अस्पताल में पांच मौतों का कौन है ज़िम्मेदार?

दिल्ली सरकार के सुश्रुत ट्रॉमा सेंटर में कथित तौर पर ऑक्सीजन न मिलने से मंगलवार को चार लोगों की मौत हो गई थी. एक मरीज़ जो बच गया था उसकी भी बुधवार को मौत हो गई.
पुलिस ने लापरवाही की वजह से मौत का मामला दर्ज कर जांच शुरु कर दी है और अमित नाम के उस व्यक्ति को गिरफ्तार कर लिया है जो ऑक्सीजन की सप्लाई के लिए जिम्मेदार था.
लेकिन अस्पताल प्रशासन और ऑक्सीजन सप्लाई करने वाली कंपनी एक दूसरे को इन मौतों के लिए ज़िम्मेदार ठहरा रहे हैं.
पांचवीं मौत
बुधवार सुबह 65 वर्षीय विक्रम सिंह की मौत हो गई. उनके पुत्र ओमबीर सिंह ने बीबीसी से बात करते हुए कहा कि कल रात तक तो यही कहा जा रहा था कि उनके पिता ठीक हो रहे हैं.
उन्होंने कहा, ''कल तक उनकी हालत में सुधार हो रहा था लेकिन आज अचानक उनकी मौत हो गई.''
अस्पताल के अनुसार आईसीयू में भर्ती पांच मरीजों की हालत नाजुक थी. मंगलवार को जिन लोगों की मौत हुई थी उनमें दो महिलाएं और दो पुरुष शामिल हैं.
परिजनों का आरोप है कि ऑक्सीजन की कमी से ये मौतें हुई हैं और ज़िम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए.
अस्पताल में ऑक्सीजन सप्लाई का जिम्मा निजी कंपनी को दिया गया है.
कौन है ज़िम्मेदार?
अस्पताल प्रशासन का कहना है कि इसके लिए पीईएस इंस्टॉलेशन नाम की वो कंपनी ज़िम्मेदार है जो यहां ऑक्सीजन सप्लाई का काम देखती है.
ऑक्सीजन सप्लाई के लिए गैस प्लांट अस्पताल के अंदर ही बना है. यहीं से पूरे अस्पताल को ऑक्सीजन सप्लाई होती है.
वहीं कंपनी का कहना है कि इसके लिए डॉक्टर ज़िम्मेदार हैं और उन पर बेवजह दोष मढ़ा जा रहा है.
अस्पताल के अतिरिक्त मेडिकल सुपरिटेंडेंट डॉक्टर विकास रामपाल ने पुलिस से शिकायत की थी कि बुधवार सुबह दो बजे ऑक्सीजन की कमी देखी गई तो उन्होंने गैस प्लांट से संपर्क साधा लेकिन वहां पर किसी ने फोन नहीं उठाया.
फिर टेक्नीशियन वहां गया और वहां मौजूद कर्मचारी अमित से सप्लाई चालू करने को कहा जिसमें कुछ देर लग गई.
उन्होंने कहा कि अस्पताल की जांच में पाया गया कि यही व्यक्ति और इसकी देख-रेख करने वाली कंपनी चारों मौतों के लिए ज़िम्मेदार है.
इन आरोपों को ख़ारिज करते हुए पीईएस इंस्टॉलेशन के प्रबंध निदेशक ने कहा, ''डॉक्टरों की बजाय वो हम पर इल्ज़ाम लगा रहे हैं. ऑक्सीजन की वजह से कोई मरीज़ नहीं मर सकता.''
उन्होंने कहा, ''अगर ऑक्सीज़न न भी हो तो भी कई तरीके होते हैं. डॉक्टर काफ़ी कुछ कर सकते थे, वेंटीलेशन कर सकते थे.''
उन्होंने कहा कि कंपनी का अस्पताल के साथ एएमसी यानी मशीनों की देखरेख का करार कई महीने पहले समाप्त हो चुका है.
जांच
इस बीच दिल्ली सरकार ने मामले की जांच के आदेश दिए हैं. उसने पूरे मामले की जांच के लिए कमेटी बनाई है.
विशेष स्वास्थ्य सचिव एसबी शशांक की अगुवाई में समिति इस बात की जांच करेगी कि इस घटना के लिए कौन जिम्मेदार है.
कमेटी को तीन दिन में जांच रिपोर्ट सौंपने के लिए कहा गया है.












