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कश्मीर में मारे गए पाँच सैनिकों में से चार पंजाब के, एक सैनिक के पिता लड़े हैं कारगिल युद्ध
गुरुवार को जम्मू-कश्मीर के पुंछ में सेना की एक गाड़ी में आग लगने से पांच जवानों की मौत हो गई, जिनमें से चार पंजाब के हैं.
भारतीय सेना ने बयान जारी कर कहा है कि आतंकवादियों ने सेना के इस वाहन पर हैंड ग्रेनेड फेंका, जिससे गाड़ी में आग लग गई.
इस हमले में राष्ट्रीय राइफ़ल्स के पांच जवानों की मौत हो गई और एक घायल हो गया.
ये जवान इस इलाके में चरमपंथियों के ख़िलाफ़ चलाए जा रहे अभियान के तहत तैनात किए गए थे.
सेना के मुताबिक़ इस हादसे में गंभीर रूप से घायल एक अन्य सैनिक का राजौरी के सैनिक अस्पताल में इलाज चल रहा है.
भारतीय सेना ने अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल से ट्वीट कर मारे गए सैनिकों के नाम बताए हैं.
इनके नाम हवलदार मनदीप सिंह, लांस नायक देवाशीष बसवाल, लांस नायक कुलवंत सिंह, सिपाही हरकिशन सिंह और सिपाही सेवक सिंह हैं.
सेनाध्यक्ष जनरल मनोज पांडे ने इन सैनिकों को श्रद्धांजलि देते हुए कहा है कि भारतीय सेना इन पांचों सैनिकों के अप्रतिम बलिदान को सलाम करती है.
उन्होंने कहा कि इन पांचों सैनिकों ने पुंछ सेक्टर में देश के प्रति अपने कर्तव्य को निभाते हुए सर्वोच्च बलिदान किया है.
मृतकों में हवलदार मनदीप सिंह पंजाब के लुधियाना ज़िले के गांव चानकोइयां कलां के रहने वाले थे.
कहाँ के रहने वाले थे सैनिक
लांस नायक कुलवंत सिंह मोगा ज़िले के चरिक गांव के रहने वाले थे और सिपाही सेवक सिंह बठिंडा के तलवंडी साबो के गांव बागा के रहने वाले थे.
हमले में मारे हुए पांचवें सैनिक ओडिशा के पुरी के रहने वाले लांस नायक देबाशीष थे.
सिपाही हरकिशन सिंह ज़िला गुरदासपुर के गांव तलवंडी भरत के रहने वाले थे.
हरकिशन सिंह
बीबीसी पंजाबी संवाददाता गुरप्रीत सिंह चावला के मुताबिक़ 27 वर्षीय हरकिशन सिंह 49 राष्ट्रीय राइफ़ल्स में कार्यरत थे.
उनके पिता का नाम मंगल सिंह है और वे भारतीय सेना से सेवानिवृत्त हैं.
उनके गांव तलवंडी भरत में ख़बर पहुँचते ही इलाक़े में शोक की लहर दौड़ गई है.
उनके परिवार में उनकी पत्नी दलजीत कौर और दो साल की बेटी है और उनकी पत्नी गर्भवती हैं.
हरकिशन सिंह 2017 में सेना में शामिल हुए थे.
दलजीत कौर ने बताया, "पिछले दिन पूरे परिवार ने वीडियो कॉल की थी और उन्होंने अपनी बेटी खुशप्रीत कौर के साथ लंबी वीडियो कॉल की थी."
फरवरी माह में छुट्टी लेकर हरकिशन वापस अपनी ड्यूटी पर चले गए थे.
मोगा ज़िले के चरिक गांव निवासी भारतीय सेना के जवान कुलवंत सिंह की हमले में मौत के बाद उनके घर में मातम का माहौल है.
कुलवंत सिंह के ताया मंदिर सिंह ने बीबीसी पंजाबी संवाददाता सुरिंदर मान को बताया कि कारगिल युद्ध के दौरान कुलवंत सिंह के पिता बलदेव सिंह भी मारे गए थे.
उन्होंने कहा कि कुलवंत सिंह 14 साल पहले भारतीय सेना में शामिल हुए थे.
क़रीब दो महीने पहले वे अपने परिवार से मिलने आए थे.
मनदीप सिंह
इस हमले में लुधियाना के 39 वर्षीय हलदार मनदीप सिंह की मौत हो गई है.
सेना ने फ़ोन कर हवलदार मनदीप सिंह के परिजनों को ये जानकारी दी.
मनदीप सिंह कुछ दिन पहले ही छुट्टी पर गए थे.
मनदीप सिंह के परिवार में उनकी माँ, पत्नी और छोटे बच्चे हैं.
उनके पिता की पहले ही मौत हो चुकी है.
गुरसेवक सिंह - तलवंडी साबो
गुरसेवक सिंह के परिवार में उनके पिता गुरचरण सिंह, माँ और दो बहनें हैं.
वे अपने माता-पिता के इकलौते बेटे थे.
गुरसेवक सिंह साल 2018 में सेना में भर्ती हुए थे और 20 दिन पहले छुट्टी लेकर ड्यूटी पर गए थे.
भगवंत मान ने श्रद्धांजलि दी
पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने ट्वीट कर मारे गए जवानों को श्रद्धांजलि दी है.
उन्होंने लिखा है, "राष्ट्रीय राइफ़ल्स के पांच जवानों में से चार जवान पंजाब के थे, जो आतंकवादी हमले में शहीद हुए. शहीदों को नमन."
इससे पहले गुरुवार को सेना ने एक बयान जारी कर जानकारी दी थी कि इस घटना के पीछे चरमपंथियों का हाथ है.
सेना के उत्तरी कमान मुख्यालय द्वारा जारी एक बयान के अनुसार, "आतंकवादियों ने दोपहर क़रीब 3 बजे वाहन पर हथगोला फेंका, जिससे आग लग सकती है."
राष्ट्रीय राइफ़ल्स
राष्ट्रीय राइफ़ल्स भारतीय सेना की एक उच्च प्रशिक्षित आतंकवाद निरोधक बल है.
इसे 1990 में जम्मू और कश्मीर में चरमपंथ का मुक़ाबला करने के लिए बनाया गया था.
यह एक अर्धसैनिक बल नहीं है, बल्कि जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद विरोधी अभियानों के लिए प्रशिक्षित भारतीय सेना की एक विशेष इकाई है.
राष्ट्रीय राइफ़ल्स में भारतीय सेना के विभिन्न रेजिमेंटों के सैनिक शामिल हैं और इसका मुख्यालय जम्मू और कश्मीर में है.
राष्ट्रीय राइफ़ल्स ने राज्य में क़ानून व्यवस्था बनाए रखने और चरमपंथ के ख़िलाफ़ लड़ाई में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है.
विपरीत परिस्थितियों का सामना करने में इसकी बहादुरी और प्रतिबद्धता के लिए भारत सरकार ने कई बार इसकी प्रशंसा की है.
राष्ट्रीय राइफ़ल्स जम्मू और कश्मीर में कई सफल अभियानों में शामिल रहा है, जिसमें 'आतंकवादियों का सफाया', हथियारों और गोला-बारूद की बरामदगी और संदिग्धों की गिरफ्तारी शामिल है.
राष्ट्रीय राइफ़ल्स राज्य में स्थानीय लोगों को सहायता देने में भी सक्रिय रहा है.
रक्षा मंत्रालय की एक वार्षिक रिपोर्ट में कहा गया है, "राष्ट्रीय राइफ़ल्स (आरआर) ने वर्षों से जम्मू और कश्मीर में सेना और केंद्रीय अर्धसैनिक बलों के काम को पूरा किया है."
जम्मू-कश्मीर में कथित मानवाधिकारों के उल्लंघन के लिए राष्ट्रीय राइफ़ल्स को भी आलोचनाओं का सामना करना पड़ा है.
हालाँकि राष्ट्रीय राइफ़ल्स ने आरोपों से इनकार किया है और कहा है कि यह क़ानून के दायरे में काम करता है और मानवाधिकार सिद्धांतों का पालन करता है.
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