'शाही शादी' में जुटे पुराने रजवाड़े

- Author, नारायण बारेठ
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता, जयपुर
भारत के पूर्व राजघरानों में से एक जोधपुर के गजसिंह के पुत्र शिवराज सिंह के विवाह के लिए जयपुर में देश भर के पूर्व राजपरिवार जमा हुए हैं.
इस शादी में शिरकत करने के लिए नेपाल और भूटान के शाही परिवारों के सदस्य भी जयपुर पहुँच चुके हैं.
जोधपुर के पूर्व राजघराने के शिवराज सिंह गुरुवार की शाम शाही रस्मो रिवाज़ के साथ उतराखंड के अस्कोट के पूर्व राजघराने की गायत्री कुमारी के साथ परिणय सूत्र में बंधेंगे.
<link type="page"><caption> 'शाही शादी' की तस्वीरें देखिए</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/multimedia/2010/11/101118_gallery_royal_vv.shtml" platform="highweb"/></link>
शिवराज सिंह बारात लेकर जोधपुर से जयपुर से पहुँच चुके हैं.
इससे पहले जोधपुर के 'उम्मेद पैलेस' से शिवराज सिंह की बारात निकासी पुरानी रोल्य रॉयस कार में हुई.
जयपुर में वो शाही बग्धी में बैठेंगे जिसमें कभी उनके पिता गजसिंह अपनी बारात लेकर चले थे.
अंग्रेज़ों के आने पहले तक ये राजघरानों का देश के अलग-अलग हिस्सों में शासन था और अंग्रेज़ों के शासनकाल में भी उनकी मान्यता बनी रही.
लेकिन आज़ादी के बाद इन राज्यों का भारत में विलय कर लिया गया था.
बहुत समय तक उन्हें सरकार की ओर से भत्ता मिलता था जिसे प्रीविपर्स कहा जाता था लेकिन इंदिरा गांधी ने वर्ष 1971 में प्रीविपर्स भी ख़त्म कर दिया था.
पुराने रजवाड़ों का जमावड़ा

पूर्व राजघरानों से जुड़े पृथ्वी सिंह खंडेला ने बताया कि इस शादी में भारत के पूर्व राजघरानों के सदस्य भाग लेने पहुँच चुके हैं.
इनमे ग्वालियर, बड़ौदा, कश्मीर, पूंछ, पटियाला, त्रिपुरा और जैसलमेर शामिल हैं.
बारात में शामिल क़रीब तीन सौ लोग जब निकासी में शाही परिधान में सजे-धजे निकले तो गुज़रे ज़माने का दौर जीवंत हो उठा.
जोधपुर के पूर्व राजा गजसिंह राज्य सभा के सदस्य रह चुके हैं और उनकी बहन चंद्रेश कुमारी अभी जोधपुर से कांग्रेस की सांसद हैं.
शिवराज पोलो खिलाड़ी रहे हैं और कुछ साल पहले वो पोलो खेलते हुए घोड़े से गिर कर घायल हो गए. उन्हें गंभीर चोटें आईं थीं. परिजनों के मुताबिक़ अब वो स्वस्थ हैं. जोधपुर के पूर्व राजपरिवार में कोई 37 साल बाद ऐसे वैवाहिक उत्सव की बेला आई है. इससे पहले ऐसा मांगलिक उत्सव तब हुआ था जब गज सिंह पूंछ की राजकुमारी हेमलता राजे से परिणय सूत्र में बंधे थे.
जयपुर के रामबाग़ पैलस में अभी ऐसा नज़ारा है कि गोया भारत का पुराना रियासती युग लौट आया हो.












