अनिल दुजाना: 18 मर्डर, कोर्ट में सगाई, बेल पर शादी, कहानी पश्चिमी यूपी के गैंगस्टर की

    • Author, प्रियंका झा
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता

उत्तर प्रदेश पुलिस की स्पेशल टास्क फ़ोर्स (एसटीएफ़) ने गैंगस्टर अनिल दुजाना उर्फ़ अनिल नागर को मेरठ में हुई मुठभेड़ के दौरान मारने का दावा किया है.

यूपी एसटीएफ़ के एडीजी अमिताभ यश ने कहा, "वांछित अपराधी अनिल दुजाना को हमारी टीम ने गुरुवार दोपहर मेरठ के एक गाँव में घेरा. दुजाना ने भागने के इरादे से हमारी टीम पर गोली चलाई और जवाबी फ़ायरिंग में वो मारा गया."

यूपी पुलिस के एडीजी लॉ एंड ऑर्डर प्रशांत कुमार ने मीडिया को बताया, "एसटीएफ़ और बदमाशों के बीच मुठभेड़ हुई. इस मुठभेड़ में गैंगस्टर अनिल दुजाना घायल हुआ. बाद में उसकी मृत्यु हो गई. वह चार पहिया गाड़ी में यात्रा कर रहा था. उसके पास से दो पिस्तौल और भारी मात्रा में कारतूस बरामद हुए हैं."

पश्चिमी यूपी के बड़े गैंगस्टरों में से एक माना जाने वाला अनिल दुजाना हफ़्ते भर पहले ही जेल से बाहर आया था.

यूपी के गौतम बुद्ध नगर ज़िले के तहत आने वाले दुजाना गांव का रहने वाले अनिल दुजाना पर हत्या, लूट, जबरन वसूली, ज़मीन पर क़ब्ज़ा जैसे संगीन आरोपों में कुल 65 मुक़दमे दर्ज थे.

दुजाना पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (रासुका), आर्म्स और गैंगस्टर एक्ट के तहत भी केस दर्ज किए गए थे.

माना जाता है कि अनिल दुजाना का ख़ौफ़ दिल्ली-एनसीआर में भी फैला था. यूपी पुलिस ने दुजाना के सिर पर इनाम रखा था.

अनिल दुजाना की कुख्यात माफ़िया सुंदर भाटी और उसके गैंग से रंज़िश रही है.

इस रंज़िश में यूं तो अब तक कई हत्याएं हो चुकी हैं, लेकिन जब अनिल दुजाना ने अपराध की दुनिया में क़दम रखा था तो उस समय ये दोनों साथ काम कर रहे थे.

दोस्त कैसे बन गए दुश्मन?

पश्चिमी यूपी में गैंगवॉर की शुरुआत महेंद्र फ़ौजी और सतबीर गुर्जर की दुश्मनी से हुई थी. दोनों 1990 के दशक में एनकाउंटर में मारे गए थे.

इसके बाद सतबीर गुर्जर के ही दो सहयोगी नरेश भाटी और सुंदर भाटी की गैंगवॉर ख़ूब चर्चा में रहने लगी.

साल 2000 से पहले अनिल दुजाना सुंदर भाटी के लिए अवैध सरिये का कारोबार करता था.

इस कारोबार से जो भी कमाई होती, उसका कुछ हिस्सा वो सुंदर भाटी को देता.

उस समय अनिल दुजाना उतना चर्चित नाम नहीं था. दुजाना ने अपना वर्चस्व बढ़ाने के लिए सुंदर भाटी के नाम का सहारा लिया और धीरे-धीरे उसका भी नाम होने लगा.

हालांकि, ये सब बहुत लंबे समय तक नहीं चल सका. अवैध सरिये के कारोबार को लेकर ही अनिल दुजाना और सुंदर भाटी के बीच अनबन शुरू हो गई और फिर दोनों अलग हो गए.

इस बीच अनिल दुजाना का झुकाव रणदीप भाटी के गैंग की तरफ़ होने लगा.

इसके बाद दुजाना ने शौक़िया तौर पर नरेश भाटी के गैंग के साथ मिल कर लूटपाट, अमीरों और कारोबारी वर्ग के लोगों से रंगदारी वसूलने का काम शुरू कर दिया.

यूपी एसटीएफ़ की ओर से जारी एक बयान में ये भी बताया गया है कि अनिल दुजाना ने अपराध में सक्रिय होते ही अपने साथियों के साथ भाड़े पर हत्याएं करना भी शुरू कर दिया था.

सुंदर भाटी गैंग से पुरानी रंज़िश

साल 2004 की बात है, जब सुंदर भाटी गैंग ने नरेश भाटी की हत्या कर दी थी.

यूपी एसटीएफ़ के अनुसार, अगले ही साल यानी 2005 में नरेश भाटी की हत्या का बदला लेने के लिए उनके छोटे भाई रणपाल भाटी ने सुंदर भाटी के भतीजे लाला फ़ौजी की हत्या कर दी.

साल 2006 में रणपाल भाटी को भी यूपी पुलिस ने मुठभेड़ में मारने का दावा किया. इसके बाद नरेश भाटी गैंग की कमान उनके छोटे भाई रणदीप भाटी और भांजे अमित कसाना ने संभाल ली. दोनों ने नए सिरे से गैंग बनाया और फिर से काम शुरू किया.

इसी दौरान अनिल दुजाना भी गैंग में शामिल हो गया. तभी से अनिल दुजाना और सुंदर भाटी गैंग के बीच गैंगवॉर चली आ रही थी.

साल 2011 में सुंदर भाटी को मारने के लिए उनके भांजे की शादी में ही रणदीप भाटी और अमित कसाना ने अनिल दुजाना के साथ मिल कर एक-47 से ताबड़तोड़ गोलियां बरसाईं.

हालांकि, उस समय सुंदर भाटी बच निका, लेकिन इस हमले में तीन लोगों की मौत हो गई.

सुंदर भाटी को मारने के लिए बरसाई गई गोलियों से जो मौतें हुईं, उसी मामले में साल 2012 में अनिल दुजाना को पुलिस ने पकड़ा और बाद में जेल भेजा गया.

अदावत का ये सिलसिला चलता रहा.

साल 2014 में सुंदर भाटी ने अपने ऊपर हुए हमले का बदला लिया और अनिल दुजाना के भाई की हत्या कर दी.

21 साल पहले दर्ज हुआ हत्या का पहला केस

साल 2002 में गाज़ियाबाद के कविनगर में हरबीर पहलवान की हत्या हुई थी.

यहीं से अनिल दुजाना की अपराध की कहानियां शुरू होती हैं.

ये पहली घटना थी जिसमें दुजाना के ख़िलाफ़ हत्या का केस दर्ज किया गया.

धीरे-धीरे ये मामले बढ़ते गए और अब यूपी पुलिस के अनुसार, अनिल दुजाना पर हत्या के 18 मामले दर्ज हैं.

कोर्ट में पेशी के दौरान सगाई, फिर बेल पर की शादी

दुजाना ने जेल में रहते हुए ही कई दूसरे गैंग के साथ मिलकर अपने काम को जारी रखा.

कहा जाता है कि दुजाना अपने गैंग में लगातार नए सदस्यों को भी जोड़ता रहता था.

धीरे-धीरे अनिल दुजाना के गैंग का पूरे पश्चिमी उत्तर प्रदेश में प्रभाव हो गया था.

जेल में रहते हुए ही अनिल दुजाना ने साल 2015 में ज़िला पंचायत सदस्य का चुनाव लड़ा और जीता.

हालांकि, बाद में गौतमबुद्ध नगर के चुनाव को निरस्त कर दिया गया था.

अनिल दुजाना की शादी का किस्सा भी कम दिलचस्प नहीं है.

इस शादी को कुछ लोग 'मजबूरी' का नाम भी देते हैं.

दरअसल, बागपत के रहने वाले लीलू का राजकुमार से 40 बीघा ज़मीन को लेकर विवाद चल रहा था.

कहा जाता है कि राजकुमार ने लीलू से मुक़ाबला करने के लिए अपनी दो बेटियों की शादी जाने-माने अपराधियों हरेंद्र खड़खड़ा और उनके भाई से करा दी थी.

इनके सामने लीलू कमज़ोर पड़ रहा था.

इसी वजह से लीलू ने भी अपनी बेटी पूजा की शादी हरेंद्र से भी बड़े अपराधी से करवाने की ठान ली थी.

उनकी नज़र सुनील राठी पर हमला करने वाले गैंगस्टर अनिल दुजाना पर टिकी और उसने अपनी बेटी पूजा की शादी दुजाना से करवा दी.

हालांकि, उस समय अनिल दुजाना जेल में था. सवाल था कि अब शादी कैसे हो पाएगी.

इसके बाद एक मामले में पेशी के लिए 16 फ़रवरी 2019 को अनिल दुजाना को ग्रेटर नोएडा की सूरजपुर कोर्ट लाया गया. अनिल दुजाना ने कोर्ट में ही पूजा से सगाई कर ली.

फिर फ़रवरी 2021 में अनिल दुजाना ज़मानत पर बाहर आया और पूजा से शादी की.

नोएडा और आसपास की ख़बरों को कवर करने वाले पत्रकार सुजीत राठी ने बीबीसी हिंदी से बातचीत में बताया कि अनिल दुजाना की पत्नी उससे मिलने जेल जाया करती थी. दोनों की एक बेटी है.

'सुंदर डाकू' के गांव से था अनिल दुजाना

बादलपुर के दुजाना गाँव को आज भले ही अनिल दुजाना की वजह से जाना जा रहा है, लेकिन कई दशक पहले भी लोगों के कानों में इस गांव का नाम गूंजा करता था.

यूपी के गौतमबुद्ध नगर यानी नोएडा में बादलपुर थाना क्षेत्र है और इसी इलाके में आता है दुजाना गांव. यहां 1970-80 के दशक में सुंदर नागर उर्फ़ सुंदर डाकू बहुत चर्चित हुआ करता था.

'क्राइम तक' वेबसाइट की ख़बर के अनुसार, सुंदर डाकू ने तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को भी हत्या की धमकी दी थी.

हालांकि, कई बार गिरफ़्तार होने के बाद पुलिस के साथ मुठभेड़ में सुंदर डाकू को भी मार दिया गया था.

पहली बार अनिल नागर जब जेल गया तो उसने अपने नाम के आगे से नागर हटाकर दुजाना जोड़ा.

कहते हैं कि दुजाना पश्चिमी यूपी में ज़मीन पर क़ब्ज़ा करने, क़ब्ज़ा छुड़वाने, लूट और रंगदारी वसूलने में माहिर हो चुका था.

अनिल दुजाना के ऊपर नोएडा पुलिस ने 50 हज़ार और बुलंदशहर पुलिस ने 25 हज़ार रुपये का इनाम घोषित किया हुआ था.

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, बीते सप्ताह जेल से बाहर आते ही अनिल दुजाना ने अपने ख़िलाफ़ गवाही देने वालों को धमकाना शुरू कर दिया था.

एसटीएफ़ ने दुजाना की खोजबीन शुरू कर दी थी और गुरुवार को मुठभेड़ में उसे मारने का दावा किया है.

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