फ़तवे के बाद लड़कियों ने संगीत को तौबा कहा

भारत प्रशासित राज्य जम्मू कश्मीर के मुख्यमंत्री के समर्थन के बावजूद कश्मीर के लड़कियों के रॉक बैंड प्रगाश ने एक फ़तवे के बाद कोई भी शो न करने का फैसला किया है.
इस बैंड की सदस्य लड़कीयों को सोशल मीडिया पेज और उनके मोबाइल फ़ोनों पर बार बार मौत की भी धमकियाँ दी जा रही थीं.
लड़कियों का यह बैंड पिछले साल दिसंबर में उस समय चर्चा में आया, जब उन्होंने वहाँ की वार्षिक बैंड प्रतियोगिता ‘ बैटल ऑफ़ बैंड्स ’ में पहली बार भाग लिया. उसके बाद से उनके फ़ेस बुक अकाउंट पर घृणा भरे संदेशों का सिलसिला शुरू हो गया.
गज़ब की प्रतिभा
इन लड़कियों ने 'बैंड इन' नाम की संगीत अकादमी में प्रशिक्षण लिया था. इस अकादमी के मालिक अदनान मट्टू का मानना है कि इनमें गज़ब की प्रतिभा है. अदनान मट्टू कहते हैं "वह सिर्फ़ 15 साल की हैं और इस उम्र में उनको भला बुरा कहा जाना उचित नहीं है.इससे उन्हें काफी ठेस पहुँची है.वह रोई भी हैं लेकिन मैंने उन्हें मनाने की कोशिश कर उन्हें अपना संगीत जारी रखने के लिए कहा है."
इन लड़कियों की मुसीबतें उस समय और बढ़ गईं जब जम्मू कश्मीर के प्रमुख मुफ़्ती बशीरउद्दीन अहमद ने उनके गाने को ‘ग़ैर इस्लामी ’ करार दे दिया और उनसे कहा कि वह गाना छोड़ दें, क्यों कि इससे उन्हें समाज में कोई सकारात्मक भूमिका निभाने में कोई मदद नहीं मिलेगी.
तमाम विवाद के बढ़ जाने के बाद जम्मू कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अबदुल्ला ज़रूर उनके समर्थन में आगे आए हैं.
नोमा क्विट्स
लेकिन इसके बावजूद उनके फ़ेस बुक के पन्ने पर पहले संदेश आया, ‘नोमा क्विट्स.’ उसके तुरंत बाद दूसरा संदेश भी दिखाई दिया, ‘फ़राह क्विट्स ऑलसो.’
मुफ़्ती के अलावा सामाजिक धार्मिक संगठन जमाते इस्लामी ने भी इन लड़कियों का विरोध किया है. जमात के प्रवक्ता ज़ाहिद अली का कहना है कि शरियत कड़े तौर पर निर्लज्ज हरकतों के खिलाफ हैं खास तौर से पुरुषों की उपस्थति में महिलाओं का अश्लील नाच गाना तो कतई स्वीकार्य नहीं है.
इससे पहले हुर्रियत कांफ़्रेंस ने भी इन लड़कियों की यह कह कर आलोचना की थी कि वह पश्चिमी मूल्यों का अनुसरण कर रही हैं.












