24 घंटों बाद अंतिम संस्कार हो सका दलित महिला का

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- Author, मणिकांत ठाकुर
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता, पटना
बिहार के औरंगाबाद जिले में कथित ऊंची जातियों के उकसावे पर विरोध प्रदर्शन के कारण एक दलित महिला के शव का अंतिम संस्कार 24 घंटों तक नहीं हो सका.
बाद में पुलिस के हस्तक्षेप से उसी शमशान-घाट पर इस महिला का दाह-संस्कार किया गया जहाँ विवाद के कारण दो गांवों के बीच भारी तनाव उत्पन्न हो गया था.
औरंगाबाद ज़िले के अम्बा पुलिस थाना क्षेत्र में भटबीघा गाँव की विधवा अनरवा कुंअर की मौत शनिवार शाम हुई थी.
भटबीघा के दलित लोग जब उनके शव को जलाने के लिए पास के ही लखिया गाँव से जुड़े शमशान-घाट पर पहुंचे तो लखिया गाँव के दलितों ने इसका विरोध किया.
विरोध और उकसावा
अम्बा पुलिस स्टेशन के दारोगा पंकज कुमार ने बीबीसी को बताया कि दोनों गांवों के ऊंची जातियों के लोग दलितों को आपस में लड़ाना चाहते थे.
उन्होंने बताया कि इसी उकसावे के कारण लखिया गाँव के दलितों ने भटबीघा के दलितों से कहा कि इस शमशान-घाट पर जब वे अपने मृत परिजनों के भी शव नहीं जलाते हैं तो दूसरों को कैसे जलाने देंगे?
पुलिस के अनुसार, भटबीघा के भी दलितों को उनके सवर्ण ग्रामीणों ने भड़का दिया था कि किसी भी हालात में लखिया वाले शमशान-घाट पर ही दाह संस्कार किया जाए.
इसी विवाद के कारण तनाव पैदा हो गया और वृद्ध दलित महिला का मृत शरीर 24 घंटों तक बिना दाह-संस्कार के पड़ा रहा.
एक ग्रामीण के अनुसार स्थानीय पुलिस ने बहुत देर बाद तब सख्त़ी दिखाई, जब सीधे-टकराव जैसे हालात पैदा हो गए.
रविवार रात आठ बजे उस महिला के शव का अंतिम संस्कार संभव हो सका.
औरंगाबाद के ज़िलाधिकारी ने गाँव के लोगों को ख़बर भिजवाई है कि इस मसले के स्थाई हल के लिए प्रशासन और ग्रामीणों की बैठक होगी.












