रिज़र्व बैंक की नीति से कर्जदार को राहत नहीं

अगर आप उम्मीद लगाए बैठे थे कि अक्तूबर में होने वाली मौद्रिक नीति समीक्षा के बाद आपकी ईएमआई (कर्ज लेने पर बैंको को चुकाई जाने वाली मासिक राशि) में कोई कमी आएगी तो आपको निश्चित तौर पर निराशा होगी.
<link type="page"> <caption> भारतीय रिजर्व बैंक</caption> <url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/business/2012/07/120731_rbi_creditpolicy_sm.shtml" platform="highweb"/> </link> (आरबीआई) ने मंगलवार को अपनी छमाही कर्ज नीति की घोषणा करते हुए ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं करने का फ़ैसला किया है.
रेपो रेट और रिवर्स रेपो रेट में किसी तरह की कटौती नहीं की गई है लेकिन सीआरआर या नक़द आरक्षित अनुपात में 0.25 फ़ीसदी की कटौती की गई है.
रेपो रेट आठ प्रतिशत और रिवर्स रेपो रेट सात प्रतिशत बना रहेगा.
रेपो रेट वह दर होती है, जिस पर केंद्रीय बैंक शेष बैंकों को अल्पावधि ऋण के रूप में दी गई रक़म पर ब्याज वसूल करता है, जबकि रिवर्स रेपो रेट वह दर होती है, जिस पर केंद्रीय बैंक शेष बैंकों को अल्पावधि ऋण के रूप में ली गई रक़म पर ब्याज अदा करता है.
लेकिन सीआरआर में एक चौथाई प्रतिशत की कटौती के कारण अब यह घटकर 4.25 फ़ीसदी हो जाएगा जो कि पहले 4.5 फ़ीसदी था.
ग़ौरतलब है कि बैंको को अपनी जमा का एक निश्चित अनुपात रिजर्व बैंक के पास रखना पड़ता है जिसे सीआरआर कहा जाता है.
रिज़र्व बैंक के गवर्नर सुब्बा रेड्डी ने इनकी घोषणा करते हुए कहा कि सीआरआर में कटौती से 17 हज़ार 500 करोड़ रूपए बाज़ार में आएंगे.
फ़ैसलों का असर
लेकिन कुछ अर्थशास्त्री रिजर्व बैंक के इन फ़ैसलों को दिखावा क़रार देते हैं.
जाने माने अर्थशास्त्री डॉक्टर भरत झुनझुनवाला ने बीबीसी से बातचीत के दौरान कहा, ''मूल समस्या ये है कि अर्थव्यवस्था में ऋण की मांग ही कम है. उसके ऊपर इन फ़ैसलों का प्रभाव कम पड़ेगा. ब्याज दर घटाने से अर्थव्यवस्था में गर्मी बढ़ती है लोग ज़्यादा पैसा ख़र्च करेंगे और मांग बढ़ेगी और रिजर्व बैंक की सोच है कि इससे महंगाई बढ़ेगी.''
डॉक्टर झुनझुनवाला के अनुसार बैंक के इन फ़ैसलों से आर्थिक विकास पर भी कोई सकारात्मक असर नहीं होगा. उनका कहना था, ''बैंकों के पास ऋण देने के लिए पर्याप्त मुद्रा उपलब्ध है. बैंकों के पास पैसे की कमी नहीं है. उनकी समस्या ये है कि जिन लोगों ने पैसे ले रखें है वे उसे लौटा नहीं पा रहे हैं. अगर आपकी तिजोरी में पहले से पैसे रखे हों और आप थोड़ा और रख लेंगे तो उसका कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा.''
लेकिन सबसे ज़्यादा चिंता की बात ये रही कि इसमें महंगाई दर के लिए अनुमान लगाया गया है कि वो सात फ़ीसदी से बढ़कर 7.5 फ़ीसदी हो जाएगी.
उसी तरह विकास दर का अनुमान 6.5 फ़ीसदी से घटकर 5.8 फ़ीसदी हो गया है.












