डीयू के एडहॉक टीचर को नौकरी से निकाला गया था, घर में मिला शव - प्रेस रिव्यू

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दिल्ली यूनिवर्सिटी के एक एडहॉक टीचर की कथित आत्महत्या के बाद छात्रों और शिक्षकों में ग़म और ग़ुस्सा है.
यूनिवर्सिटी के हिंदू कॉलेज के बाहर इस घटना को लेकर विरोध प्रदर्शन हुआ है.
'द हिंदू' की ख़बर में कहा गया है कि दिल्ली यूनवर्सिटी के हिंदू कॉलेज में एडहॉक टीचर समरवीर सिंह ने पश्चिमी दिल्ली के पीतमपुरा में बुधवार को ख़ुदकुशी कर ली. पुलिस के मुताबिक़ समरवीर इस साल फ़रवरी में नौकरी से हटाए जाने से परेशान थे.
अख़बार की रिपोर्ट में कहा गया है कि मूल रूप से राजस्थान के बारां जिले के रहने वाले समरवीर सिंह दिल्ली में अपने रिश्ते के भाई राहुल सिंह के साथ किराये के फ्लैट में रहते थे.
समरवीर सिंह ने उस वक़्त आत्महत्या की जिस वक़्त राहुल सिंह घर में नहीं थे. पुलिस को घटनास्थल से कोई नोट नहीं मिला है.
राहुल सिंह ने पुलिस को बताया कि समरवीर सिंह हिंदू कॉलेज में ए़़डहॉक असिस्टेंट प्रोफ़ेसर थे और पिछले छह साल से दर्शन शास्त्र पढ़ा रहे थे. राहुल के मुताबिक़ नौकरी जाने से समरवीर सिंह काफ़ी परेशान थे.
समरवीर सिंह के एक क़रीबी दोस्त आशुतोष ने 'द हिंदू' को बताया कि वो दिल्ली यूनिवर्सिटी से पीएचडी कर रहे थे.
आशुतोष ने बताया कि नौकरी जाने के बाद समरवीर सिंह काफ़ी परेशान लग रहे थे. वो अक्सर कहा करते थे कि एक असिस्टेंट प्रोफ़ेसरों को एक ख़ास नेटवर्क के ज़रिये भर्ती किया जा रहा है.
समरवीर सिंह के भाई राहुल सिंह ने कहा,''समरवीर ने मुझे बताया कि उनसे कम योग्य उम्मीदवारों को नौकरी दी जा रही है. इससे वो काफ़ी परेशान थे.''.
अख़बार के मुताबिक़ राजधानी कॉलेज के एक प्रोफेसर आनंद प्रकाश ने कहा,'' समरवीर सिंह ने मुझे बताया था कि वो डिप्रेशन से जूझ रहे हैं. उन्होंने टेक्स्ट मैसेज और कॉल का जवाब देना बंद कर दिया था.''
नॉर्थ कैम्पस में मातम
समरवीर सिंह की कथित ख़ुदकुशी से नॉर्थ कैम्पस में मातम पसरा है. छात्रों ने बुधवार को हिंदू कॉलेज के बाहर इस घटना का विरोध करते हुए नारे लगाए.
प्रदर्शन कर रहे लोगों को कहना था कि वर्षों तक कॉलेज की सेवा करने के बाद एक दिन अचानक से शिक्षक को निकाल दिया गया.
कई शिक्षकों का कहना था कि पिछले दस-बीस साल से पढ़ा रहे शिक्षकों को दो मिनट के इंटरव्यू के बाद नौकरी से निकाल दिया गया है.
उनका दावा है कि हाल के इंटरव्यू के बाद तीन चौथाई एडहॉक टीचर्स को स्थायी नहीं किया गया.

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अखब़ार ने शिक्षकों की ओर से दिए गए ग़ैर आधिकारिक आंकड़ों का हवाला देते हुए लिखा है कि स्थायी नौकरी के लिए इंटरव्यू के बाद 615 एडहॉक टीचर्स में से 465 को हटा दिया गया.
अख़बार के मुताबिक़ दिल्ली टीचर्स इनिशिएटिव की सह-संयोजक उमा गुप्ता ने मांग की है कि सभी कॉलेजों में इंटरव्यू हों और सभी एडहॉक टीचर्स को स्थायी किया जाए.
डेमोक्रेटिक टीचर्स फ्रंट की प्रेसिडेंट नंदिता नारायण ने कहा,'' डीयू में ये नीति और कितने समरवीरों की जान लेगी. उनकी मौत किसी इंस्टीट्यूशनल मौत से कम नहीं है . जो लोग इसके जिम्मेदार है उन पर मुकदमा हो''.
इससे पहले डीयू के रजिस्ट्रार विकास गुप्ता ने कहा था कि स्थायी शिक्षकों की बहाली की प्रक्रिया यूनिवर्सिटी के नियमों के मुताबिक बहाल की जा रही है.

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सुप्रीम कोर्ट ने कहा- पहले ये बताइए सेम सेक्स कपल की ज़िंदगी बेहतर कैसे करेंगे
मोदी सरकार सेम सेक्स मैरिज को मंजूरी देने की राह में तमाम 'अड़चनों' का हवाला दे रही है.
लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने उससे कहा है कि वो तीन मई से पहले बताए कि उसकी ओर से ऐसे कौन से कदम उठाए जा सकते हैं, जिनसे सेम सेक्स कपल की रोजमर्रा की ज़िंदगी बेहतर बन सकती है.
'टाइम्स ऑफ इंडिया' की ख़बर के मुताबिक़ सेम सेक्स मैरिज को अनुमति देने के मामले की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने माना कि पर्सनल लॉ कानून में घुसे बगैर सेम सेक्स मैरिज को मान्यता देना मुश्किल है क्योंकि इसमें विरासत कानून, मेंटनेंस, गोद लेने और विरासत से जुड़े कानूनों का मसला आ जाता है.
लेकिन बेंच ने कहा,''इस वक्त हम शादी के सवाल पर विचार नहीं कर रहे हैं. लेकिन साफ बात की जाए. हम केंद्र के इस तर्क को मानते हैं कि कानून बनाना हमारा काम नहीं है. ये संसद और विधानसभाओं का काम है.''
''लेकिन सेम सेक्स कपल को सामाजिक सुरक्षा और कल्याण के लिए मान्यता की जरूरत होगी.ऐसा करके हम ये सुनिश्चित करेंगे कि भविष्य में उनका बहिष्कार न हो.''
बेंच ने सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता से कहा कि वो इस मुद्दे पर बुधवार को अगली सुनवाई तक जवाब दाखिल करें.
सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस एस के कौल,जस्टिस एसआर भट्ट, जस्टिस हिमा कोहली और जस्टिस पीएस नरसिम्हा की बेंच इस पर सुनवाई कर रही है.
केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट से कहा है कि अगर सेम सेक्स मैरिज को मान्यता देनी होगी तो संविधान के 158 प्रावधानों, भारतीय दंड संहिता, आपराधिक प्रक्रिया संहिता और 28 अन्य कानूनों में बदलाव करना होगा.

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रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने चीन के रक्षा मंत्री से हाथ क्यों नहीं मिलाया?
भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने एससीओ बैठक में हिस्सा लेने भारत आए चीन के रक्षा मंत्री ली शंग्फू से सीमा विवाद का उठाया है. राजनाथ सिंह ने गुरुवार को ली शंग्फू से बातचीत के दौरान कहा कि मौजूदा समझौतों के उल्लंघन ने दोनों देशों के संबंधों को कमजोर कर दिया है.
जबकि भारत और चीन के संबंध सीमाओं पर शांति बरकरार रखे जाने पर टिके हैं.
'हिन्दुस्तान टाइम्स' ने सिंह और शंग्फू की मुलाकात को अपने पहले पन्ने की ख़बर बनाई है.
इस रिपोर्ट में रंक्षा मंत्रालय एक बयान का हवाला दिया गया है. मंत्रालय के बयान के मुताबिक़ सिंह ने चीनी रक्षा मंत्री से कहा कि वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर सभी मुद्दों को मौजूदा द्विपक्षीय समझौतों और प्रतिबद्धताओं के मुताबिक सुलझाने की जरूरत है. दोनों मंत्रियों ने शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के रक्षा मंत्रियों की बैठक की पूर्व संध्या पर द्विपक्षीय बैठक की.
बयान में कहा गया है दोनो देशों के मंत्रियों ने भारत-चीन के सीमाई इलाकों में हो रहे विकास कार्यों और द्विपक्षीय संबंधों पर खुल कर बातचीत की.
रक्षा मंत्रालय की ओर से जारी सिंह की बैठकों की तस्वीरों में उन्हें रक्षा ईरान, कजाकिस्तान और ताजिकिस्तान रक्षा मंत्रियों से हाथ मिलाते हुए दिखाया गया है.
हालांकि अपने चीनी समकक्ष के साथ सिंह की मुलाकात की तस्वीर में उन्हें हाथ मिलाते हुए नहीं दिखाया गया था. दोनों सिर्फ मेज के आर-पार बैठे दिखाए गए हैं.
इस मामले की जानकारी रखने वाले एक अधिकारी ने बताया कि सिंह और ली ने जब द्विपक्षीय बातचीत के लिए मुलाकात की तो उन्होंने हाथ नहीं मिलाया.
यह बैठक भारतीय सेना और चीनी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) की ओर से पूर्वी लद्दाख में एलएसी पर तनाव कम करने के लिए 18वें दौर की सैन्य वार्ता के कुछ दिनों बाद हुई.

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बैंकों के बिज़नेस मॉडल पर आरबीआई की नजदीकी नज़र : दास
भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा है कि केंद्रीय बैंक देश के बैंकों के बिजनेस मॉडल पर नजदीकी निगाहें बनाए हुए है.
उन्होंने कहा कि आरबीआई वित्तीय लचीलेपन को नुकसान पहुंचाने वाले किसी भी चीज को लेकर सतर्क है. हालांकि बैंक बेहद तनाव वाला हालात में भी न्यूनतम पूंजी रख सकते हैं.
'बिज़नेस स्टैंडर्ड' की ख़बर के मुताबिक़ दास ने कहा कि केंद्रीय बैंक ये उम्मीद करता है कि बैंक बोर्ड पर्याप्त पूंजी निर्माण और लिक्विडिटी बफर बनाने पर ध्यान लगाएं.बैंक आगे प्रगति करते रहें इसके लिए ये जरूरी है.

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दास ने कहा कि बैंकों के वित्तीय स्वास्थ्य का संकेत देने वाले एनपीए रेश्यो दिसंबर 2022 तक गिर कर 4.41 पर पहुंच गया. 31 मार्च 2022 को ये 5.8 फीसदी था. 31 मार्च 2021 को ये 7. फीसदी था. यानी बैंकों की वित्तीय स्थिति सुधर रही रही है
अख़बार के मुताबिक़ दास ने बैंकों की कमजोरियों के असली वजहों की पहचान करने और उन्हें दूर करने पर जोर दिया. उन्होंने कहा ऐसा अक्सर अनुचित बिजनेस मॉडल अपनाने की वजह से होता है.
अति आक्रामक ग्रोथ स्ट्रेटजी और मुनाफा के पीछे अंधाधुंध भागने से अक्सर ऐसी समस्या आती है.
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