कश्मीर में सेना पर हमला करने वाले कौन थे, तलाशी के लिए शुरू हुआ बड़ा ऑपरेशन - प्रेस रिव्यू

गुरुवार को जम्मू-कश्मीर के पुंछ में सेना की एक गाड़ी पर चरमपंथी हमले के बाद, आग लगने से पांच जवानों की मौत हो गई थी. इसके बाद भारतीय सेना ने हमलावरों की तलाश में एक बड़ा ऑपरेशन शुरू किया है.

विशेष सैन्य बल, हेलीकॉप्टर और ड्रोन के जरिये हमलावरों की तलाश की जा रही है. इस हमले में राष्ट्रीय राइफल्स के पांच सैनिकों की मौत हो गई है.

'टाइम्स ऑफ इंडिया' की ख़बर के मुताबिक़ नियंत्रण रेखा से महज एक किलोमीटर दूर भाटा धुरियां में सेना के ट्रक पर हमलावरों ने चीन में बने ग्रेनेड और असॉल्ट राइफलों का इस्तेमाल किया था. ये ट्रक दोपहर तीन बजे के आस-पास भीमबर गली से संगियोत जा रहा था.

अख़बार ने अधिकारियों के हवाले से बताया है कि इस बात की खु़फिया जानकारी मिली थी कि पाकिस्तान समर्थित चरमपंथी श्रीनगर में अगले महीने होने वाले जी-20 कार्यक्रम को देखते हुए आईईडी या ग्रेनेड से हमला कर सकते हैं, लेकिन इंटेलिजेंस इनपुट्स सामान्य किस्म के थे.

अधिकारियों ने कहा कि अभी ये निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगा कि हमला जैश-ए-मोहम्मद ने कराया है या लश्कर-ए-तैयबा ने.

ये हमला ठीक उस दिन हुआ, जिस दिन पाकिस्तान की ओर से ये ऐलान किया गया कि उसके विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो एससीओ के विदेश मंत्रियों के सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए चार और पांच मई को गोवा आएंगे.

अख़बार ने लिखा है कि इस बीच, शुक्रवार को पूरे दिन जम्मू-कश्मीर के स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप और सीआरपीएफ के जवान हमलावरों को तलाशते रहे. इस अभियान में कई टीमों ने हिस्सा लिया.

ये टीमें ड्रोन की मदद से तलाशी अभियान चला रही थीं. घने जंगलों में सघन तलाशी अभियान चलाया जा रहा था.

एक अधिकारी ने बताया कि चरमपंथियों ने इस हमले को अंज़ाम देने के लिए रेकी की थी. ट्रक पर तीन तरफ से हमला किया था. हमलावरों ने ख़राब मौसम का फायदा उठाया.

सेना के ट्रक पर हमले के बाद एनआईए की टीम ने घटनास्थल का दौरा किया. इसके बाद पुंछ और रजौरी में नियंत्रण रेखा के आसपास कड़ी चौकसी की जा रही है.

भाटा धुरियां, संजोत, तोता गली नार और इससे सटे इलाकों में नाकेबंदी की गई है. भीमबर गली-पुंछ सड़क बंद कर दी गई है. लोगों को मेंढर होकर पुंछ जाने की हिदायत दी गई है.

फेक न्यूज़ के ख़िलाफ़ कानून में बदलाव का क्या है मकसद? सरकार ने अदालत में बताया

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर सरकार ने अपनी नीतियों के बारे में फेक न्यूज़ की पहचान करने के लिए आईटी एक्ट में बदलाव के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई के दौरान कहा है कि सोच-समझ कर ये कदम उठाया गया है. याचिका कॉमेडियन कुणाल कामरा ने दायर की थी.

'इंडियन एक्सप्रेस' की ख़बर के मुताबिक़ बॉम्बे हाई कोर्ट में इस पर सुनवाई की दौरान सरकार की ओर से कहा गया कि गलत और गुमराह करने वाली सूचनाओं से चुनावी लोकतंत्र पर गलत असर पड़ सकता है. इससे अलगाववादी आंदोलन को बढ़ावा मिल सकता है.

साथ ही इससे सामाजिक और राजनीतिक संघर्ष भी बढ़ सकता है. इससे चुनी हुई सरकार के काम और इरादों के बारे में जनता में अविश्वास पैदा होगा.

आईटी मंत्रालय ने अपनी दलील में कहा कि 'फैक्ट चेकिंग यूनिट' का मकसद सरकार की नीतियों के बारे में फैलनी वाली गलत और भ्रामक सूचनाओं को हटाने का निर्देश हो सकता है. इसका मकसद व्यंग्य या किसी कलाकार के विचारों को हटाना नहीं है.

इस बीच सुप्रीम कोर्ट ने यू ट्यूबर मनीष कश्यप एनएसए लगाने पर अचरज जताया है.

इंडियन एक्सप्रेस की ख़बर में कहा गया है कि तमिलनाडु में प्रवासी मजदूरों पर हमले का कथित फेक वीडियो अपलोड करने के आरोप में गिरफ़्तार कश्यप के मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट में चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस पी एस नरसिम्हा ने कहा कि उनके ख़िलाफ़ एनएसए क्यों?

चंद्रचूड़ और नरसिम्हा की बेंच ने तमिलनाडु सरकार की ओर से दलील दे रहे वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल से कहा कि कश्यप के ख़िलाफ हम सभी एफआईआर क्लब कर देंगे लेकिन उनके ख़िलाफ़ एनएसए लगाने जैसी बदला लेने वाली कार्रवाई क्यों की गई.

सिब्बल ने कश्यप के ख़िलाफ़ एफआईआर को बिहार भेजने का विरोध करते हुए कहा कि कश्यप के 60 लाख फॉलोअर्स हैं. वो तमिलनाडु गए थे और लोगों का इंटरव्यू किया था. इसके बाद उन्होंने फेक वीडियो अपलोड करते हुए कहा कि बिहार के प्रवासी मजदूरों पर तमिलनाडु में हमला हो रहा है.

उन्होंने कहा कि कश्यप राजनीतिक नेता हैं और वो चुनाव भी लड़ चुके हैं.

कश्यप की ओर से दलील देते हुए वरिष्ठ वकील सिद्धार्थ दवे ने कहा कि कश्यप के ख़िलाफ़ एनएसए लगाना शरारतपूर्ण कार्रवाई है.

वहीं बिहार सरकार की ओर से पेश वकील ने कहा कि कश्यप का अपराध सिर्फ फेक वीडियो पोस्ट करने तक ही सीमित नहीं है बल्कि उनके ख़िलाफ़ आठ आपराधिक केस हैं. वो 'आदतन अपराधी' हैं.

इंडियन एक्सप्रेस की एक और ख़बर के मुताबिक़ सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि वेबसाइट ऑपइंडिया.कॉम के एडिटर इन चीफ नुपुर शर्मा और सीईओ राहुल रोशन के ख़िलाफ़ फिलहाल जबरदस्ती कोई कार्रवाई न की जाए. इन लोगों के ख़िलाफ तमिलनाडु पुलिस ने बिहारी मजदूरों पर हमले के बारे में भ्रामक ख़बरें चलाने के मामले में एफआईआर की थी.

इस मामले में शर्मा और रोशन की याचिका पर सुनवाई करते हुए चीफ जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ और जस्टिस नरसिम्हा ने कहा कि चार सप्ताह तक उनके ख़िलाफ़ कोई जबरदस्ती कार्रवाई न की जाए. उन्हें न्याय हासिल करने का रास्ता देना होगा.

तमिलनाडु में वीपी सिंह की मूर्ति

तमिलनाडु में पूर्व प्रधानमंत्री और 'मंडल मसीहा' माने जाने वाले वीपी सिंह की मूर्ति लगाई जाएगी. तमिलनाडु सरकार ने कहा है कि वो चेन्नई में वीपी सिंह की प्रतिमा लगाएगी. ये उनके प्रति तमिल समाज का आभार होगा.

'इंडियन एक्सप्रेस' ने लिखा है कि तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम के स्टालिन इसके जरिये एक तीर से कई शिकार करना चाहते हैं.इससे उन्हें सामाजिक न्याय के इर्द-गिर्द एक राष्ट्रीय मंच बनाने में मदद मिलेगी. साथ ही इससे डीएमके और वीपी सिंह के रिश्तों के अनछुए पहलू पर भी रोशनी पड़ेगी.

स्टालिन ने वीपी सिंह की मूर्ति लगाने का ऐलान करते हुए कहा,'' मंडल आयोग की सिफारिशों में एक थी ओबीसी के लिए 27 फीसदी आरक्षण. ये वीपी सिंह ही थे जिन्होंने इस आयोग की सिफारिशों को लागू करवाया''

स्टालिन ने कहा'' तमिलनाडु की जीवनरेखा कावेरी नदी से जुड़ा जल विवाद भी सुलझाने में वीपी सिंह ने मदद की थी. उन्होंने कावेरी ट्रिब्यूनल बनवाने में अहम भूमिका अदा की थी''

स्टालिन के इस ऐलान के बाद वीपी सिंह की पोतियों आद्रिजा मंजरी और ऋचा मंजरी ने सोशल मीडिया के जरिये स्टालिन के इस फैसले के लिए उन्हें धन्यवाद दिया.

वी पी सिंह 1990 में जनता दल सरकार के दौरान के प्रधानमंत्री थे. उन्होंने ओबीसी के लिए 27 फीसदी आरक्षण की सिफारिश को लागू कर बड़ा राजनीतिक जोखिम लिया था.

मंडल आयोग ने ओबीसी के लिए नौकरियों और शिक्षा में 27 फीसदी आरक्षण का ऐलान किया था. यह सिफारिश 1970 के दशक से लंबित थी.

'ब्लू टिक हटने से फेक प्रोफाइल्स का ख़तरा बढ़ा'

एलन मस्क की माइक्रो ब्लॉगिंग साइट ट्विटर की ओर से अनपेड सब्सक्राइबर के ब्लू टिक हटाए जाने के बाद फेक ट्विटर अकाउंट्स की बाढ़ आने का ख़तरा बढ़ने की आशंका जताई जा रही है.

''टाइम्स ऑफ इंडिया'' ने अपनी एक रिपोर्ट में विशेषज्ञों के हवाले से लिखा है कि ट्विटर के इस फैसले के बाद लोग साइबर स्पेस में धोखाधड़ी के शिकार हो सकते हैं. इससे सीधे-सादे लोगों के फंसने का ख़तरा है क्यों ब्लू टिक प्रामाणिकता और आधिकारिक होने का पर्याय हो गया था.

ट्विटर के नए ऐलान के बाद कोई भी ट्विटर को एक तय फीस अदा कर ब्लू टिक ले सकता. नए नियमों के बाद कोई भी खुद को प्रामाणिक कंपनी, शख्स या सरकारी अकाउंट बता कर मिलते-जुलते नाम से ब्लू टिक ले सकता है.

अख़बार लिखता है ट्विटर सरकार से जुड़े हैंडल्स को ग्रे और ऑफशियल बिजनेस अकाउंट को सुनहरे रंग का टिक दे रहा है. लेकिन कई इससे महरूम हैं.

उदाहरण के लिए अख़बार के छपने से पहले तक एचडीएफसी बैंक, एक्सिस बैंक, आईसीआईसीआई प्रुडेंशियल और मोतीलाल ओसवाल के अकाउंट वेरिफाइड नहीं हुए थे.

देश के कई राजनेताओं, फिल्म एक्टर्स और दूसरे क्षेत्र के सेलिब्रिटीज के भी ब्लू टिक हट गए हैं.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)