सुप्रीम कोर्ट में करीब 65,000 मामले लंबित

भारत की सर्वोच्च अदालत में इस साल के नवंबर तक कुल 65,703 मामले लंबित थे.
इनमें से 6,445 मामले ऐसे थे जिनमें लोग पिछले पांच साल से ज्यादा समय से न्याय की गुहार लगा रहे थे.
सोमवार को राज्य सभा में विधि और न्याय मंत्री अश्विनी कुमार इस बारे में जानकारी दी.
इस मामले पर पूछे गए सवाल का लिखित जवाब देते हुए केंद्रीय मंत्री अश्विनी ने कहा, ''30 नवंबर 2012 तक कुल मिलाकर 65,703 मामले सुप्रीम कोर्ट में लंबित है.''
लंबित
उन्होंने जानकारी देते हुए कहा कि 22,133 मामले एक साल पुराने है. ऐसे में अगर इन मामलों को कुल मामलों की सूची से निकाल दिया जाए तो 30 नवंबर तक केवल 37, 230 मामले ही लंबित बचेंगे.
अश्विनी कुमार ने कहा कि 6,445 मामले ऐसे है जो पिछले पांच साल से ज्यादा समय से लंबित हैं और 31 दिसंबर 2011 तक 52,074 मामले हैं जो पांच साल से कम समय तक के लिए सुप्रीम कोर्ट में लटके हुए हैं.
उन्होंने राज्य सभा में इन मामलों के जल्द निपटारे के बारे में उठाए जा रहे कदमों के बारे में भी जानकारी दी.
उन्होंने कहा कि लंबे समय से लटके चले आ रहे मामलों के निपटारे लिए साल 2011 के जुलाई से दिसंबर महीने तक अभियान चलाया गया और समाज के हाशिए पर रहने वाले लोगों से जुड़े मामलों को हाई कोर्ट और इनके अधिकार क्षेत्र में आने वाली अदालतों में भेज दिया गया है.
उपाय
तेरहवें वित्तीय आयोग की सिफारिशों के अनुसार सरकार ने 5,000 करोड़ रुपए का अनुदान राज्य सरकारों को 2010 से 2015 तक के लिए दिया है ताकि वो लंबित मामलों के जल्द निपटारे के लिए काम कर सके.
इन लटके हुए मामलों को जल्द निपटाने की कोशिशों की मुहिम में अदालतों के काम के घंटे बढ़ाना, सुबह और शाम शिफ्ट पर काम, लोक अदालतों को सहयोग देना ताकि अदालतों पर कम बोझ पड़े और राज्य कानून प्राधिकरण को अतिरिक्त अनुदान देना शामिल है.
अदालत से बाहर भी विवादों के निपटारे के लिए एक वैकल्पिक विवाद प्रस्ताव तंत्र को बढ़ावा देने की बात कही गई है.
वहीं एक और सवाल का जवाब देते हुए मंत्री ने अदालतों में लंबित मामलों का मुख्य कारण, निपटारे से ज्यादा या बराबर संख्या में मामले दायर होना बताया.












