
कंपनियों को रेडिएशन का मौजूदा स्तर घटाकर इसे 90 फीसदी तक कम करना होगा.
मोबाइल फ़ोन टावरों से निकलने वाले क्लिक करें रेडिएशन का खतरा कम करने के लिए एक सितंबर से क्लिक करें मोबाइल कंपनियों को विकिरण का स्तर 90 फीसदी तक कम करना होगा.
सरकार का कहना है कि इससे मोबाइल टावरों से निकलने वाली विकिरणों से आम लोगों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर संबंधी चिंताएं दूर होंगी. इसके अलावा कंपनियों को अब इस बात का ख्याल रखना होगा कि उनके टावर के आसपास कोई घर या मकान न हो.
कॉल-ड्रॉप की समस्या?
साथ ही मोबाइल कंपनियों को ज़्यादा विकिरण पैदा करने वाले क्लिक करें हैंडसेट बनाने भी बंद करने होंगे. हालांकि जानकारों का कहना है कि इन दिशा-निर्देशों का असर मोबाइल नेटवर्क पर भी पड़ सकता है. रेडिएशन घटाने के लिए टावर कंपनियों को सिग्नल कमजोर करने होंगे, जिससे बातचीत के दौरान फ़ोन लगातार कटने जैसी समस्याएं सामने आ सकती हैं.
इससे पहले शुक्रवार को संचार, सूचना और प्रौद्योगिक मंत्री कपिल सिब्बल ने नए दिशा-निर्देश जारी करते हुए कहा था कि क्लिक करें तकनीक को आगे बढ़ाने का मतलब यह नहीं है कि आम जनता के क्लिक करें स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ हो. अत्यधिक रेडिएशन वाले मोबाइल हैंडसेटों का उत्पादन 31 अगस्त, 2013 तक बंद करने की बात कही गई है.
नए दिशा-निर्देशों के मुताबिक रिहाइशी इलाकों और घरों पर लगने वाले टॉवरों की निगरानी टेलिकॉम इन्फोर्समेंट रिसोर्स ऐंड मॉनीटरिंग (टीईआरएम) नामक संस्था करेगी. नीतियों का पालन नहीं करने वाली कंपनियों के खिलाफ भारी आर्थिक जुर्माना लगाने का प्रावधान किया गया है.
शनिवार से लागू हो रहे इन दिशो-निर्देशों के बाद भारत विश्व के उन चुनिंदा 10 फीसदी देशों में शामिल होगा जहां विकिरण का खतरा कम करने के लिए रेडिएशन में 90 फीसदी तक कमी की गई है.








