > </caption> <url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2012/11/121108_siddhu_bigboss_election_campaign_pa.shtml" platform="highweb"/> </link>को ये आत्मविश्वास रहता है कि वो लोगों के बीच लोकप्रिय हैं तो राजनीति में आकर इस लोकप्रियता को आसानी से भुनाया जा सकता है?</bold>

जवाब: देखिए अज़हरुद्दीन हों, हेमा जी, शत्रुघ्न सिन्हा हों या सुनील दत्त हों ये लोग मशहूर रहे हैं तो ये उनका अपराध तो है नहीं. अगर ये अपनी लोकप्रियता का सहारा लेकर लोगों के किसी काम आ सकते हैं, अगर अपनी लोकप्रियता को सकारात्मक तरीके से समाज के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं तो इसमें बुरा क्या है.<bold/>
<bold>सवाल: क्या राजनीति में आकर आप स्टैंड अप कॉमेडी करना जारी रखेंगे?</bold>
जवाब: बिलकुल, इसी से तो मेरी पहचान है. मैं लोगों को हंसाना जारी रखूंगा. विपक्षी पार्टी के लोगों का भी मज़ाक उड़ाऊंगा और अपनी पार्टी के लोगों का भी.
कई पार्टी से ऑफर आए
<bold>सवाल: लेकिन राजनीति में आकर अपनी ही बिरादरी के लोगों का मज़ाक कैसे उड़ा पाएंगे?</bold>
जवाब: अरे मैडम. दुनिया बदल रही है. लोग खुल रहे हैं. अब नेता भी समझने लगे हैं. जैसे लालू यादव जी को ही लें. पहले शेखर सुमन उनका मज़ाक उड़ाते थे, फिर मैंने उड़ाया. तो कहीं ना कहीं उनकी लोकप्रियता में भी तो इज़ाफा हुआ ना. बल्कि अब तो कई नेता हमें अप्रोच करते हैं कि हमारा मज़ाक उड़ाओ ताकि हमारी भी टीआरपी बढ़े.
<bold>सवाल: आप पहले कांग्रेस के लिए चुनाव प्रचार कर चुके हैं. लेकिन आपने समाजवादी पार्टी ज्वाइन की. ऐसा क्यों?</bold>
जवाब: देखिए. तब मैं कलाकार था. मैंने मोदी जी के लिए भी कार्यक्रम किए हैं. मायावती जी के लिए भी और कांग्रेस के लिए भी. मैं आपको बता दूं कि मेरा ट्रैक रिकॉर्ड देखते हुए मुझे तकरीबन हर पार्टी से ऑफर आए. सबको पता है कि राजू सबको हंसाता है, रुलाता नहीं. पिछले लोकसभा चुनाव में भी मुझे ऑफर आया था, लेकिन तब मेरे पापा ने कहा था कि जो कर रहे हो अभी वही करते रहो. अपने प्रशंसकों को बांटो मत.
<bold>सवाल: एक आखिरी सवाल, गजोधर भैया राजनीति में आकर क्या करने वाला है?</bold>
जवाब: अब का बताएं भैया. का है कि हमरे कानपुर में बड़ी गंदगी है. नाली बजबजा रही हैं. सुअर लेटे हैं. मच्छर और धूल धक्कड़ बहुत है. बत्ती है नहीं. पंखा मुंह चिढ़ा रहा है. पंखा हमसे कह रहा है खिड़की खोलो. बाहर की हवा लगेगी तो हम चलेंगे. नल सूखे पड़े हैं. इतने बद्तमीज़ हो गए हैं कि महिलाओं को देखकर खाली सीटी बजाते हैं. अब जो है जनता है भैया,अब तुम्हारे हवाले राजू श्रीवास्तव साथियों.












