केंद्र बँटवारे को लटकाना चाहता है: मायावती

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- Author, रामदत्त त्रिपाठी
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता, लखनऊ
मायावती ने केंद्र के उस पत्र पर कड़ी आपत्ति जताई है जिसमें विभाजन के उनके प्रस्ताव पर कई स्पष्टीकरण मांगे गए हैं.
उन्होंने केंद्र सरकार पर विभाजन के मुद्दे को लटकाए रखने का आरोप लगाया है.
मायावती सरकार ने गत 21 नवंबर को विधान सभा में भारी हंगामे के बीच बिना चर्चा यह प्रस्ताव पारित कर दिया था कि उत्तर प्रदेश का चार राज्यों अवध , बुंदेलखंड , पूर्वांचल और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में बंटवारा होना चाहिए.
राज्य सरकार ने इस आशय का एक लाइन का प्रस्ताव केंद्र सरकार को आगे की कार्यवाही के लिए भेजा था.
विपक्ष का आरोप है कि मायावती अपनी सरकार के भ्रष्टाचार से ध्यान हटाने के लिए राज्य के विभाजन का मुद्दा उठा रही हैं और ये उनका चुनावी शिगूफ़ा है.
गेंद फिर केंद्र के पाले में
केंद्र सरकार की ओर से केंद्रीय गृह सचिव ने सोमवार को कहा था कि उत्तर प्रदेश सरकार के प्रस्ताव पर आगे बढ़ने के लिए कुछ और जानकारियाँ मांगी गई हैं.
केंद्र सरकार ने मुख्य रूप से यह पूछा था कि प्रस्तावित चारों राज्यों की सीमाएं क्या होंगी? उनकी राजधानियाँ कहाँ-कहाँ होंगी? राज्य के पूर्व कर्मचारियों को दी जा रही पेंशन का बँटवारा किस तरह होगा और राज्य पर जो कर्ज़ बकाया है उसको चुकाने का फ़ार्मूला क्या होगा?
लखनऊ में एक प्रेस कांफ्रेंस करके मायावती ने गेंद फिर से केंद्र के पाले में डालते हुए कहा, “संविधान के अनुसार राज्य के पुनर्गठन का क़ानून संसद में ही पारित किया जाता है. राज्य सरकार की इसमें कोई संवैधानिक भूमिका नहीं होती."
उन्होंने केंद्र सरकार को याद दिलाया कि संसद में विधेयक पेश होने से पहले राष्ट्रपति उसे संबंधित राज्य की विधानसभा की राय जाने के लिए भेजते हैं.
मायावती ने कहा कि उन्होंने इस संबंध में केंद्र सरकार को कई पत्र भेजे थे लेकिन जब कोई कार्रवाई नहीं की गई, तब विधानसभा में प्रस्ताव पारित किया गया.
उन्होंने याद दिलाया कि उत्तरांचल राज्य के गठन के लिए भी यह प्रक्रिया अपनाई गई थी.
मायावती ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार उत्तर प्रदेश के पुनर्गठन के प्रस्ताव पर तेज़ी से कार्रवाई करने की बजाय आपत्तियां लगाकर उसे लंबित रखना चाहती है.
'ध्यान बँटाने के लिए'
दूसरी ओर विपक्षी समाजवादी पार्टी के नेता एवं पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव ने कहा है, “ मायावती सरकार भ्रष्टाचार में डूबी हुई है और वे चुनाव में जनता का ध्यान बंटाने के लिए उत्तर प्रदेश के विभाजन का मुद्दा उठा रही हैं.”
उत्तर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष रीता जोशी ने मायावती पर पलटवार करते हुए कहा कि वास्तव में वह संविधान का उल्लंघन कर रही हैं.
रीता जोशी ने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार के बिना बहस कराए उत्तर प्रदेश के विभाजन के लिए एक लाइन का प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा है जो उचित नहीं है.
उनका कहना था कि राज्यों का विभाजन इस तरह नहीं होता.
इससे पहले भी विपक्ष ने इसे चुनावी शिगूफ़ा कहा था.












