ब्रिटेन ने यूक्रेन को गोला-बारूद देने के लिए पाकिस्तान से किया ये क़रार: प्रेस रिव्यू

गोला-बारूद

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ब्रिटेन ने यूक्रेन को गोला-बारूद भेजने के लिए पाकिस्तान के साथ एक अहम समझौते पर हस्ताक्षर किया है. इस समझौते में आर्टिलरी रॉकेट जैसी चीज़ें भेजा जाना शामिल है.

ये पहला मौका नहीं है जब रूस के साथ पिछले एक साल से जारी युद्ध के दौरान यूक्रेन को हथियार पहुंचाने में पाकिस्तान का नाम सामने आया हो.

इससे पहले ब्रिटेन ने एक एयर ब्रिज के ज़रिए यूक्रेन को हथियार भेजे थे और पाकिस्तान उसका हिस्सा बना था.

अंग्रेजी अख़बार द इकनॉमिक टाइम्स में प्रकाशित ख़बर के मुताबिक़, ब्रितानी रक्षा मंत्रालय ने ये क़रार पाकिस्तान की ऑर्डिनेंस फ़ैक्ट्री से किया है.

इसके तहत फ़रवरी महीने में 162 कंटेनरों की खेप कराची पोर्ट से जर्मनी के रास्ते यूक्रेन पहुंचाई गयी है. ये खेप कराची बंदरगाह से 'एमवी ज्यूस्ट' जहाज़ के माध्यम से जर्मनी के एमडेन बंदरगाह भेजी गयी थी.

द इकॉनोमिक टाइम्स ने ब्रितानी एयर ब्रिज को लेकर विस्तृत ख़बरें प्रकाशित की हैं जिनमें पाकिस्तान की भूमिका सामने आई थी.

इस ख़बर के मुताबिक, रूस के साथ युद्ध शुरू होने के बाद ब्रिटेन ने एक एयर ब्रिज के ज़रिए उसे हथियार और गोला-बारूद पहुंचाए थे.

एयर ब्रिज क्या होता है?

एयर ब्रिज से आशय उन देशों के हवाई क्षेत्रों से होकर गुज़रना हैं जहां जोख़िम अपेक्षाकृत कम हो.

ख़बर के मुताबिक़, ब्रिटेन ने कथित रूप से यूक्रेन को गोला-बारूद और हथियार पहुंचाने के लिए एयर ब्रिज के ज़रिए पाकिस्तानी सेना के मुख्यालय कहे जाने वाले रावलपिंडी में स्थित नूर ख़ान एयर बेस का इस्तेमाल किया.

बताया जा रहा है कि 6 से 15 अगस्त के बीच ईरान और अफ़ग़ानिस्तान के हवाई क्षेत्र से बचते हुए पश्चिम एशियाई हवाई क्षेत्र में ब्रितानी एयरफ़ोर्स के विमान सी-17A ग्लोबमास्टर तृतीय (कॉल साइन: ZZ173) ने कई उड़ानें भरीं.

ये उड़ानें भूमध्य सागर में स्थित ब्रितानी एयर बेस से रावलपिंडी और फिर रोमानिया की ओर भरी गयीं. ये संभव है कि यूक्रेन को भेजे गए आर्टिलरी रॉकेट आदि इस एयर ब्रिज के माध्यम से भेजे गए हों.

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पोलैंड के साथ भी पाकिस्तान का क़रार

ब्रिटेन के पाकिस्तान के साथ गहरे संबंध, ख़ासकर रक्षा क्षेत्र में, भारत और ब्रिटेन के रिश्तों में अनबन का विषय रहे हैं.

ब्रिटेन के अलावा पोलैंड की एक फ़र्म ने भी यूक्रेन को हथियार और गोला-बारूद पहुंचाने के लिए पाकिस्तानी कंपनी के साथ क़रार किया है. इसके साथ ही कुछ अन्य पाकिस्तानी और पोलिश कंपनियां भी इस मामले में मिलकर काम कर रही हैं और कनाडा की एक कंपनी इस प्रक्रिया में मध्यस्थ की भूमिका निभा रही है.

द इकनॉमिक टाइम्स ने पिछले महीने अपनी ख़बर में बताया था कि पाकिस्तानी ऑर्डिनेंस फ़ैक्ट्री के एजेंट इस्लामाबाद स्थित डीएमआई एसोशिएट्स ने पोलैंड की सरकारी एजेंसी के साथ एक एमओयू (सहमति पत्र) पर हस्ताक्षर किए हैं.

इस मामले में पोलिश फ़र्म पीएचयू लेख़मर एलएलसी मध्यस्थ विक्रेता और कनाडा स्थित फ़र्म ट्राडेंट ग्लोबल सॉल्यूशंस मध्यस्थ कंसल्टेंट की भूमिका में होंगी.

इससे पहले पाकिस्तान ने कंधे पर रखकर इस्तेमाल किए जाने वाले एयर डिफ़ेंस सिस्टम अनज़ा मार्क 2 की खेप पोलेंड को निर्यात की है. इस खेप को यूक्रेन पहुंचाया जाना है.

इसे पाकिस्तान से पोलैंड पहुंचाने के लिए कराची की मिलेनियम टेक्नोलॉजीज़ और पोलैंड की ओमिडा सी एंड एयर के बीच बातचीत चल रही है.

पाकिस्तान कुछ समय पहले जर्मन बंदरगाह के ज़रिए यूक्रेन को दस हज़ार से ज़्यादा आर्टिलरी रॉकेट भी भेज चुका है.

पुतिन, जिनपिंग

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चीन ने फिर बढ़ाया रक्षा बजट, ख़र्च करेगा 225 अरब डॉलर

चीन ने अपने रक्षा बजट में 7.2 फ़ीसद की बढ़ोतरी की है. इसके साथ ही चीन अब अपनी सुरक्षा पर 225 अरब डॉलर ख़र्च करेगा.

टाइम्स ऑफ़ इंडिया अख़बार में छपी ख़बर के मुताबिक़, अमेरिका और चीन के निकटतम पड़ोसियों के बीच चीन की ओर से रक्षा बजट में वृद्धि को उसकी आक्रामकता में बढ़ोतरी के रूप में देखा जाएगा.

हालांकि, अमेरिका दुनिया भर में डिफ़ेंस पर सबसे ज़्यादा ख़र्च करने वाला देश है. साल 2023 के लिए अमेरिका का डिफ़ेंस बजट लगभग 816 अरब डॉलर है.

वहीं, भारत की बात करें तो भारतीय डिफ़ेंस बजट चीन की तुलना में सिर्फ़ एक तिहाई यानी 72.6 अरब डॉलर है.

ख़बर के मुताबिक़, चीन कई मोर्चों पर मिलती चुनौतियों को लेकर चिंतित है.

इनमें ताइवान से लेकर विवादित समुद्री क्षेत्र दक्षिण चीन सागर में अमेरिकी नौसैनिकों की गतिविधि और हवाई मिशन शामिल हैं.

मोदी, पुतिन

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भारत को रूसी तेल से हुआ 2.5 अरब डॉलर का फ़ायदा

यूक्रेन में युद्ध शुरू होने के बाद से भारत लगातार रूसी तेल आयात कर रहा है जिसे लेकर उसे पश्चिमी देशों की ओर से आलोचना का भी सामना करना पड़ा है.

इंडियन एक्सप्रेस में छपी ख़बर के मुताबिक़, मौजूदा वित्तीय वर्ष की पहली तीन तिमाहियों में भारत को सस्ती दरों पर रूसी तेल ख़रीदने की वजह से ढाई अरब डॉलर का फ़ायदा हुआ है.

इंडियन एक्सप्रेस की ओर से किए गए विश्लेषण के मुताबिक़, बीते नौ महीनों में सस्ते रूसी तेल की वजह से भारत को मिलने वाले कच्चे तेल की दरों में औसत दो डॉलर की कमी आई है.

अप्रैल से दिसंबर के बीच आयातित कच्चे तेल की औसत दर 99.2 डॉलर रही है. इसमें से रूसी तेल को निकाल दिया जाए तो औसत दर बढ़कर 101.2 अरब डॉलर हो जाती है.

इसके साथ ही अप्रैल से दिसंबर के बीच रूसी तेल की औसत क़ीमत 90.9 डॉलर प्रति बैरल रही है जो कि ग़ैर-रूसी तेल की तुलना में 10.3 डॉलर प्रति बैरल कम है.

इस लिहाज़ से दूसरे देशों से तेल ख़रीदने की तुलना में रूसी तेल ख़रीदने पर भारत को औसतन दस फ़ीसद का फायदा हुआ.

भारत के लिहाज़ से इतना डिस्काउंट भी अहम है. हालांकि, ये उतना नहीं है जितना दूसरी भारतीय और अंतरराष्ट्रीय मीडिया की रिपोर्ट्स में बताया गया था.

इस क्षेत्र के जानकारों के मुताबिक़, इस बात में कोई शक़ नहीं है कि रूस की ओर से भारत को अच्छा-ख़ासा डिस्काउंट मिला है, लेकिन युद्ध ग्रस्त क्षेत्र से तेल लेकर आने की वजह से माल ढुलाई की दरें बढ़ने से भारत को उसका उतना फ़ायदा नहीं मिला जितना माना जा रहा था.

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