पैगंबर विरोधी वीडियो भारत में नहीं दिखेगा

भारतीय विदेश मंत्रालय ने कहा है कि यूट्यूब ने उस वीडियो को अवरुद्ध कर दिया है जिसमें मुस्लिमों के पैगंबर मोहम्मद के ख़िलाफ़ आपत्तिजनक बातें कही गईं थीं.
यानी अब ये वीडियो भारत में यूट्यूब पर नही देखे जा सकेंगे.
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता सैयद अकबरूद्दीन ने एक सवाल के जवाब में कहा, "गूगल इंडिया ने, भारतीय क़ानून का पालन करते हुए, अपमानजनक सामग्री को अवरुद्ध कर दिया है."
सैयद अकबरूद्दीन ने कहा, "हाल की घटनाओं के संदर्भ में हम दोहराना चाहते हैं कि भारत उन सभी कृत्यों की निंदा करता है जिसमें धार्मिक विश्वास और भावनाओं को ठेस पहुंचती हो. भारतीय विदेश मंत्रालय इस मामले में अमरीका से संपर्क बनाए हुए है."
ग़ुज़ारिश को ठुकराया
इधर समाचार एजेंसी एपी का कहना है कि गूगल ने अमरीका की उस गुजारिश को ठुकरा दिया है जिसमें यूट्यूब से मुस्लिम-विरोधी वीडियो क्लिप को हटाने की बात कही गई थी. हालांकि कंपनी ने कुछ मुल्कों में इसे अवरूद्ध करने की बात कही है.
व्हाईट हाउस ने शुक्रवार को कहा था कि उसने यूट्यूब से कहा है कि वो इस बात की समीक्षा करे कि वीडियो कंपनी की नीतियों के ख़िलाफ़ तो नहीं है.
इसके जवाब ने कंपनी ने कहा है कि ये वीडियो आसानी से वेबसाइटों पर उबलब्ध है और इसका प्रयोग हमारे दिशानिर्देशों के भीतर है इसलिए वीडियो यूट्यूब पर मौजूद रहेगा.
हालांकि एपी ने यूट्यूब के हवाले से कहा है कि वीडियो को लीबिया, मिस्र, भारत और इंडोनेशिया में अवरूद्ध कर दिया जाएगा.
'इनोसेंस ऑफ़ मुस्लिम' नाम की इस लघू फ़िल्म में इस्लाम धर्म और मुसलमानों के आख़िरी पैगंबर मोहम्मद के ख़िलाफ़ आपत्तिजनक बातें कही गईं हैं.
प्रदर्शन
समाचार एजेंसी का कहना है कि वीडियो मध्य-पूर्व में अमरीकी दूतावासों पर हुए विरोध और प्रदर्शनों की वजह बने हैं और कई जगहों पर हिंसा की वारदातें भी हुई हैं.
मिस्र के क़ाहिरा से शुरू हुए विरोध-प्रदर्शन धीरे-धीरे मध्य-पूर्व और फिर दक्षिण एशिया और दूसरे मुल्कों में भी फैल गए हैं.
लीबिया के बेनग़ाज़ी में अमरीकी राजूदत और तीन अन्य लोगों की इसी तरह के एक हमले में मौत हो गई थी. हालांकि फ़िलहाल ये जांच जारी है कि ये हमला कहीं चरमपंथी गुटों का कारनामा तो नहीं था.












