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जेसिंडा अर्डर्न का इस्तीफ़ाः राजनेताओं पर किस तरह का रहता है दबाव?
- Author, एलिस कडी
- पदनाम, बीबीसी न्यूज़
न्यूज़ीलैंड की प्रधानमंत्री जेसिंडा अर्डर्न ने इसी हफ़्ते अपने इस्तीफ़े की घोषणा करके पूरी दुनिया को हैरत में डाल दिया.
उन्होंने कहा कि इस पद ज़िम्मेदारी को निभाने के लिए उनके पास कुछ ख़ास नहीं बचा है.
उन्होंने कहा, "राजनेता इंसान ही हैं. हमसे जो हो सकता है, जहां तक संभव हो हम उसे करते हैं और फिर ऐसा वक्त भी आता है." इस भावुक भाषण ने ये संकेत दे दिया था कि उनका साढ़े पांच साल के कार्यकाल का वक़्त ख़त्म हो गया है.
ये बहुत असाधारण है कि एक नेता स्वीकार करे कि वो थक चुका है, लेकिन बहुत हैरान होने की बात नहीं है कि देश की अगुवाई करने की नियति इस नतीजे तक ले जा सकती है.
दुनिया के नेताओं के पास बहुत तरह के विशेषाधिकार होते हैं, लेकिन अक्सर उन्हें लगातार यात्राओं, लंबे काम के घंटे और आराम के लिए बहुत कम समय मिलने जैसी स्थितियों से दो-चार होना पड़ता है.
न्यूज़ीलैंड की पूर्व प्रधानमंत्री हेलेन क्लार्क देश के शीर्ष ज़िम्मेदारी वाले पद के दबाव को बहुत अच्छी तरह से समझती हैं.
साल 1999 से 2008 के बीच नौ सालों तक प्रधानमंत्री रहने के दौरान उन्हें 'दिन में कई कई घंटे काम' करते रहना याद है.
अतिशय काम से चुक गई हिम्मत
अर्डर्न की तरह वो भी ऑकलैंड में रहती थीं और राजधानी वेलिंगटन तक उन्हें लगातार यात्रा करनी पड़ती थी, जो कि एक घंटे की हवाई यात्रा जितना दूर है.
उन्होंने बीबीसी को बताया, "आमतौर पर सुबह सात बजे की फ़्लाइट के लिए पांच बजे उठना ही होता है और सोने जाते जाते आधी रात बीत जाती है."
"रात में आप वेलिंगटन में होते हैं, आपको सुबह उठना भी है और थोड़े बहुत काम भी करने हैं."
क्लार्क कहती हैं कि इतने काम के बीच उन्होंने सप्ताहांत में खुद के लिए कुछ समय निकालने की कोशिश भी की थी.
उन्होंने कहा, "ऐसा लगा कि मिस अर्डर्न पर काम का बहुत बोझ था. इसके अलावा बड़े राजनीतिक बदलावों के बीच उन पर परिवार और करियर में संतुलन स्थापित करने का भी अतिरिक्त दबाव था."
वो कहती हैं, "मेरे समय इतना दबाव नहीं था. मैं अपने काम पर अधिक फ़ोकस करने की हालत में थी."
गुरुवार को अपनी घोषणा में अर्डर्न ने कहा कि 'उनके पार्टनर और बेटी, जो कि प्रधानमंत्री रहने के दौरान ही पैदा हुई थीं, दोनों ने ही यक़ीनन सबसे अधिक त्याग किया.'
क्लार्क कहती हैं कि इस बड़ी ज़िम्मेदारी को निभाने के लिए ये बहुत ज़रूरी है कि आपका सपोर्ट सिस्टम बहुत मजबूत हो.
वो कहती हैं, "जेसिंडा के पास एक बहुत सहयोग करने वाला पार्टनर है और उनके माता पिता भी उनकी बहुत मदद करने वाले रहे हैं. लेकिन ये बहुत अधिक कठिन और असाधारण समय है."
क्लार्क के अनुसार, "अपने साढ़े पांच साल के कार्यकाल में उन्हें जिन चीज़ों का सामना करना पड़ा, शायद वो थोड़ा बहुत मेरे 9 साल के कार्यकाल के अंतिम दिनों जैसा रहा."
क्लार्क मानती हैं कि नेताओं पर बहुत अधिक दबाव होता है, लेकिन आज के सोशल मीडिया और 24 घंटे न्यूज़ के दौर और ट्रोलिंग और साज़िश ढूंढने वालों और बाकी चीजों से ये दबाव और बढ़ जाता है.
बेहोश होने के बाद दे दिया इस्तीफ़ा
ब्रिटिश हिस्टोरियन और पॉलिटिकल बायोग्राफ़र सर एंथनी सेलडन उनकी बात से इत्तेफ़ाक रखते हैं, "असल में ये दबाव और बढ़ता ही गया है."
वो कहते हैं, "बहुत सारे बोझ एक साथ आ रहे हैं और ये सभी सीधे राजनेता की मेज़ पर होते हैं. इनके पास भी हफ़्ते में उतने ही दिन और घंटे होते हैं जैसे औरों के. और बाकी लोगों की तरह उन्हें भी सोना और आराम करना होता है.... लेकिन लेकिन उम्मीदें बढ़ती ही जा रही हैं."
दबाव झेलना नेताओं के लिए आम है ये स्वीकार करने की बजाय कि 'बस बहुत हो चुका.' लेकिन हाल के सालों में ऐसे कई उदाहरण देखने को मिले हैं जब राजनीतिक शख़्सियत उम्मीदों पर ख़रा उतरने के लिए सार्वजनिक रूप से संघर्ष करते नज़र आए.
अर्डर्न ने कोरोना वायरस महामारी को अपने कार्यकाल के दौरान सबसे कठिन चुनौती के रूप में ज़िक्र किया.
मार्च 2020 में डच सरकार के जिस मंत्री पर कोरोना वायरस से निपटने की ज़िम्मेदारी थी, वो संसद में हो रही बहस के दौरान बेहोश गिर पड़े थे, उसके बाद उन्होंने इस्तीफ़ा दे दिया. ब्रूनो ब्रूईंस कहते हैं कि हफ़्तों तक लगातार काम करने के कारण वो बेहोश हो गए थे.
बाद में उन्होंने एक साक्षात्कार में कहा कि पद छोड़ने के बाद, राजनीति से बाहर अपना नया करियर शुरू करने से पहले वो तीन महीने तक सोते रहे थे.
उन्होंने एक न्यूज़ चैनल को बताया, "मंत्री रहने के दौरान, एक समय ऐसा भी आया जब वो चार बजे सुबह उठते थे, जब मैं बेहोश होकर गिर पड़ा, उस समय मैं सोना चाहता था."
जब 15 महीने 15 साल जैसे लगे
इसके एक साल बाद ऑस्ट्रिया के स्वास्थ्य मंत्री रूडोल्फ़ एशेकोबेर ने ये कहते हुए अपने पद से इस्तीफ़ा दे दिया कि 'वो अत्यधिक काम से बहुत थक चुके हैं.'
उस समय उन्होंने पत्रकारों से कहा था, "दशकों में आने वाली सबसे बुरे स्वास्थ्य स्वास्थ्य संकट के समय जनता को एक ऐसे स्वास्थ्य मंत्री की ज़रूरत थी जो सौ फ़ीसदी फ़िट हो, जो कि इस समय मैं नहीं हूं."
उन्होंने कहा कि उनका 15 महीने का कार्यकाल '15 साल जैसा महसूस' हुआ.
अर्डर्न के इस्तीफे के बाद एस्टोनिया के नेता काजा कालास ने बीबीसी को बताया, "मेरी हालत से ये मिलता जुलता है. इसकी क्या क़ीमत अदा करनी पड़ती है, मैं बिल्कुल समझ सकती हूं."
लीड्स यूनिवर्सिटी में साइकोलॉजी के प्रोफ़ेसर डेरिल ओ कॉर्नर कहते हैं, "पूरी तरह थक जाने का मुख्य कारण काम का तनाव है."
ये किसी के भी साथ हो सकता है, नर्स और डॉक्टरों से लेकर एथलीट, अध्यापक और अभिभावक तक इसकी चपेट में आ सकते है.
डॉ. कॉर्नर के मुताबिक एक प्रधानमत्री के लिए तो तनाव 'स्थाई' होता है.
वो कहते हैं, "आमतौर पर अन्य लोग अपनी रोज़ाना ज़िंदगी में कई बदलाव कर सकते हैं, इसकी वजह से उनके स्नायु तनाव को भी कम होने के लिए समय मिल जाता है. अत्यधिक ज़िम्मेदारी वाली नौकरियों में लोग जनता की नज़रों में होते हैं, मसलन किसी देश के प्रधानमंत्री के पास आरामतलबी बिल्कुल नहीं होती."
पॉलिटिकल बॉयोग्राफ़र सर एंथनी ने ब्रिटेन के कई नेताओं की जीवनी को लिखा है, वो कहते हैं कि अधिकांश प्रधानमंत्री अपने कार्यालय का काम ख़त्म करते करते थक कर चूर हो जाते हैं.
वो कहते हैं, "क्रिसमस के दिन या अपने जन्मदिन पर भी ये नहीं भूल सकते कि आपको सुबह चार बजे की पार्टी में पूरे समय रहना है. सच्चाई ये कि अधिकांश लोग इतना नहीं कर सकते, लेकिन कुछ ही लोग स्वीकार करते हैं."
ईमानदारी की तारीफ़
इस्तीफ़े की घोषणा के बाद कई लोगों ने अर्डर्न की ईमानदारी की तारीफ़ की.
ब्रिटेन के एक पूर्व मंत्री एसेल मॉरिस ने कहा कि अर्डर्न के ऐलान ने 20 साल पहले उनके एक हाई प्रोफ़ाइल इस्तीफ़े की याद दिला दी है.
वो कहती हैं, "मैं ज़रा सा भी ये दावा नहीं करती हूं कि मैं उनकी तरह हूं लेकिन जो भावना थी वो जानी पहचानी लगी."
साल 2002 में बैरोनेस मॉरिस ने अपने इस्तीफ़े में लिखा कि "उन्हें नहीं लगता कि वो उतनी प्रभावी नहीं थीं, जितनी वो चाहती थीं."
वो कहती हैं, "मैं जानती हूं कि मैं उस ज़िम्मेदारी में अच्छी थी. लेकिन एक समय ऐसा भी आता है जब हालात ऐसे हो जाते हैं कि आप जितना चाहते हैं उतनी ताक़त इस्तेमाल नहीं कर सकते... मुझे लगता है कि इस बारे में आपको खुद से ईमानदार होना चाहिए."
"जेसिंडा ने स्पष्ट किया कि उन्हें अपनी ज़िम्मेदारी पसंद थी और ये वाक़ई बहुत महत्वपूर्ण ज़िम्मेदारी थी लेकिन वो इसे इस वक़्त नहीं कर सकतीं, बिल्कुल यही बात मैंने भी महसूस की थी."
कब हटना है पता रहना चाहिए
बैरोनेस मॉरिस के अनुसार, ये एक क़िस्म की ताक़त ही है कि आपको पता है कि कब अलग हट जाना है.
वो कहती हैं, "2023 में नौकरी बदलना कोई असाधारण बात नहीं है. असाधारण ये है कि आप इतना साहस जुटा पाते हैं. इसीलिए ये बहुत ग़ौर करने वाली बात है."
जेसिंडा अर्डर्न ने कहा कि वो अपने परिवार के साथ अधिक से अधिक वक़्त गुज़ारना चाहेंगी, अपनी बेटी के साथ तब तक रहना चाहेंगी जब तक वो स्कूल न जाना शुरू कर दे और अपने मंगेतर से शादी न कर लें.
जो लोग राजनीति में भविष्य देखते हैं, उनके लिए क्लार्क की चेतावनी है कि इस शीर्ष ज़िम्मेदारी में बहुत मुश्किलें हैं और इसके लिए यह विश्वास ज़रूरी है कि इतना समय और कोशिश लगाने और कड़ी मेहनत के एवज़ में आप कुछ हासिल कर सकते हैं.
वो कहती हैं, "अगर आप ऐसी स्थिति में पहुंच गए हैं जहां आपको लगता है कि आपके लिए ये चीज़ काम नहीं कर रही है तो आप खुद को अलग हटा लीजिए."
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