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मोदी सरकार के बजट में महिलाओं के लिए ये है ख़ास
- Author, सुशीला सिंह
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
भारत की वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बुधवार को देश का पाँचवाँ बजट पेश किया.
इस बजट पर सबकी नज़रें थी, क्योंकि इस साल नौ राज्यों में विधानसभा के चुनाव होने है.
2024 के लोकसभा चुनाव से पहले ये नरेंद्र मोदी सरकार का आख़िरी बजट है.
निर्मला सीमारमण ने क़रीब डेढ़ घंटे तक बजट भाषण दिया और कहा कि ये अमृत काल का पहला बजट है.
वित्त मंत्री ने कहा कि भारत में प्रति व्यक्ति आय दोगुनी हुई है और ये बढ़कर 1.97 लाख हो गई है. साथ ही उनका कहना था भारत विश्व की 10वीं बड़ी अर्थव्यवस्था हुआ करता था लेकिन अब वो पाँचवे पायदान पर पहुँच गया है.
अपने बजट भाषण में भारत की अर्थव्यवस्था को सही रास्ते पर बताते हुए उन्होंने कई सेक्टर में घोषणाएँ की.
हालाँकि विपक्षी पार्टियों ने बजट को लेकर मिलीजुली प्रतिक्रिया दी है.
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शशि थरूर ने कहा कि इस बजट में कुछ अच्छी बाते हैं और वे इसे पूरी तरह से नाकारात्मक नहीं कहेंगे.
उन्होंने कहा, ''अभी भी कई सवाल हैं. इस बजट में मनरेगा का कोई ज़िक्र नहीं था. सरकार मज़दूरों के लिए क्या कर रही है. इसमें महंगाई पर कोई बात नहीं की गई.''
तो समाजवादी पार्टी के नेता और उत्तरप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने इस बजट को लेकर भाजपा पर हमला बोला.
उन्होंने ट्वीट किया,'' भाजपा अपने बजट का दशक पूरा कर रही है पर जब जनता को पहले कुछ न दिया तो अब क्या देगी. भाजपाई बजट महंगाई व बेरोज़गारी को और बढ़ाता है. किसान, मज़दूर, युवा, महिला, नौकरीपेशा, व्यापारी वर्ग में इससे आशा नहीं निराशा बढ़ती है क्योंकि ये चंद बड़े लोगों को ही लाभ पहुँचाने के लिए बनता है."
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लेकिन इस बजट में महिलाओं के लिए क्या ख़ास है?
महिला सम्मान बचत पत्र योजना की घोषणा कर निर्मला सीतारमण ने महिलाओं और लड़कियों को सबसे बड़ा तोहफ़ा दिया.
इस योजना के अनुसार महिलाएँ दो साल के लिए दो लाख रुपए की बचत कर पाएँगी और उन्हें इस रक़म पर 7.5 की दर से बयाज मिलेगा.
इसमें आंशिक निकासी की सुविधा भी दी गई है और जानकार इसे लघु बचत को बढ़ाने का अच्छा तरीक़ा बताते हैं.
वरिष्ठ आर्थिक पत्रकार मधुरेंद्र सिन्हा कहते हैं, ''महिलाओं या लड़कियों के लिए ये अच्छी योजना है. जहाँ बीच में पैसा निकालने का प्रावधान भी अच्छा है क्योंकि कई बार घर में ज़रूरत पड़ जाती है. लेकिन एक महिला होने के नाते उन्हें कामकाजी महिलाओं के लिए टैक्स में छूट देनी चाहिए थी.''
इसके अलावा निर्मला सीतारमण ने महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए केंद्र और राज्य सरकारों की तरफ से चलाई जा रही सुविधाओं का ज़िक्र किया और कहा कि दीन दयाल अंत्योदय योजना राष्ट्रीय ग्रामीण रोज़गार मिशन के तहत महिलाओं को 81 लाख स्व सहायता समूह से जोड़ा गया है.
साथ ही उनका कहना था इन महिलाओं को आर्थिक सशक्तीकरण के अगले पायदान पर लाने की कोशिश की जाएगी ताकि वो बड़े बाज़ार में माल बेच सके.
वरिष्ठ पत्रकार हेमा रामकृष्णण का कहना है, ''महिलाओं को सशक्त करने के लिए ऐसी नीतियों को लाना सराहना भरा है लेकिन उन्हें पारंपरिक भूमिकाओं तक ही सीमित नहीं रखना चाहिए. बल्कि नए स्किल भी सिखाए जाने चाहिए. वहीं महिलाओं की भागीदारी को लेकर एक जेंडर गैप दिखाई देता है उसमें कमी लाने पर काम करना चाहिए.''
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वरिष्ठ नागरिकों के लिए घोषणा
इस बजट में निर्मला सीतारमण ने वरिष्ठ नागरिकों के लिए भी घोषणा की.
वरिष्ठ नागरिको के लिए सीनियर सिटीजन सेविंग स्कीम या एससीएसएस के तहत ज्वाइंट निवेश करने की सीमा को 15 लाख से 30 लाख रुपए कर दिया गया है. पहले पति-पत्नी के ज्वाइंट अकाउंट की सीमा 15 लाख रुपए तक की थी.
वहीं अगर किसी सिंगल सीनियर सिटीजन अकाउंट है तो उसमें भी सीमा बढ़ा दी गई है. इस निवेश को 4.50 लाख रुपए से बढ़ा कर 9 लाख रुपए कर दिया गया है.
इस सीमा को बढ़ाए जाने पर सवाल उठाते हुए वरिष्ठ आर्थिक पत्रकार मधुरेन्द्र सिन्हा कहते हैं- इतनी बड़ी रक़म कितनी ही वरिष्ठ नागरिकों के पास होती है. ऐसे में उन्हीं नागरिकों को फ़ायदा है जो सरकारी या प्राइवेट नौकरियों में उच्च पद पर रहे हो. ऐसे में इसका फ़ायदा वरिष्ठ नागरिकों को होगा, मुझे नहीं लगता. क्योंकि 30 लाख की पूँजी जमा करना आम आदमी के लिए काफ़ी मुश्किल होता है.
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एनीमिया ख़त्म करना लक्ष्य
वित्त मंत्री ने शोध के लिए आईसीएमआर की लैब को बढ़ाने की बात भी कही.
आईसीएमआर यानी भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद, जो भारत सरकार के अंतर्गत काम करता है.
निर्मला सीतारमण ने कहा कि 157 नए नर्सिग कॉलेज बनाए जाएँगे और सिकल सेल एनीमिया को साल 2047 तक ख़त्म करने के लिए मिशन शुरू किया जाएगा.
एनएफ़एचएस -5 के डेटा के अनुसार भारत में पाँच साल तक की उम्र के 67 फ़ीसदी बच्चे ख़ून की कमी से पीड़ित हैं वहीं 15-49 उम्र की महिलाओं में 57 फ़ीसदी ऐसी हैं जो एनीमिया से पीड़ित हैं.
वहीं ख़ून की कमी के कारण कई लोगों की मौत भी हो जाती है, जिसका भी ज़िक्र मंत्री ने अपनी घोषणा में भी किया.
वहीं सीतारमण ने कहा कि राष्ट्रीय डिज़िटल पुस्तकालय की स्थापना की जाएगी और राज्यों के स्तर पर अलग से लाइब्रेरी स्थापित कराने पर ज़ोर रहेगा.
उन्होंने कहा कि अगले तीन सालों में एकलव्य मॉडल रेजिडेंशियल स्कूलों में 38,800 शिक्षक लिए जाएँगे.
वहीं महिलाओं को भी नए टैक्स सिस्टम के तहत सात लाख रुपए तक की आय पर कोई टैक्स नहीं देना पड़ेगा.
लेकिन जानकारों का मानना है कि निर्मला सीतारमण एक महिला हैं, ऐसे में उन्हें महिलाओं को लेकर टैक्स में छूट देने का अलग से प्रावधान करना चाहिए था.
विशेषज्ञ ये भी मानते हैं कि सिंगल महिलाओं के बारे में भी वित्त मंत्री को इस बजट में सोचना चाहिए था.
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