तीन साल में सबसे नीचे पहुंची मुद्रा स्फीति की दर

भारत में जनवरी महीने में मुद्रा स्फीति की दर पिछले तीन सालों के मुकाबले सबसे नीचे दर्ज की गई है.
इससे नीति निर्धारकों को अर्थव्यवस्था में आई मंदी से उबरने के लिए क़दम उठाने का मौक़ा मिल सकता है.
मंहगाई की दर को मापने का मुख्य पैमाना, थोक मूल्य सूचकांक के अनुसार मंहगाई की दर पिछले साल दिसंबर में 7.18 प्रतिशत से घटकर जनवरी महीने में 6.62 फीसदी पर आ गई.
भारत में निर्यात में आई कमी के बीच हाल ही में विकास दर में भी कमी आई है. निर्यात में आई कमी से निवेश और घरेलू मांग में भी गिरावट दर्ज की गई है.
उम्मीद
भारतीय रिज़र्व बैंक ने पिछले महीने ही ब्याज़ दर में कटौती की थी और माना जा रहा है कि महंगाई की दर में आई गिरावट से बैंक अपनी नीतियों में और ढील देगा.
एचडीएफसी बैंक में मुख्य अर्थशास्त्री अभीक बरुआ का कहना है, ''हम आने वाले दिनों में इसमे और गिरावट की उम्मीद कर रहे हैं और इसके लिए रिज़र्व बैंक को दरों में कटौती के कुछ और मौके मिल जाएंगे.''
बरुआ को उम्मीद है कि रिज़र्व बैंक मार्च और अप्रैल महीने में ब्याज़ दरों में और कटौती कर सकता है.
इसी महीने की शुरुआत में भारतीय सांख्यिकीय संगठन (सीएसओ) ने 2012-13 के वित्त वर्ष के दौरान सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में इजाफे की दर साल 2011-12 के 6.2 फीसदी की जगह 5 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया है.
सीएसओ का यह अनुमान हाल ही में जारी रिजर्व बैंक और सरकार के पूर्वानुमान से बहुत कम है
संगठन ने उत्पादन, कृषि और सेवा क्षेत्र में भारत के आर्थिक विकास की दर का दशक के सबसे निचले स्तर पर पहुंचने का अनुमान लगाया था.












