कौन हैं जगनमोहन रेड्डी?

 रेड्डी
इमेज कैप्शन, जब से मुख्यमंत्री वाईएस राजशेखर रेड्डी का एक हवाई दुर्घटना में निधन हुआ, जगन सब के ध्यान का केंद्र बने हुए हैं.
    • Author, उमर फ़ारूक़
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता, हैदराबाद

गत लगभग ढाई वर्ष से आंध्र प्रदेश की पूरी राजनीति केवल एक व्यक्ति के इर्द-गिर्द घूम रही है और वो है वाईएस जगमोहन रेड्डी. जब से मुख्यमंत्री वाई एस राजशेखर रेड्डी का सितम्बर 2009 में एक हवाई दुर्घटना में निधन हुआ, जगन सबके ध्यान का केंद्र बने हुए हैं.

पिता की जगह खुद मुख्यमंत्री बनने का दावा करने से लेकर अब तक जगमोहन रेड्डी ने काफी लंबा राजनीतिक सफर तय किया है जिसमें वो न केवल पूरी तरह से कांग्रेस के विरोधी बन गए हैं बल्कि उन्होंने खुद अपनी अलग पार्टी वाईएसआर कांग्रेस भी बना ली है.

उसके टिकट पर वो खुद लोक सभा के लिए चुने गए और उन्होंने बहुत ही कम समय में वाईएसआर कांग्रेस को कांग्रेस की मुख्य विरोधी पार्टी बना दिया है.

दूसरी और उनकी बगावत ने कांग्रेस को आंध्र प्रदेश के सुरक्षित किले में काफी कमजोर कर दिया है और कांग्रेस लगातार राज्य पर अपनी पकड़ खोती जा रही है.

कांग्रेस से दूरी के साथ साथ खुद जगनमोहन रेड्डी के लिए काफी कानूनी समस्याएँ भी खड़ी हो गई हैं और अब वो गिरफ्तारी का सामना कर रहे हैं.

संपत्ति में बढ़ोतरी

आंध्र प्रदेश उच्य न्यायालय के आदेश पर केन्द्रीय जांच ब्यूरो और एन्फोर्समेंट निदेशालय इस बात की छानबीन कर रहे हैं कि किस तरह जगनमोहन रेड्डी की संपत्ति पांच वर्ष से भी कम समय में 24 करोड़ रुपये से 470 करोड़ रूपए तक पहुंच गई और उनकी कई कंपनियों में पूँजी कहाँ से और कैसे आई.

साथ ही यह सवाल भी सबके ध्यान का केंद्र है कि आखिर जगनमोहन रेड्डी और वाईएसआर परिवार कौन है और वो आंध्र प्रदेश की राजनीति में इतने महत्वपूर्ण क्यों बन गए हैं.

जगन के व्यक्तित्व और उनके महत्व को समझने के लिए उनके पिता वाई एस राजशेखर रेड्डी को समझना बहुत ज़रूरी है.

साल 1970 के दश्क से लगातार कांग्रेस के साथ रहे वाईएसआर कई बार विधानसभा और लोक सभा के लिए चुने गए. कडप्पा जिले से संबंध रखने वाले वाईएसआर रायल सीमा क्षेत्र के शक्तिशाली गुटबाज नेता थे जिन से उन के सभी विरोधी डरते थे.

शक्तिशाली नेता

जब राज्य में कांग्रेस तेलुगु देसम से लगातार हार रही थी, कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी ने वाईएसआर को प्रदेश कांग्रेस का अध्यक्ष बनाया. हालाँकि 1999 के विधान सभा चुनाव में वो कांग्रेस को जीत नहीं दिला सके लेकिन वो एक शक्तिशाली विपक्ष नेता साबित हुए.

साल 2003 में वाईएसआर और कांग्रेस की किस्मत ने पलटी खाई जब उन्होंने किसानों के समर्थन में कड़ी गर्मी में पूरे राज्य में 1600 किलोमीटर तक पदयात्रा की और किसानों और ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों के लिए एक हीरो बन गए.

साल 2004 के चुनाव में इस नारे के साथ उन्होंने राज्य में कांग्रेस को सत्ता में पहुंचाया कि उनकी सरकार किसानों को मुफ्त बिजली देगी और उनके ऋण माफ करेगी.

साथ ही वो राष्ट्रीय स्तर पर भी कांग्रेस के लिए बहुत अहम नेता बन गए क्योंकि कांग्रेस ने आंध्र प्रदेश से 27 लोक सभा सीटें जीतीं और कांग्रेस के नेतृत्व में यूपीए की सरकार बनाने में एक अहम भूमिका निभाई.

अगले पांच वर्षों तक बिना किसी चुनाव का सामना किए अपनी सरकार चलाने वाले वाईएसआर की शक्ति लगतार बढती गई.

भ्रष्टाचार के आरोप

हालाँकि विपक्षी दल उन पर बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार के आरोप लगा रहे थे और कह रहे थे कि उनका परिवार भ्रष्टाचार और सत्ता के दुरूपयोग द्वारा करोड़ों की संपत्ति लूट रहा था लेकिन कांग्रेस के राष्ट्रीय नेतृत्व ने उनका समर्थन जारी रखा.

विपक्ष और विशेषकर तेलगु देसम ने यहाँ तक कहना शुरू कर दिया की कांग्रेस आला कमान केवल इसलिए वाईएसआर का समर्थन कर रही है क्योंकि वो अपनी भ्रष्ट कमाई का एक हिस्सा केंद्र के नेताओं के साथ बाँट रहे हैं.

विपक्ष का कहना था कि वाईएसआर परिवार और उनके दूसरे समर्थक सिंचाई परियोजनाओं के कार्यक्रम की आड़ में हजारो करोड़ रुपये कमा रहे हैं. इसी तरह औद्योगिक कंपनियों को भूमि आबंटन करने और खनन की अनुमति देने के मामले में भी वाईएसआर पर बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार के आरोप लगे.

इस बीच वाईएसआर ने अपने इकलौते पुत्र जगन को अपना राजनैतिक वारिस बनाने की तैयारियाँ शुरू कर दीं. अगले विधान सभा और लोक सभा चुनाव के आते आते वाईएस की स्थिति इतनी मज़बूत हो गई थी कि पार्टी के अधिकतर टिकट उन्हीं के समर्थकों को मिले.

जगनमोहन रेड्डी को कांग्रेस ने कडप्पा लोक सभा सीट के लिए अपना उम्मीदवार बनाया. उस समय उन्होंने अपनी जो संपत्ति घोषित की वो 24 करोड़ थी. इस पर विपक्ष ने सवाल उठाया कि उन के पास इतना पैसा कहाँ से आया.

वाईएसआर ने इस के जवाब में कहा कि उनके पुत्र उद्योगपति हैं और वो एक सीमेट और एक बिजली बनाने वाली कंपनी के मालिक हैं.

समाचार पत्र

साल 2008 में जगनमोहन रेड्डी के प्रभाव में और भी वृद्धि हुई जबकि उन्होंने एक बहुत बड़ा तेलुगु दैनिक समाचार पत्र साक्षी शुरू किया. तेइस एडिशन पर आधारित यह समाचार पत्र शुरू करने के लिए कई सौ करोड़ रुपये की पूँजी लगे गई.

बाद में यह बात सामने आई कि आंध्र प्रदेश की कई ऐसी कंपनियों ने इसमें पैसा लगाया था जिन्हें वाईएसआर सरकार के कई फैसलों से लाभ मिला था.

इसके अलावा वाईएसआर सरकार ने इस अखबार को दिल खोल कर सरकारी विज्ञापन देने शुरू किये और पहले एक वर्ष में ही उसे 80 करोड़ रुपये के विज्ञापन मिले.

साल 2009 में मीडिया में जगन की ताकत और भी बढ़ी जब उन्होंने 'साक्षी' के नाम से एक टीवी चैनल शुरू किया और एक बार फिर विपक्ष ने आरोप लगाया की यह चैनल भ्रष्ट पैसे से शुरू किया गया है.

साथ ही जगन की कंपनियों की संख्या और उनमें पूँजी निवेश भी बढ़ता चला गया.

साल 2009 के चुनाव हैरान करने वाले रहे. जहाँ कांग्रेस को सबसे ज्यादा यानी 33 लोक सभा सीटें आंध्र प्रदेश में मिलीं वहीं विधान सभा चुनाव में पार्टी का प्रदर्शन बहुत खराब रहा. उसे मुश्किल से एक साधारण बहुमत मिल सका.

अभी दूसरे कार्यकाल के लिए वाईएसआर अपनी स्थिति बेहतर बनाने की कोशिश कर ही रहे थे कि एक हेलीकाप्टर दुर्घटना में उनकी मृत्यु हो गई.

जानकारों का कहना है की वाईएसआर के समर्थकों और कई कम्पनियों के मालिकों ने इसलिए जगनमोहन रेड्डी को पिता की जगह मुख्यमंत्री बनाने की कोशिश की थी कि वाईएसआर सरकार की अनियमताएं सामने न आ सकें और उन के समर्थकों को फायदा मिलता रहे.

बगावत की स्थिति

उस समय तक आंध्र प्रदेश में कांग्रेस सरकार पर वाईएसआर परिवार की पकड़ इतनी मज़बूत हो गई थी की 177 में से 170 विधायकों ने जगन के समर्थन की घोषणा कर दी और पार्टी में बगावत की स्थिति पैदा हो गई.

लेकिन कांग्रेस आलाकमान ने वाईएसआर परिवार की इस शक्ति से परेशान हो कर जगन की बात मानने से इंकार कर दिया और उन की जगह एक वरिष्ठ नेता के रोसैय्या को मुख्यमंत्री बनाया.

इस बीच जगन और उनके समर्थकों की गतिविधियां बढती गईं और यह स्पष्ट हो गया कि रोसैय्या कांग्रेस को संभाल नहीं सकेंगे. साल 2010 के अंत में कांग्रेस ने एक युवा रेड्डी नेता - एन किरण कुमार रेड्डी को मुख्यमंत्री बनाया.

इसके साथ ही जगन और उनकी माँ ने कांग्रेस से त्याग पत्र दे दिया और वो स्वतंत्र प्रत्याशी के रूप में कडप्पा लोक सभा और पुलिवेंदुला विधान सभा सीट से चुने गए.

कानूनी मुश्किलें

जैसे जैसे जगन की राजनैतिक शक्ति बढ़ रही थी वैसे वैसे उनके लिए कानूनी मुश्किलें बढ़ने लगीं. लेकिन इसमें सरकार या कांग्रेस के नेतृ्त्व से ज्यादा न्यायपालिका का दखल था.

कांग्रेस के ही एक मंत्री शंकर राव और तेलुगु देसम के दो नेताओं की एक याचिका पर आंध्र प्रदेश उच्य न्यालय ने सीबीआई को जगनमोहन रेड्डी की संपत्ति की छानबीन का आदेश दिया और उसी के परिणाम स्वरुप इस समय जगनमोहन रेड्डी की गिरफ्तारी का सामना है.

लेकिन इससे जितना नुक्सान जगन को हो सकता है उतना ही नुकसान कांग्रेस को भी हुआ है क्योंकि अब वाईएसआर की छवि "गरीबों के मसीहा" से ज्यादा एक भ्रष्ट नेता की है जिसने अपने परिवार के फायदे के लिए राज्य के साधनों का दुरुपयोग किया.

साथ ही यह सवाल भी उठ रहा है कि जब वाईएसआर यह सब कुछ कर रहे थे तो कांग्रेस की आलाकमान क्या कर रही थी.

जगन के साथ साथ कांग्रेस सरकार के कई मंत्रियों को भी कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड रहा है. इन में से एम वेंकट रमन्ना को गिरफ्तार कर लिया गया है.