बीएचयू कैंपस में नेत्रहीन छात्रा से छेड़छाड़, अभियुक्त को मिली ज़मानत पर उठे सवाल

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- Author, मोहम्मद सरताज आलम
- पदनाम, बीबीसी हिंदी के लिए
"छेड़छाड़ के दौरान नेत्रहीन छात्रा के साथ ऐसी अभद्रता हुई कि महिला होने के नाते मैं बयान नहीं कर सकती."
ये शब्द पीड़िता की सीनियर सोनिया के हैं. वो भी नेत्रहीन हैं.
बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) में हुई इस घटना से नाराज़ छात्र- छात्राओं ने धरना भी दिया है. उनका आरोप है कि इस तरह के मामले लगातार बढ़ रहे हैं. उन्होंने पुलिस कार्रवाई पर भी सवाल उठाए हैं. दूसरी तरफ, पुलिस का कहना है कि इस मामले में तुरंत कदम उठाया गया है.
पीड़िता ने पूरी घटना की जानकारी दी.
पीड़िता के अनुसार 25 जनवरी को बीएचयू के ओल्ड बी-वन छात्रावास से शाम तीन बजे वो सामाजिक विज्ञान संकाय में क्लास करने के लिए निकलीं.
पीड़िता बताती हैं कि अपनी छड़ी की मदद से जब वो लक्ष्मीबाई चौराहे के क़रीब पहुंचीं तो एक व्यक्ति ने उनके सामने अपनी बाइक रोक दी.
पीड़िता ने बताया, "उसने मुझसे कहा, बाइक पर बैठिए मैं आपको ड्रॉप कर देता हूं. मैंने इंकार किया और तेज़ कदमों से चलने लगी. लेकिन उस व्यक्ति ने मेरे सामने फिर बाइक लगा दी. मैं आगे बढ़ती तो वह फिर आगे बाइक लगा देते."
उन्होंने कहा, "वो कह रहे थे, मुझ पर विश्वास करिए मैं आपकी सहायता करना चाहता हूं. आप बाइक पर बैठ जाएं और बताएं आपको कहां छोड़ दूं."
पीड़िता ने कहा, "मैंने बाइक पर बैठते हुए उनसे कहा कि भैया मुझे आर्ट्स फैकल्टी के सामाजिक विज्ञान संकाय जाना है. जब बाइक रुकी तो मुझे एहसास हुआ कि ये आर्ट्स फैकल्टी नहीं है क्योंकि वह स्थान सुनसान था. आर्ट्स फैकल्टी के आसपास काफी चहल-पहल रहती है, गाड़ियों के हॉर्न की आवाज़ें आती रहती हैं."
पीड़िता बताती हैं, "मैंने नाराज़ होते हुए उस व्यक्ति से कहा कि मुझे आर्ट्स फैकल्टी जाना है आप मुझे इस सुनसान इलाक़े क्यों ले आए. मैं गुस्सा करते हुए जैसे ही छड़ी के सहारे आगे बढ़ी, उस व्यक्ति ने मेरा हाथ पकड़ लिया और मुझे खींचने लगा. वो अभद्र हरकतें करने लगा."

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मदद करने वाले बुज़ुर्ग से मारपीट
पीड़िता बताती हैं कि उनकी आवाज़ सुनकर एक बुज़ुर्ग मदद के लिए आए.
उन्होंने पीड़िता से पूछा कि आप बाइक सवार व्यक्ति को जानती हैं? पीड़िता ने उन्हें बताया कि वो उस व्यक्ति को नहीं जानतीं लेकिन उन्होंने पीड़िता को बाइक से लिफ्ट दी थी.
पीड़िता बताती हैं कि बुज़ुर्ग व्यक्ति ने बाइक सवार को डांटते हुए उनसे 'लड़की को तंग न करने को कहा.' लेकिन इसके बाद 'बाइक सवार व्यक्ति मदद के लिए आए बुज़ुर्ग से मारपीट करने लगा.'
शोर होने के बाद आसपास के कुछ छात्रों के अलावा वहां आम लोग भी जमा हो गए.
पीड़िता बताती हैं, "सभी ने मुझसे न डरने को कहा. बुज़ुर्ग अंकल ने पुलिस को बुलाया जिसके बाद हम सभी थाने गए. यहां मुझे मालूम हुआ कि अभियुक्त व्यक्ति बीएचयू के पूर्व डीन के बेटे हैं. फिर मेरी तहरीर पर एफ़आईआर दर्ज हुई."
लंका थाना में दर्ज प्राथमिकी के अनुसार अभियुक्त असीम कुमार राय विश्वनाथपुरी कॉलोनी के रहने वाले हैं और दो बच्चों के पिता हैं. उन पर आईपीसी की धारा 354(क), 354(घ) व 323 के तहत एफ़आईआर दर्ज हुई जिसके बाद पुलिस ने अभियुक्त को गिरफ्तार कर लिया. अभियुक्त को शुक्रवार को ज़मानत भी मिल गई.
बीबीसी ने बुज़ुर्ग व्यक्ति से भी संपर्क करने की कोशिश की लेकिन ख़बर लिखने तक उनसे संपर्क नहीं हो सका है.
'बीस दिन में चौथी घटना'
पीड़िता कहती हैं, "उस व्यक्ति को ज़मानत मिलने के बाद मैं बहुत डरी हुई हूं. जो व्यक्ति परिसर में मेरे साथ अभद्रता कर सकता है वह कुछ भी कर सकता है. घटना के दौरान उसने कहा भी था कि उसका कोई कुछ बिगाड़ नहीं सकता."
वहीं पीड़िता की सीनियर सोनिया कहती हैं, "एफ़आईआर तो दर्ज कर ली गई है लेकिन कमज़ोर धाराएं लगने की वजह से अभियुक्त को शुक्रवार को ज़मानत मिल गई."
एक अन्य नेत्रहीन छात्र संतोष कुमार त्रिपाठी विधि संकाय के छात्र हैं. वो पीड़िता के लिए न्याय की मांग करते हुए धरने पर बैठे हैं.
उन्होंने कहा, "बीस दिनों में इस तरह की ये चौथी घटना है इसलिए हम सभी छात्र धरने पर बैठे हैं. हमारी शिकायत ये है कि छात्रा ने जो तहरीर दी उसके अनुसार धाराएं नहीं लगीं. आरोपी का पीड़िता के प्राइवेट पार्ट पर हाथ लगाना, किस करना, पीड़िता का पीछा करना उसके इरादे को दर्शाता है. इसलिए इसमें 376 की धारा भी लगनी चाहिए. साथ ही महिला का शीलभंग करने पर धारा 509 और 354बी भी लगानी चाहिए."
छात्रावास बी-वन से रानी लक्ष्मीबाई चौराहा पांच सौ मीटर की दूरी पर है. वहां से सामाजिक विज्ञान संकाय लगभग एक किलोमीटर दूर है. रानी लक्ष्मीबाई चौराहा से कृषि विज्ञान संकाय सामाजिक विज्ञान संकाय से विपरीत दिशा में लगभग एक किलोमीटर दूर है.
हॉस्टल की छात्राओं का आरोप है कि यहां से आर्ट्स संकाय की दूरी अधिक है इसलिए लड़कियों के साथ अक्सर छेड़छाड़ की घटनाएं होती रहती हैं.
इस मामले में बीएचयू के चीफ़ प्रॉक्टर अभिमन्यु सिंह कहते हैं, "हमने घटना से संबंधित व्यक्ति को पुलिस के हवाले किया. साथ ही छात्रा ने तहरीर दी तो तुरंत पुलिस ने एफ़आईआर भी दर्ज कर ली है."
वो कहते हैं, "लेकिन छात्राओं की मांग थी कि उनका छात्रावास बदल दिया जाए. हमने दिव्यांग छात्राओं को अब त्रिवेणी हॉस्टल में शिफ्ट करने के लिए कहा है जो आर्ट्स संकाय के पास है."

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पीड़िता के सवाल
पीड़िता कहती हैं, "पूर्व में घटी इस तरह की घटनाएं दबा दी गईं. लेकिन उस समय एक बुज़ुर्ग मुझे बचाने आए. मैं उन्हें जानती भी नहीं लेकिन उनकी मदद से ये मामला एफ़आईआर तक पहुंच सका. लेकिन पुलिस ने अब तक मजिस्ट्रेट के समक्ष मेरा बयान नहीं करवाया है."
वो सवाल करती हैं कि उस व्यक्ति को "कैसे इतनी आसानी से बेल मिल गई? जब वह ज़मानत के बाद छूट गए तो मुझे सुरक्षा कैसे मिलेगी?"
पीड़ित छात्रा का बयान क्यों नहीं कराया गया, इस सवाल पर बनारस के एडिशनल पुलिस कमिश्नर संतोष कुमार सिंह कहते हैं, "कोर्ट बंद है तो बयान सोमवार को ही हो पाएगा. महिला ने जो तहरीर दी थी उस पर मामला लिखा गया है. उन धाराओं में सात साल से कम की सज़ा है. मामला जो था उतना लिखा गया. सात साल से कम की सज़ा के कारण मजिस्ट्रेट ने अभियुक्त को जेल नहीं भेजा."
उन्होंने कहा, "सुप्रीम कोर्ट की रूलिंग है कि जिन अपराधों में सात साल से कम की सज़ा है उसमें अभियुक्त को जेल नहीं भेजा जाएगा. क़ानून तो सबके लिए बराबर है."

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पीड़िता का आरोप ये भी है कि पुलिस की तरफ से कहा गया था उनका मजिस्ट्रेट के सामने दर्ज कराया जाएगा, लेकिन वो नहीं करवाया गया.
इस पर संतोष कुमार सिंह ने कहा कि बयान नहीं हो पाया होगा. उन्होंने कहा, "मजिस्ट्रेट की उपलब्धता पर भी निर्भर करता है. उनका बयान कराया जाएगा."
छात्रों का कहना है कि बीस दिनों में बीएचयू परिसर में ये इस तरह की चौथी घटना है. इस सवाल के उत्तर में संतोष सिंह कहते हैं, "ये डिपेंड करता है कि कहां, क्या घटना हुई. इस मामले में , जितना पीड़िता ने लिखकर दिया था उसी अनुसार धारा लगाई गई और मुकदमा दर्ज हुआ. व्यक्ति को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया गया."
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